ईरान ने ठुकराया ट्रंप का अनिवार्य अब्राहम समझौता:क्षेत्रीय शांति पर नया संकट, तेहरान-अमेरिका के बीच बढ़ी तल्खी – Iran Rejects Trumps Mandatory Abraham Accords Expansion Iranian Envoy Mohammad Fathali


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अब्राहम समझौते के जबरन विस्तार की कोशिशों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने साफ किया है कि कोई भी शांति समझौता बाहरी दबाव के बजाय जमीनी हकीकत पर आधारित होना चाहिए। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने चेतावनी दी है कि बिना किसी ठोस भू-राजनीतिक आधार के थोपे गए समझौते सफल नहीं होंगे।

ट्रंप का फरमान और ईरान की दो टूक

हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लंबी पोस्ट साझा की थी। इसमें उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे मुस्लिम देशों के लिए अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य बताया था। ट्रंप इसे तेहरान के साथ जारी गुप्त वार्ताओं के बीच एक ‘महासमझौते’ के रूप में देख रहे हैं।

राजदूत फतहाली ने एएनआई से बात करते हुए इस अमेरिकी दृष्टिकोण की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिरता बाहरी ताकतों की ओर से निर्मित नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब वहां की सरकारें आपस में सहयोग करें। उन्होंने इन समझौतों को शांति के बजाय केवल दिखावे का प्रोजेक्ट करार दिया। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश भी इस अमेरिकी दबाव से असहज हैं।

परमाणु समझौते की राह में अमेरिका बना रोड़ा?

एक तरफ ट्रंप इस विस्तार को युद्धविराम की पूर्व शर्त बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने कड़ा रुख अपनाया है। अराघची ने कहा कि अमेरिका को अपना विरोधाभासी रुख छोड़ना होगा। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी के साथ फोन पर बातचीत के दौरान अराघची ने कहा कि ईरान अपने वैध अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही इस कूटनीतिक प्रक्रिया में 60 दिनों के एक समझौता ज्ञापन पर चर्चा हो रही है। इस समझौते के तहत ईरान को उच्च संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने और परमाणु हथियारों की दौड़ से बाहर रहने की प्रतिबद्धता जतानी होगी। इसके बदले में अमेरिका ईरान की नौसैनिक घेराबंदी खत्म करने और उसकी जब्त संपत्ति को मुक्त करने पर चर्चा करेगा। हालांकि, ईरान ने ओमान को धमकाने और विरोधाभासी बयान देने के लिए अमेरिका की आलोचना की है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान की भूमिका

इस पूरे विवाद में ओमान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। ईरान ने ओमान के सिद्धांतवादी रुख की सराहना की है, जबकि अमेरिका ने ओमान को ईरान के साथ टोलिंग सिस्टम में शामिल होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, बाद में बेसेंट ने यह भी बताया कि ओमान ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है। वर्तमान में ट्रंप इस पूरे मसले पर व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक आपातकालीन बैठक करने की तैयारी कर रहे हैं।


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