करूर हादसे के पीड़ितों को नौकरी के नियुक्ति पत्र देंगे CM विजय, मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला – madras high court permits temporary jobs for karur stampede victims kins ntc ksrj


तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में सरकार को बड़ी कानूनी राहत मिली है. मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 2025 के करूर रैली भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को नौकरी के नियुक्ति पत्र जारी करने की अनुमति दे दी है. 

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये नियुक्तियां अस्थायी (टेम्पररी) होंगी और मामले में आगे आने वाले न्यायिक आदेशों के अधीन रहेंगी. यह पूरा मामला मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय की पार्टी टीवीके (TVK) की एक चुनावी रैली के दौरान हुई दुखद घटना से जुड़ा है, जिस पर अब राज्य में जमकर सियासत हो रही है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले 32 पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपने वाले हैं. सरकार का कहना है कि यह कदम प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है.

इसी बीच, हादसे में अपने डेढ़ वर्षीय बेटे ध्रुवन को खोने वाले विमल ने सरकार के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा, “मेरे डेढ़ साल के बेटे ध्रुवन की मौत हो गई थी. पिछली बार मैं चेन्नई विजय सर से मिलने गया था. अब फिर बुलाया गया है. मुझे भरोसा दिलाया गया है कि सरकार नौकरी देगी. हमने तालुक कार्यालय में सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं. मुझे लगता है कि यह सही और सकारात्मक फैसला है.”

वाम दल ने उठाए सवाल

दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के तमिलनाडु राज्य समिति सचिव पी. षणमुगम ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत के मामले की जांच अभी जारी है. ऐसे समय सरकारी नौकरियों की घोषणा से जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है और मामले की गंभीरता कम हो सकती है.

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षणमुगम ने कहा, ‘करूर की उस दुखद भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी. चूंकि यह हादसा टीवीके (TVK) के अभियान/रैली के दौरान हुआ था, इसलिए यह एक जायज सवाल उठता है कि क्या टीवीके सरकार इन नौकरियों को देने के लिए अपनी सरकारी शक्तियों और सत्ता का दुरुपयोग कर रही है? सबसे बड़ी बात यह है कि इस हादसे की जांच अभी चल रही है, ऐसे में सरकारी नौकरी देने जैसी घोषणाएं मामले की निष्पक्ष जांच और उसकी दिशा को कमजोर कर सकती हैं.’

सीपीएम नेता ने आगे कहा कि अगर कोई राजनीतिक दल अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहता है, तो वह पीड़ितों को निजी कंपनियों (Private Companies) में नौकरी दिलवाए, वह एक अलग बात है. लेकिन सरकारी खजाने और पदों से नौकरियां देना बिल्कुल अलग बात है.  

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