कोई 16 घंटे पढ़ा… किसी ने BSNL की नौकरी छोड़ी, भावुक कर देगी 70वीं BPSC के सफल अभ्यर्थियों की कहानी – success stories struggle of 10 candidates who cleared 70th bpsc exam


70th BPSC Candidate Success Story: बिहार लोक सेवा आयोग के सफल उम्मीदवारों की कहानी प्रेरणा देने वाली है। कुछ कैंडिडेट्स की कहानी संघर्षों से भरी हुई है। कुछ की कहानी में भावुक कर देने वाली घटनाएं भी हैं। पटना में नियुक्ति पत्र लेने आए कैंडिडेट्स काफी खुश थे। इस मौके पर उन्होंने अपनी सफलता की कहानी शेयर की।

70th BPSC Candidate Appointment Letter
बीपीएससी के सफल अभ्यर्थियों की कहानी(फोटोनवभारतटाइम्स.कॉम)
पटना: बिहार की राजधानी पटना के बापू सभागार में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह कई युवाओं के लिए यादगार दिन बन गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा में सफल 2,027 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ-साथ एसडीएम, डीएसपी, रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर और विभिन्न विभागों में चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं।

नियुक्ति पत्र मिलते ही खुश दिखे कैंडिडेट्स

नियुक्ति पत्र मिलने के बाद सफल अभ्यर्थियों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। किसी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता की मेहनत और परिवार के सहयोग को दिया तो किसी ने लंबे संघर्ष, धैर्य और लगातार पढ़ाई को सफलता की वजह बताया। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद मिला नियुक्ति पत्र उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक है।

मध्य प्रदेश के किसान का बेटा चयनित

रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर चयनित आदित्य जैन के लिए यह सफलता बेहद खास है। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले आदित्य ने बताया कि वह किसान परिवार से हैं और अपने गांव से सरकारी नौकरी में इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं। वह बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। ऐसे परिवार से निकलकर इस पद तक पहुंचना गर्व और खुशी का विषय है।

आदित्य जैन की सफलता की कहानी

उनकी सफलता में उनके माता-पिता, भाई, बहनों और पूरे परिवार का बड़ा योगदान रहा है। बड़े भाई ने हमेशा हौसला बढ़ाया और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने परिवार के समर्थन को सफलता का आधार बताया।
आदित्य जैन की मां राजमणि जैन भी बेटे की सफलता से बेहद भावुक और खुश नजर आईं। उन्होंने बताया कि बेटे ने सफलता हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की। आदित्य पढ़ाई में इस कदर डूबा रहता था कि उसे खाना-पीना तक याद नहीं रहता था। उसे कई बार फोन करके कहना पड़ता था कि बेटा खाना खा लो। बेटे को इस मुकाम पर देखकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है।

आदित्य के पिता ने जताई खुशी

आदित्य के पिता अशोक जैन ने कहा कि बेटे की सफलता से उन्हें बहुत खुशी है। उन्होंने बताया कि आदित्य ने 12वीं कक्षा से ही पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया और तभी से लगातार संघर्ष करता रहा। वह खुद छोटे किसान हैं, लेकिन उनके बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया। आदित्य कई बार 16-16 घंटे तक पढ़ाई करता था। बेटे के संघर्ष का आज परिणाम सामने आया है।

शशांक गौरव ने जाहिर की अपनी खुशी

सफल अभ्यर्थी शशांक गौरव ने नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और यादगार पल बताया। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना बेहद खुशी की बात है। शशांक ने अपनी सफलता में परिवार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने अपने पिता सुभाष ओझा को प्रेरणा स्रोत बताया। साथ ही बड़े भाई शशांक सौरभ और छोटे भाई शशांक अभिनव के सहयोग को भी अपनी सफलता के लिए अहम बताया। परिवार के ये सदस्य उनके जीवन के मजबूत स्तंभ रहे हैं और उनके सहयोग के कारण ही वह इस मुकाम तक पहुंच सके।

जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण- मनीषा पटेल

मनीषा पटेल ने नियुक्ति पत्र मिलने पर कहा कि यह उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना बेहद खुशी और गर्व का विषय है। यह सफलता वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने इस सुनहरे पल के लिए भगवान का भी आभार जताया। उनके अनुसार, लंबे समय तक मेहनत करने के बाद जब सफलता सामने आती है तो उसकी खुशी अलग ही होती है।

नागमणि कुमार का भी हुआ चयन

नागमणि कुमार का चयन बिहार प्रशासनिक सेवा में हुआ है। उन्होंने बताया कि यह उनका बीपीएससी का चौथा प्रयास और चौथा साक्षात्कार था। वह पिछले करीब 12 वर्षों से बीएसएनएल में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। लंबे समय तक नौकरी करने के बाद उन्होंने बीपीएससी में लगातार प्रयास जारी रखा और आखिरकार 70वीं बीपीएससी में बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए उनका चयन हो गया। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उन्होंने खुशी जताई और इसे अपने लिए बेहद गौरवपूर्ण क्षण बताया।

कविता कुमारी ने दिया माता पिता को श्रेय

कविता कुमारी का चयन भी बिहार प्रशासनिक सेवा में हुआ है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करना उनके लिए बेहद खुशी का अवसर है। उन्होंने बिहार सरकार में युवाओं को मिल रहे अवसर को बड़ी उपलब्धि बताया। कविता ने बताया कि उन्होंने डेंटिस्ट्री की पढ़ाई की है, लेकिन उनका लक्ष्य सरकारी सेवा और सिविल सर्विस में जाना था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बीपीएससी की तैयारी शुरू की। उन्होंने यह भी कहा कि 69वीं बीपीएससी में उन्होंने मुख्य परीक्षा भी दी थी, लेकिन वह मेंस में सफल नहीं हो पाई थीं।

