नई दिल्ली (Difference Between NCC and NSS). स्कूल या कॉलेज के दिनों में आपने यूनिफॉर्म पहने, कदम से कदम मिलाकर परेड करते कैडेट्स और ‘NOT ME BUT YOU’ के बैज के साथ समाज सेवा करते वॉलंटियर्स को जरूर देखा होगा. ये दोनों ग्रुप हैं एनसीसी (NCC) और एनएसएस (NSS). अक्सर स्टूडेंट्स इन दोनों को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं कि आखिर दोनों में से किसे चुनें और दोनों में क्या फर्क है.
Difference between NCC and NSS एनसीसी और एनएसएस एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं
अगर आप भी अपने करियर को स्पीड देना चाहते हैं और पढ़ाई के साथ-साथ कुछ एक्स्ट्रा सीखना चाहते हैं तो NCC और NSS दोनों ही बेहतरीन प्लेटफॉर्म हैं. हालांकि, इन दोनों का मकसद, ट्रेनिंग का तरीका और आगे चलकर मिलने वाले फायदे एक-दूसरे से काफी अलग हैं. जहां एनसीसी सैन्य अनुशासन और देशभक्ति का पाठ पढ़ाती है, वहीं एनएसएस समाज सेवा और लीडरशिप सिखाती है. जानिए दोनों के बीच अंतर.
एनसीसी और एनएसएस के बीच क्या अंतर है?
एनसीसी का फुल फॉर्म नेशनल कैडेट कॉर्प्स है और एनएसएस का नेशनल सर्विस स्कीम. इन दोनों के बीच कई अंतर हैं, जिनके बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए.
- NCC (National Cadet Corps): यह देश की Tri-Services ऑर्गनाइजेशन है. इसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना शामिल हैं. इसका मुख्य काम युवाओं में अनुशासन, लीडरशिप और देशभक्ति की भावना जगाना है. इसमें कैडेट्स को फौजी स्टाइल में परेड, राइफल शूटिंग और कैंप्स की ट्रेनिंग दी जाती है.
- NSS (National Service Scheme): यह युवा और खेल मंत्रालय के तहत आने वाली समाज सेवा योजना है. इसका मोटो ‘Not Me But You’ (मैं नहीं, आप) है. इसमें स्टूडेंट्स को गांवों में जाकर सफाई अभियान, रक्तदान शिविर, साक्षरता अभियान और आपदा राहत जैसे सामाजिक कार्यों से जोड़ा जाता है.
NCC का फोकस डिफेंस और अनुशासन पर होता है, जबकि NSS का समाज सेवा और कम्युनिटी डेवलपमेंट पर रहता है.
स्कूल में कब क्या जॉइन करें?
- NCC की शुरुआत: इसे क्लास 8 या 9 (उम्र 12 से 18 साल) से ‘जूनियर डिविजन’ (A सर्टिफिकेट) के तौर पर जॉइन कर सकते हैं. इसके बाद 11वीं-12वीं या कॉलेज में ‘सीनियर डिविजन’ (B और C सर्टिफिकेट) जॉइन किया जाता है.
- NSS की शुरुआत: एनएसएस की मुख्य शुरुआत कक्षा 11वीं-12वीं और कॉलेज/यूनिवर्सिटी स्तर से होती है. कॉलेज में 2 साल का सर्विस पीरियड पूरा करने पर एनएसएस का नेशनल या स्टेट सर्टिफिकेट मिलता है.
सरकारी नौकरी में क्या-क्या फायदे मिलते हैं?
डिफेंस और पुलिस में NCC का जलवा:
- Direct SSB Interview: NCC का ‘C’ सर्टिफिकेट (A या B ग्रेड के साथ) रखने वाले स्टूडेंट्स को भारतीय सेना (Indian Army) में CDS/UPSC की लिखित परीक्षा नहीं देनी पड़ती, उन्हें सीधे SSB इंटरव्यू का बुलावा आता है.
- बोनस मार्क्स: स्टेट पुलिस भर्ती (जैसे यूपी, बिहार, राजस्थान पुलिस), पैरा मिलिट्री (SSC GD) और अग्निवीर भर्ती में NCC सर्टिफिकेट धारकों को 2% से 5% तक बोनस अंक मिलते हैं.
उच्च शिक्षा और नौकरियों में NSS के फायदे:
- कॉलेज एडमिशन में वेटेज: बीए, बीएससी, एमए या यूनिवर्सिटी एडमिशन के समय NSS सर्टिफिकेट होने पर 2% से 5% तक एक्स्ट्रा मार्क्स या कोटा मिलता है.
- सरकारी सेवाओं में वरीयता: राज्य लोक सेवा आयोग (State PSC), टीचिंग एग्जाम्स और सोशल वर्क से जुड़ी सरकारी और NGO नौकरियों में NSS वॉलंटियर्स को प्राथमिकता दी जाती है.
एनसीसी और एनएसएस में से क्या सही रहेगा?
अगर आपका सपना भारतीय सेना, पुलिस या पैरा मिलिट्री में जाने का है और आपको एडवेंचर, शूटिंग और अनुशासन पसंद है तो NCC नंबर वन चॉइस है. वहीं अगर आपको लोगों की मदद करना, समाज सुधारना, इवेंट्स मैनेज करना और सिविल सर्विसेज/टीचिंग की तैयारी करना पसंद है तो NSS एकदम सही ऑप्शन है.
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