शनिवार को पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबियों के बीच हुई एक बैठक के बाद यह अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई।
कांग्रेस पार्टी पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए जिस ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रही थी, अब वही शब्द उसके अपने ही घर में कलह का कारण बन गया है। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक छह महीने पहले कांग्रेस की प्रदेश इकाई में नेतृत्व को लेकर एक बड़ी जंग छिड़ गई है।
शनिवार को पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबियों के बीच हुई एक बैठक के बाद यह अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई।
चन्नी कैंप का वार: ‘हमें समझौतावादी नेता नहीं चाहिए’
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शनिवार को चंडीगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुट के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर परोक्ष रूप से निशाना साधा।
चन्नी की मौजूदगी में रंधावा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस को “एक ऐसा नेता चाहिए जो पूरी ताकत से आवाज बुलंद कर सके, न कि कोई कॉम्प्रोमाइज्ड नेता।”
गौरतलब है कि 63 साल चन्नी (जो वर्तमान में जालंधर से सांसद हैं) को 2022 के चुनाव से ठीक पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री बनाया था। हालांकि, चन्नी के नेतृत्व में कांग्रेस वह चुनाव आम आदमी पार्टी (AAP) से करारी हार गई थी, लेकिन पार्टी के भीतर उनका रसूख अब भी बरकरार है।
राजा वड़िंग का पलटवार: “पार्टी में स्लीपर सेल बर्दाश्त नहीं”
इस तंज के कुछ ही घंटों बाद पंजाब कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (48 वर्ष) ने तीखा पलटवार किया।
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंद सिंह राजा वड़िंग, “कौन कॉम्प्रोमाइज्ड है? क्या उन्होंने मेरा नाम लिया? अगर नहीं, तो आप लोग (मीडिया) इसे मेरी तरफ क्यों मोड़ रहे हैं?… हमें अपनी पार्टी में किसी भी तरह का स्लीपर सेल या कॉम्प्रोमाइज्ड नेता नहीं चाहिए।”
वड़िंग ने आगे तंज कसते हुए उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो कथित तौर पर “भाजपा के लोगों, यूपी के नेताओं और आप (AAP) के नेताओं से गुपचुप मुलाकातें” कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि वे और रंधावा जल्द ही अपने मतभेद सुलझा लेंगे।
प्रभारी भूपेश बघेल का रुख: “यह कोई गुड्डा-गुड़िया का खेल नहीं”
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ शब्द से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हाँ, मैं सहमत हूँ कि कोई भी नेता जो कॉम्प्रोमाइज्ड है, वह काम नहीं करेगा। अगर कोई नेता भाजपा के आगे घुटने टेकता है, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं ऐसा न होने दूँ।”
हालांकि, बघेल ने साफ कर दिया कि आलाकमान ने जो फैसले लिए हैं, वे बदले नहीं जाएंगे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि नेतृत्व का फैसला कोई “गुड्डा-गुड्डी का खेल” नहीं है जो बार-बार बदला जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2027 के चुनाव के लिए चन्नी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
विवाद की असल जड़ क्या है?
पंजाब कांग्रेस में चल रही इस खींचतान की मुख्य वजह 1 जुलाई को आलाकमान की ओर से लिया गया एक फैसला है।
आलाकमान ने राजा वड़िंग को पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया, क्योंकि उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब की 13 में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी (चुनाव प्रचार समिति) का चेयरमैन नियुक्त किया गया। चन्नी कैंप इस फैसले से नाखुश था, यही वजह थी कि चन्नी ने पिछले एक हफ्ते से बघेल के साथ होने वाली कई संगठनात्मक बैठकों से दूरी बना रखी थी।
शनिवार को कांग्रेस नेता राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई 80 मिनट की यह बैठक इसी नाराजगी को दूर करने की एक कोशिश थी, जिसमें नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने एक शांत संरक्षक की भूमिका निभाते हुए कहा कि बघेल कार्यकर्ताओं की हर भावना को आलाकमान तक शब्द-ब-शब्द पहुंचाएंगे।
कहां से आया ये शब्द?
कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व (मुख्य रूप से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे) ने पिछले कई महीनों से पीएम मोदी को घेरने के लिए इस शब्द को अपना मुख्य हथियार बनाया हुआ है। मई 2026 से ही राहुल गांधी अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स में पीएम मोदी को कॉर्पोरेट घरानों के सामने ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ बताते रहे हैं। जून में पार्टी के आधिकारिक विज्ञापनों में भी इस शब्द का जमकर इस्तेमाल किया गया। लेकिन अब पंजाब के नेताओं ने इसी तीखे शब्द का रुख अपनी ही पार्टी के आंतरिक प्रतिद्वंद्वियों की तरफ मोड़ दिया है, जिसने 2027 के चुनावों से पहले कांग्रेस आलाकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं।