अलवर जिला परिषद भर्ती घोटाला: 655 में से 302 लिपिकों की नियुक्तियां फर्जी, मेरिट से बाहर वालों को भी मिली नौकरी


Alwar LDC Recruitment Scam

जिला परिषद अलवर (ETV Bharat Alwar)

अलवर: देश भर में चल रहे पेपर लीक व भर्तियों में धांधली के शोर के बीच अलवर में भी लिपिक भर्ती में बड़ा घोटाला सामने आया है. राज्य सरकार की ओर से कराई गई जांच में जिला परिषद अलवर की ओर से की गई 655 में से 302 लिपिकों की नियुक्ति में अनियमितता उजागर हुई है. जिला परिषद के सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र ने बताया कि भर्ती को लेकर सरकार की ओर से दिए गए आदेश की पालना में जिला परिषद ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. अब कमेटी जांच करेगी. सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र ने बताया कि फर्जी मिले लिपिकों की सुनवाई कर दोषी पाए जाने पर बर्खास्तगी की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

इसके अलावा इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल रहे 200 से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ भी तीन सप्ताह में कार्रवाई कर सरकार को रिपोर्ट भेजने को कहा गया है. वहीं 18 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गई है. इस भर्ती में लिखित परीक्षा या इंटरव्यू का प्रावधान नहीं था. केवल दस्तावेजों के आधार पर नौकरी दी गई थी, लेकिन उनका भी सत्यापन नहीं कराया गया.

इसे भी पढ़ें- SI भर्ती 2021: डमी कैंडिडेट बिठाकर प्लाटून कमांडर बना आरोपी गिरफ्तार, 10 लाख में किया था सौदा

सत्यापन में भारी लापरवाही: सरकार की ओर से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार जिला परिषद अलवर की ओर से लिपिक भर्ती-2013 की प्रक्रिया 9 साल में पूरी की गई. इस दौरान वर्ष 2013, 2017 व 2022 में तीन चरणों में 655 लिपिकों को नियुक्ति दी गई. इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान बड़ी अनियमितता उजागर हुई. फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर राज्य सरकार की ओर से दल गठित कर पूरे मामले की गहनता से जांच कराई गई, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए. खास बात यह कि लिपिक भर्ती के दौरान नियुक्त 6 कर्मचारियों के आवेदन पत्र ही विभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं. वहीं 3 के आवेदन पत्र संदिग्ध मिले हैं. इसके अलावा नियुक्ति पाए ज्यादातर लिपिकों के अनुभव प्रमाण पत्रों का सत्यापन ही नहीं कराया गया, जबकि इस भर्ती में 655 में से 523 लिपिक बोनस अंक लेकर अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त हुए थे.

अनुभव प्रमाण पत्रों में फर्जीवाड़ा: इतना ही नहीं अनुभव पत्रों की फोटो कॉपी के आधार पर जिला परिषद ने नियुक्ति दे दी. फर्जीवाड़े का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि करीब 144 लिपिकों की ओर से अनुभव प्रमाण पत्रों का दो बार लाभ लेने की आशंका जताई गई, जबकि अनुभव प्रमाण पत्र का उपयोग दस्तावेज सत्यापन में एक ही बार ही करने का प्रावधान है. अनुभव प्रमाण पत्र जारी होने के दौरान संविदा पर कार्य नहीं करने के बाद भी जारी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर करीब 12 लिपिकों को गलत तरीके से नियुक्ति देने का फर्जीवाड़ा भी उजागर हुआ है. वहीं जिले के बजाय राज्य स्तर पर जारी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर 6 लिपिकों को नौकरी दी गई, जबकि ये अनुभव प्रमाण पत्र मान्य ही नहीं थे.

इसे भी पढ़ें- बीकानेर: SI भर्ती में फर्जी एडमिट कार्ड लेकर फिजिकल टेस्ट देने पहुंचा जेल में बंद स्मैक तस्कर, जांच में जुटी पुलिस

एक ही समय दो कार्य, मेरिट नियमों की अनदेखी: जांच रिपोर्ट में जिला परिषद लिपिक भर्ती-2013 में 18 कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है. कारण है कि इन कर्मचारियों के अनुभव प्रमाण पत्र और कंप्यूटर सहित शैक्षणिक अवधि एक है. यानी एक समय में व्यक्ति एक ही जगह कार्य या प्रशिक्षण ले सकता है, यानी इनमें से कोई दस्तावेज तो फर्जी है. इसके अलावा लिपिक भर्ती में 25 कर्मचारियों को मेरिट से बाहर होने पर भी नियुक्ति दे दी गई तथा 37 कर्मचारियों के पास निर्धारित कंप्यूटर योग्यता ही नहीं मिली. वहीं 5 ऐसे कर्मचारियों को भी नियुक्ति दी गई, जिनके नंबर कटऑफ से कम थे.

दोषियों पर सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारियां: लिपिक भर्ती परीक्षा में अनियमितता मिलने पर तीन कर्मचारियों को पहले ही सरकार की ओर से बर्खास्त किया जा चुका है. वहीं फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के मामले में जिला परिषद की भर्ती शाखा के तत्कालीन लिपिक राजेश यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है. वहीं वर्ष 2022 की भर्ती में 8 अन्य अधिकारियों को भी 16 सीसीए की चार्जशीट देने की कार्रवाई की जा चुकी है.

इसे भी पढ़ें- वनरक्षक भर्ती घोटाला: पेपर लीक मामले की ‘मुख्य कड़ी’ जबराराम गुजरात से गिरफ्तार

भर्ती में कटऑफ नियमों का गंभीर उल्लंघन: जिला परिषद लिपिक भर्ती प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2022 की भर्ती में 134 में से 89 कर्मचारियों की नियुक्ति को संदिग्ध माना गया है. हालांकि, इनमें से 3 कर्मचारी अब तक बर्खास्त भी हो चुके हैं. इतना ही नहीं वर्ष 2022 की भर्ती में ओबीसी विधवा महिला कोटे से नियुक्ति देने के 33 दिन बाद कटऑफ जारी करने को भी गलत माना गया है. इसके अलावा ओबीसी विधवा कोटे में तीन को बिना कटऑफ जारी किए ही नौकरी दे दी गई.

जांच कमेटी को 15 दिन का अल्टीमेटम: जिला परिषद के सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र ने बताया कि लिपिक भर्ती को लेकर सरकार की ओर से दिए गए आदेश की पालना में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. यह कमेटी अपनी रिपोर्ट 15 दिन में देगी. कमेटी की ओर से इस दौरान सभी संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी.

इसे भी पढ़ें- अलवर: फर्जी मार्कशीट से डाक विभाग की नौकरी पाने की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार



Leave a Comment