इनकम टैक्स रिकवरी: अब बकाया टैक्स के लिए नहीं होगी गिरफ्तारी, CBDT ने बदले नियम
देश के डायरेक्ट टैक्स प्रशासन ने टैक्स वसूली के नियमों में राहत भरा रुख अपनाया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने 17 सितंबर को एक नोटिफिकेशन जारी कर रिकवरी प्रक्रिया से जुड़े नियम 225 से “गिरफ्तारी और हिरासत” के प्रावधान को हटा दिया है। बकाया टैक्स वसूली से जुड़ा यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा।
सीबीडीटी ने नियम 225 के क्लॉज 4(c) को खत्म कर दिया है, जो गिरफ्तारी की अनुमति देता था। इसके साथ ही सिविल जेल से जुड़े सब-रूल्स 75 से 83 और 91 को भी हटा दिया गया है। वहीं सब-रूल 87 से पुलिस मदद के संदर्भ में दर्ज “गिरफ्तारी और हिरासत को छोड़कर” वाक्य हटा दिया गया है। इस संबंध में जारी नोटिफिकेशन का नंबर G.S.R. 822(E) है।

नियम 225 में बदलाव: बिना गिरफ्तारी के होगी इनकम टैक्स रिकवरी
| पुराना नियम 225 | नया नियम 225 (17 सितंबर, 2026) |
|---|---|
| विशेष सब-रूल्स के तहत गिरफ्तारी और सिविल हिरासत की अनुमति थी। | नोटिफिकेशन G.S.R. 822(E) के जरिए गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधान हटा दिए गए। |
| गिरफ्तारी से जुड़े अपवादों के साथ पुलिस सहायता का उल्लेख था। | सब-रूल 87 से “गिरफ्तारी और हिरासत को छोड़कर” शब्द हटा दिया गया। |
| संपत्तियों की जब्ती और नीलामी का विकल्प उपलब्ध था। | मुख्य हथियार के रूप में संपत्ति की जब्ती और नीलामी का नियम बिना किसी बदलाव के जारी रहेगा। |
| गार्निशी आदेशों (Garnishee directions) के जरिए थर्ड-पार्टी रिकवरी की अनुमति थी। | गार्निशी आदेश आगे भी लागू रहेंगे; अब इन पर निर्भरता और अधिक बढ़ सकती है। |
| पिछली तारीख से लागू करने (Retrospective effect) का प्रावधान नहीं था। | नोटिफिकेशन के अनुसार, यह 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। |
इनकम टैक्स रिकवरी के लिए अधिकारियों के पास अब भी हैं ये अधिकार
टैक्स वसूली के लिए संपत्तियों को अटैच करना और बेचना अब भी विभाग का मुख्य हथियार रहेगा। इसके तहत अधिकारी बैंक खाते फ्रीज कर सकते हैं, चल संपत्ति जब्त कर सकते हैं और अचल संपत्ति की नीलामी कर सकते हैं। वे किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को भी डिफॉल्टर की देनदारी से सीधा भुगतान करने का आदेश दे सकते हैं। आने वाले दिनों में इन रास्तों का अधिक इस्तेमाल देखने को मिल सकता है, जबकि पुलिस की भूमिका केवल जब्ती और नीलामी की सुरक्षा तक ही सीमित रहेगी।
कानूनी वारिस और इनकम टैक्स रिकवरी के नियम
टैक्सपेयर की मृत्यु के मामले में, बकाया टैक्स की रिकवरी पूरी तरह से उसकी छोड़ी गई संपत्ति से होगी। कानूनी वारिसों की जिम्मेदारी केवल उतनी ही संपत्ति तक सीमित रहेगी, जो उन्हें मृतक से मिली है। जब तक कि विरासत की संपत्ति का दुरुपयोग न किया गया हो, उनकी निजी संपत्तियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। विभाग कानूनी वारिस को “प्रतिनिधि करदाता” (Representative Assessee) मानकर नोटिस भेजेगा और प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी और व्यावहारिक कदम
अगर आपको टैक्स डिपार्टमेंट की किसी डिमांड पर आपत्ति है, तो पेंडिंग अपील और सीबीडीटी के दिशानिर्देशों का हवाला देकर स्टे की मांग करें। अगर कैश फ्लो की दिक्कत है, तो किश्तों में भुगतान (Installment recovery) का अनुरोध करें। गणना से जुड़ी गलतियों को सुधारने के लिए रेक्टिफिकेशन फाइल करें और आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। उदाहरण के लिए: ₹1.2 लाख के बकाए पर, ₹10,000 का मासिक गार्निशी आदेश 12 महीनों में पूरे बकाए को साफ कर देता है।
नियम 225 पर आगे किन बातों का ध्यान रखें
विभाग के फील्ड निर्देशों और FAQs पर नजर रखें, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि अधिकारी रिकवरी के कदमों को कैसे प्राथमिकता देंगे। वहीं, पिछली तारीख से लागू होने वाले इस नियम और पुराने मामलों को लेकर अदालतों में मुकदमेबाजी भी देखने को मिल सकती है। अधिकांश डिफॉल्टरों के लिए नया नियम अब ‘व्यक्तिगत गिरफ्तारी’ के बजाय ‘संपत्तियों की वसूली’ पर ध्यान केंद्रित करता है। अपने बकाया डिमांड की तुरंत समीक्षा करें ताकि समय रहते भुगतान या कानूनी विकल्प चुनने की योजना बनाई जा सके।