इस बार पहले से ज्यादा भीषण होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? डोनाल्ड ट्रंप कर रहे बड़े हमले की तैयारी, International Hindi News


अमेरिका जिस तरह से तैयारी कर रहा है, उससे लगता है कि इस बार अगर ईरान और अमेरिका में सीधे युद्ध शुरू होता है तो यह पहले से ज्यादा भीषण होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल में अपने रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट तैनात कर दिए हैं। 

ईरान और अमेरिका में समझौते की तमाम कोशिशों के बाद भी एक बार फिर दोनों देश युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। वहीं इस बार अगर युद्ध शुरू होता है तो यह पहले से ज्यादा भीषण हो सकता है। अमेरिका एक तरफ दर्जनों रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को इजरायल भेजने की तैयारी कर रहा है तो दूसरी ओर ईरान ने भी कमर कस ली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई करने वाले हैं। वहीं पिछले सात दिनों से अमेरिका लगातार ईरान पर हमले कर रहा है। इन हमलों के दौरान एयरपोर्ट, पुल, बंदरगाह, सर्विलांस टावर और रिहाइशी इमारतों को भी निशाना बनाया गया है।

बड़े हमले का प्लान बना रहे डोनाल्ड ट्रंप

मंगलवार को सिचुएशन रूम में बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के सामने सेना ने अपने प्लान रखे हैं। हालांकि अभी डोनाल्ड ट्रंप ने कोई फाइनल फैसला नहीं किया है। आने वाले दिनों में इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता कि डोनाल्ड ट्रंप बड़े स्तर पर हमले का आदेश दे देंगे। फिलहाल अमेरिका होर्मुज के आसपास और एनर्जी प्लांट्स को निशाना बना रहा है।

परमाणु ठिकानों को बनाया जा सकता है निशाना

रिपोर्ट्स में कहा गया था कि जिन परमाणु ठिकानों को अमेरिका ने पिछले साल जून में तबाह किया था, ईरान ने उन्हें फिर से दुरुस्त कर लिया है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि अमेरिका उन परमाणु ठिकानों को फिर से निशाना बना सकता है। वहीं ईरान ने इस बार यूरेनियम के भंडार को पहले से कहीं ज्यादा नीचे छिपाया है जिससे अमेरिका यहां तक पहुंच ना पाए और उन्हें नष्ट ना कर पाए। एक्सियस के मुताबिक अमेरिका की रणनीति यही है कि वह ईरान को झुकाने और होर्मुज को खुलवाने के लिए उसका बड़े से बड़ा नुकसान करना चाहता है।

वहीं द वॉल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सेना प्रमुख से सलाह कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक तेल अवीव में बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिका के 30 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट खड़े हैं। इतने ही एयरक्राफ्ट दक्षिण इजरायल में भी खड़े किए गए हैं।

इजरायली अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में दर्जनों और भी एयरक्राफ्ट तैनात किए जाएंगे। एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल हवा में ही लड़ाकू विमानों में ईंधन डालने के लिए किया जाता है। इससे ज्यादा समय तक लड़ाकू विमान हमला करते रहते हैं। पिछले कई दिनों से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। अंतरिम युद्धविराम टूटने के बाद, इस युद्ध के जल्द समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं।

‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड’ ने बताया कि उसने लगातार सातवीं रात ईरान के खिलाफ अभियान में उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से हमले किए। शनिवार तड़के जारी बयान में कहा गया कि इन हमलों में निगरानी केंद्रों, सैन्य रसद ढांचे, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। वहीं कुवैत ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को बीच में ही रोककर मार गिराया। बहरीन में भी हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी अपने कई और सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बाधित कर दी, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर आ गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए कहा,” ईरान में भी हम बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहे हैं और इसके नतीजे बहुत जल्द दुनिया के सामने होंगे।’ युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। अब ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने और लंबे समय तक चलने वाले पश्चिम एशिया संघर्ष से बचने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ईरान में पुलों और बिजली ढांचे पर हमले हुए है।

ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत के कई पुलों को निशाना बनाया गया। माना जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य बंदर अब्बास बंदरगाह को देश के मध्य भाग और राजधानी तेहरान से जोड़ने वाले सड़क एवं रेल संपर्क को बाधित करना है। ईरान ने पहली बार स्वीकार किया कि अमेरिकी हमलों में उसके बिजली ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी प्रांतों के लोगों से बिजली की बचत करने की अपील की, हालांकि यह नहीं बताया कि कौन-से प्रतिष्ठान प्रभावित हुए।

ईरानी अधिकारियों ने बताया कि हाल के अमेरिकी हमलों में 46 लोगों की मौत हुई है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। शुक्रवार को एक पुल पर हुए हमले में आठ लोगों की जान गई। उधर, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सोमवार से अब तक 13 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें थलसेना के 10 और नौसेना के तीन जवान शामिल हैं। युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 427 सैनिक घायल हो चुके हैं।

अमेरिकी हमलों में ओमान की खाड़ी स्थित ईरान के चाबहार बंदरगाह का एक प्रमुख निगरानी टॉवर भी ढह गया। इसकी पुष्टि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए और बाद में अमेरिकी सेना ने भी की। भारत के सहयोग से विकसित चाबहार बंदरगाह हाल के दिनों में अमेरिकी हमलों का निशाना रहा है। ईरान का कहना है कि यह टॉवर बंदरगाह पर आने-जाने वाले व्यावसायिक जहाजों की निगरानी के लिए इस्तेमाल होता था, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि यह रिवोल्यूशनरी गार्ड के समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा था, जिसका उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जाता था। (एजेंसी से इनपुट्स के साथ)



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