ईरान संकट:तेल-खाद के बढ़ते बिल ने बढ़ाई सरकार की टेंशन, पेट्रोलियम कंपनियों को दी 1.23 लाख करोड़ की मदद – Iran Crisis Impact On Indian Economy Gdp Challenges And Oil Subsidy Updates


ईरान संकट के कारण ईंधन और उर्वरक का आयात बिल बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, घरेलू खपत के दम पर वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को कहा, खाद की वैशि्वक कीमतें बढ़ने से उर्वरक मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सब्सिडी 100 फीसदी बढ़ाने की मांग की है। बजट में 1.77 लाख करोड़ की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया गया है। सूत्रों ने बताया, ईरान संकट के बाद से 78 दिनों तक पेट्रोल पंप पर कीमतें स्थिर रखने के लिए सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को 1.23 लाख करोड़ की मदद दी है। हालांकि, कंपनियों ने इसके बाद धीरे-धीरे कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। इसके बावजूद वैश्विक कीमतों के मुकाबले कम दाम पर ईंधन बेचने से उन्हें अब भी हर दिन 650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बरकरार

सूत्रों ने बताया, 2025-26 की मार्च तिमाही में दिखी वृद्धि की रफ्तार 2026-27 की पहली तिमाही में भी जारी है। विदेश से भेजी जाने वाली राशि पर भी बुरा असर नहीं पड़ा है। जीएसटी के आंकड़े अच्छे हैं। निर्यात, बिजली खपत के आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। निजी निवेश में भी तेजी आ रही है। सरकार अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़े और मानसून पर अल-नीनो के असर की जानकारी मिलने के बाद जुलाई में आर्थिक आंकड़ों का फिर आकलन करेगी।

अतिरिक्त कर्ज नहीं लेगी सरकार

सूत्रों ने कहा, बजट में टैरिफ संकट को ध्यान में रखा गया था। अब मौजूदा चुनौतियों के बीच सरकार को फिलहाल अतिरिक्त कर्ज लेने या संसद के आगामी मानसून सत्र में पूरक अनुदान मांग लाने की जरूरत नहीं है। राजकोषीय घाटा अब भी बजट लक्ष्य के अनुरूप 4.3 फीसदी पर बरकरार है।

80,000 करोड़ का विनिवेश संभव

विनिवेश के मोर्चे पर सूत्र ने कहा, दीपम और सार्वजनिक उद्यम विभाग दोनों इस योजना पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस मद में चालू वित्त वर्ष के बजट में तय 80,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार हो जाएगा। आईडीबीआई बैंक का विनिवेश भी होगा।


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