Ethanol Scam: मध्य प्रदेश में सब्सिडी वाले सरकारी चावल को एथनॉल प्लांट के बजाय प्राइवेट मिलों में डाइवर्ट करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। SIT इस बात की जांच कर रही है कि कैसे सरकार का ही चावल री-साइकिल होकर दोबारा सरकार को बेचा जा रहा था।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने शिकायत दर्ज कराई कि छिंदवाड़ा के एक एथनॉल यूनिट के लिए भेजा गया चावल का एक बड़ा कंसाइनमेंट कभी अपनी मंजिल पर पहुंचा ही नहीं।
बालाघाट की राइस मिल में मिला गायब ट्रक
जांच के दौरान पुलिस ने इस गायब खेप को बालाघाट के वारासिवनी में स्थित सांचेती राइस मिल के अंदर खड़ा पाया। नवीनगांव स्थित FCI डिपो से निकले तीन ट्रकों में से एक को 242 क्विंटल चावल के साथ रंगे हाथों इंटरसेप्ट किया गया, जबकि बाकी दो ट्रकों की तलाश जारी है।
हम इस पूरे नेक्सस की जड़ तक जाएंगे। सरकारी एथनॉल खरीद नीति का फायदा उठाकर जिस तरह से इस घोटाले को अंजाम दिया जा रहा था, उसमें शामिल हर चेहरे को बेनकाब किया जाएगा।
ललित शाक्यवार, आईजी, बालाघाट रेंज
6 गुना कीमत पर सरकार को ही चपत
SIT की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। सब्सिडी वाले चावल को पहले प्राइवेट मिलों में डाइवर्ट किया जाता है, फिर उसे नए सिरे से कस्टम मिलिंग साइकिल में डालकर दोबारा सरकारी एजेंसियों को ही बेच दिया जाता है। इस री-साइकलिंग की वजह से सरकार अनजाने में एक ही चावल के लिए 4 से 6 गुना अधिक कीमत चुका रही थी।
दर्ज हुई FIR, 4 लोग गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में एवीजे एग्रिको प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि राहुल प्रताप, ट्रक ड्राइवर दुर्गेश शेंडे और राइस मिल मालिक सौरभ सांचेती समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह तो सिर्फ ‘टिप ऑफ द आइसबर्ग’ है और इसमें कई बड़े ट्रांसपोर्टर्स और कंपनियां शामिल हैं।
शुद्ध पेट्रोल की मांग खारिज, E20 ही रहेगा विकल्प
इसी बीच केंद्र सरकार ने देश में शुद्ध पेट्रोल या कम एथनॉल ब्लेंडिंग वाले ईंधन (E10) को दोबारा विकल्प के रूप में देने से साफ इनकार कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि समानांतर सप्लाई चेन चलाने से लॉजिस्टिक्स की लागत बहुत बढ़ जाएगी, इसलिए E20 ही भविष्य है।
