आगरा में करोड़ों की नकली दवाओं का खेल, रिश्तेदारों के नाम पर फर्म बनाकर बिलों में हेराफेरी


जागरण संवाददाता, आगरा। नकली दवा सिंडिकेट ने दवाएं खपाने के लिए रिश्तेदारों के नाम पर फर्में खोलीं, इन फर्मों के नाम पर बिल बनाए गए। तीन से चार फर्मों के नाम पर बिलों को डायवर्ट करने के बाद बाजार में करोड़ों की नकली दवाएं खपा दी, छापे में नकली दवा पकड़े जाने के बाद भी सिडिंकेट से जुड़े दवा कारोबारी जांच के दायरे में नहीं आए। औषधि विभाग ने आठ महीने तक बिलों की जांच की, इसके बाद बिलों की हेराफेरी का खेल पकड़ में आ सका है।
औषधि विभाग की टीम ने चोट, दर्द और सूजन के लिए इस्तेमाल होने वाली चाइमोरल फोर्ट के नकली होने की आशंका पर पिछले वर्ष सात नवंबर को मनोज गुप्ता की फर्म अंशिका फार्मा की जांच की, यहां से दवा की भारी खेप (बैच नंबर 2KU6L055) कोलकाता के पाल ब्रदर्स को बिक्री की गई थी।

थोक दवा कारोबारियों से रिश्तेदारों के नाम पर संचालित हो रही फर्मों का मांगा ब्योरा

अंशिका फार्मा ने दवाएं विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदने के बिल दिखाए, विभोर मेडिकल एजेंसी ने गुप्ता मेडिकल एजेंसी गोरखपुर और हर्षित ट्रेडर्स आगरा से दवाएं खरीदने के बिल दिए। मगर, ये सभी बिल फर्जी थे। इसी बीच वरदान मेडिकल एजेंसी से जांच के लिए भेजे गए चाइमोरल फोर्ट के नमूने अधोमानक मिले और एसिलोक टैबलेट नकली मिली।

वरदान मेडिकल एजेंसी ने इन दवाओं को विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदने का दावा किया। चाइमोरल फोर्ट दवा की निर्माता कंपनी टोरंट फार्मास्यूटिकल्स ने इन दवाओं को उनके द्वारा बाजार में सप्लाई ना करने की पुष्टि की।

वरदान मेडिकल एजेंसी, विभोर मेडिकल एजेंसी, युग फार्मा, वीए एंटरप्राइजेज ने बिल किए डायवर्ट

सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि जांच के दौरान वरदान मेडिकल एजेंसी, विभोर मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, वीए एंटरप्राइजेज, युग फार्मा, रुद्रा एंटरप्राइजेज, शारदा फार्मा और आरएमडी फार्मा द्वारा फार्मा कंपनी से चाइमोरल फोर्ट और मधुमेह की दवा टेल्मा एच दवा के 10 डिब्बे खरीदे, इसी बैच के एक हजार नकली दवाओं डिब्बे तैयार कराए गए।

कोलकाता, दिल्ली, हरियाणा, इंदौर में भी दवाओं की बिक्री की गई

पांच फर्मों से 20- 20 डिब्बों के बिल अपने रिश्तेदारों की फर्म के नाम से काटे गए। तीन से चार बिल काटने के बाद दवाओं को थोक दवा और मेडिकल स्टोर पर बेचा गया। इसके साथ ही कोलकाता, दिल्ली, हरियाणा, इंदौर में भी दवाओं की बिक्री की गई।

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थोक दवाओं के तीन हजार लाइसेंस हैं

दवा कारोबारियों द्वारा अपने रिश्तेदारों के साथ ही दुकान पर काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर भी लाइसेंस लेकर दवाओं की बिक्री की जा रही थी। थोक दवाओं के तीन हजार लाइसेंस हैं। दवा कारोबारियों से रिश्तेदारों के नाम संचालित हो रहीं थोक दवाओं का ब्योरा शपथ पत्र के साथ मांगा गया है। औषधि विभाग की टीम अपने स्तर से भी ब्योरा जुटा रही है जिससे इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों से लेकर औषधि निरीक्षकों की जांच

फव्वारा दवा बाजार में पिछले पांच वर्षों में पंजाब, राजस्थान और दिल्ली पुलिस दवा कारोबारियों को गिरफ्तार कर ले गई। मगर, स्थानीय स्तर पर औषधि विभाग की छापेमारी के बाद नोटिस देकर छोड़ दिया गया। इसके पीछे दवा एसोसिएशन के पदाधिकारी और औषधि निरीक्षकों की मिलीभगत की भी शिकायत मिली है। इनकी भी जांच कराई जा रही है।

इसके चलते आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने मई, जून और जुलाई में छापेमारी के दौरान स्थानीय औषधि विभाग को जानकारी नहीं दी, छापेमारी का नेतृत्व भी किया। साफ छवि वाले औषधि निरीक्षकों को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई।

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दवा कारोबारियों पर करोड़ों की संपत्ति, खूब पैसा करते हैं खर्च

नकली दवा सिंडिकेट में शामिल कारोबारियों की करोड़ों की संपत्ति है, कमला नगर सहित पाश कालोनियों में मकान हैं। रियल एस्टेट में भी निवेश किया गया है। इनके द्वारा बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन में खूब पैसा खर्च किया जाता है। फव्वारा दवा बाजार में गलियों में दुकानें हैं। ये स्थानीय स्तर पर दवाओं की बहुत कम बिक्री करते हैं।

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थोक दवा बाजार की 40 प्रतिशत दुकानें बंद, बड़ी मछलियों पर नजर

फव्वारा दवा बाजार में छापेमारी के बाद 40 प्रतिशत दुकानें बंद हैं। दवा बाजार में भी खलबली मची हुई है। 10 जुलाई की छापेमारी में मोहन ट्रेडर्स, कंबूटोला, मनी मेडिकल मुबारक महल को सील कर दिया था। इन्हें खोलकर टीम जांच करेगी, इसमें भी बड़ा नेटवर्क खुल सकता है।

नीलकंठ, कृष्णा काम्प्लेक्स व मनु फार्मा, कोतवाली के सामने की खरीद बिक्री पर रोक लगा दी है। औषधि विभाग की टीम की अवैध दवा कारोबार करने वाले बड़े कारोबारियों पर नजर है, इनके खिलाफ सुबूत जुटाए जा रहे हैं।



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