हल्द्वानी अग्निकांड:’कोई है बाहर, मुझे बचा लो…’, और फिर खामोश हो गई आवाज; 20 मिनट तक मदद मांगते रहे युवक – Haldwani Fire Tragedy Young Man Cried Out For Help For 20 Minutes But People Failed To Save Him


‘कोई है बाहर… मुझे बचा लो…. कोई है बाहर… बचाओ… बचाओ…’ रामपुर रोड पर जीतपुर नेगी के पास अमेजन के वेयरहाउस में धधकती आग के बीच जिंदगी की जंग लड़ रहे अमित कुमार (26) और नरेंद्र प्रसाद (36) की जुबान से निकले ये आखिरी शब्द थे।

लगभग 20 मिनट तक वेयरहाउस के भीतर से मदद के लिए ये चीखें आती रहीं और फिर अचानक सब कुछ खामोश हो गया। दमकलकर्मियों ने जब भारी-भरकम शटर को काटकर रास्ता बनाया और भीतर दाखिल हुए तो वहां सिर्फ सन्नाटा पसरा था।

 




Haldwani Fire Tragedy young man cried out for help for 20 minutes but people failed to save him

नरेन्द्र प्रसाद की फाइल फोटो
– फोटो : परिजन


धुएं ने दीवारों को स्याह कर दिया था। मलबे और राख के बीच दोनों कर्मियों के बेजान शरीर बरामद हुए। शुक्रवार रात करीब साढ़े 11 बजे बाइक सवार युवक ब्लिंकिट से डिलीवरी लेकर निकल रहा था। उसने गोदाम के शटर के नीचे से धुआं निकलते देखा। रास्ते में उसने एक स्कूटी सवार को इसकी जानकारी दी। 


Haldwani Fire Tragedy young man cried out for help for 20 minutes but people failed to save him

अमित कुमार का फाइल फोटो
– फोटो : परिजन


30 मिनट में धुएं ने विकराल आग का रूप लिया

स्कूटी सवार ने स्थिति को गंभीरता से लिया और तुरंत ब्लिंकिट के अन्य कर्मियों को सूचित किया। अगले 30 मिनट में धुएं ने विकराल आग का रूप ले लिया। अंदर फंसे कर्मी दम घुटने से चीखते रहे लेकिन बाहर जमा कुछ युवा लपटों के आगे बेबस नजर आए।

 


Haldwani Fire Tragedy young man cried out for help for 20 minutes but people failed to save him

अमेजन के वेयरहाउस में लगी आग
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


इसके बाद आग की भयावह लपटें रह गईं जिस पर मशक्कत के बाद दमकल विभाग ने काबू पाया। इस बड़े हादसे के पीछे गोदाम की बनावट और सुरक्षा मानकों की कमी एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है।


Haldwani Fire Tragedy young man cried out for help for 20 minutes but people failed to save him

अमेजन के वेयरहाउस में लगी आग
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


एसी में सोने से नहीं चला पता

पुलिस तफ्तीश के मुताबिक, हादसे के वक्त नरेंद्र और अमित गोदाम के भीतर बने एक एयर-कंडीशनर (एसी) रूम में सो रहे थे। कमरा पूरी तरह से पैक था और एसी चल रहा था। इस कारण शुरुआत में उन्हें बाहर फैल रहे धुएं और आग का बिल्कुल भी आभास नहीं हुआ। जब तक धुआं कमरे के भीतर पहुंचा और उनकी नींद खुली तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 



Leave a Comment