अमरदीप ने बताया- संघर्ष का परिणाम है सफलता

अमरदीप कुमार ने कहा कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक मेहनत करता है और उसके बाद सफलता मिलती है तो उसका अनुभव बेहद खास होता है। प्रतियोगी परीक्षा का संघर्ष लंबा हो सकता है, अभ्यर्थियों को धैर्य बनाए रखना जरूरी है। पद ग्रहण करने के बाद उनकी प्राथमिकता अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करना है। लोगों की समस्याओं को सुनना और अधिकार क्षेत्र में उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करना उनकी जिम्मेदारी होगी।

मैं भाग्यशाली महसूस कर रही हूं- भाव्या कृति

भाव्या कृति ने नियुक्ति पत्र मिलने पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि वह खुद को बेहद आभारी और भाग्यशाली महसूस कर रही हैं। एक अभ्यर्थी से अधिकारी बनने का सफर लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है। इस सफर में सिर्फ बौद्धिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की भी जरूरत होती है। कई बार अभ्यर्थियों को कठिन परिस्थितियों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन लगातार प्रयास और धैर्य से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। भाव्या ने अपने माता-पिता, भगवान और सरकार का आभार जताते हुए कहा कि एक साथ करीब 2 हजार से अधिक लोगों को नियुक्ति मिलना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि वह इस अवसर को लेकर बेहद कृतज्ञ हैं।

आशुतोष कुमार पांडेय

लेखक के बारे मेंआशुतोष कुमार पांडेयआशुतोष कुमार पांडेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिसिंपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। वे सितंबर- 2022 में टाइम्स ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। फिलवक्त आशुतोष NBT बिहार- झारखंड डिजिटल में डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इवनिंग शिफ्ट इंचार्ज भी हैं। क्षेत्रीय खबरों की प्लानिंग, सटीक संपादन, खबरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के अलावा फील्ड के साथियों से समन्वय स्थापित करने का काम करते हैं। आशुतोष राजनीति, क्राइम, ऑफ बीट स्टोरी, मानवीय संवेदना से जुड़ी खबरों और रेट्रो स्टोरी पर मजबूत पकड़ रखते हैं। 22 वर्षों के अपने पत्रकारीय करियर में 14वीं लोकसभा 2014 से लेकर 17वीं लोकसभा 2019, 13वीं बिहार विधानसभा 2005 से लेकर 18वीं बिहार विधानसभा चुनाव 2025 तक को डेस्क के साथ ग्राउंड पर जाकर कवर किया। इन 22 वर्षों के कार्यकाल में आशुतोष ने कई सियासी अनसुनी कहानियों को कुरेदा। सियासी किस्सों को चुटीले अंदाज में पेश किया। डिजिटल में ‘अतीत के पन्नों से’ एक सीरीज चलाई। कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद यादव, जयप्रकाश नारायण सहित बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों की अनसुनी कहानी लिखी। रेड लाइट एरिया पर विशेष रिपोर्ट का प्रकाशन।

आशुतोष ने इन 22 वर्षों में 12 वर्ष ग्राउंड रिपोर्टिंग को दिए। उनकी भारत- नेपाल सीमा पर ट्रेन से होने वाली तस्करी की एक्सक्लूसिव रिपोर्टिंग को ईटीवी ग्रुप के चेयरमैन रामोजी राव ने सराहा और प्रशस्ति पत्र से नवाजा। आशुतोष ने प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया के तीनो फॉर्म में काम किया है। नेटवर्क 18 में बुलेटिन प्रोड्यूसर के तौर पर कार्य करते हुए आधे- आधे घंटे के कई चर्चित कार्यक्रम बनाए। जिसमें ‘चलो चलें अमरनाथ’ आज भी लोग पसंद करते हैं। आशुतोष ने लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों का एकांतिक प्रोफाइल इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए बनाया। जिसे नेटवर्क में काफी सराहा गया। आशुतोष खबरों के पीछे की कहानी को पकड़ने में माहिर हैं। उन्होंने छोटी से छोटी खबर को उसे न्यूज वैल्यू तक पहुंचाया। वे भारतीय राजनीति के मझे हुए खिलाड़ियों की कहानियों को किताबों से खोजकर निकालने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने लालू प्रसाद यादव, कर्पूरी ठाकुर सहित कई नेताओं की जीवनी से अनसुनी कहानी खोजी और उसे रेट्रो स्टोरी का रूप दिया।

अनुभव-
डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रानिक पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय। 2001 में इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी दैनिक जनसत्ता के कोलकाता संस्करण में असाइमेंट बेस्ड फीचर राइटर से शुरुआत। बाद के दिनों में हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और आदर्शन समाचार पत्रिका में स्वतंत्र लेखन। 2003 में ईटीवी नेटवर्क में संवाददाता के तौर पर योगदान। 2009 में मौर्य टीवी में कार्य। उसके बाद हिंद्स्तान दैनिक मुजफ्फरपुर संस्करण में लोकल पेज इंचार्ज, फोकस टीवी, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली और प्रभात खबर डिजिटल, नेटवर्क 18 में काम करने का सौभाग्य मिल चुका है। बांग्ला थियेटर ‘अल्काप’ के आठ प्रोडक्शन में कार्य करने का अनुभव।

अवार्ड और पुरस्कार
2005 से 2009 के बीच 12 बेस्ट स्टोरी ऑफ द डे का पुरस्कार
मौर्य टीवी पटना में ऑफ बीट स्टोरी इंचार्ज के तौर पर सम्मान
LIB बिहार चैप्टर की ओर से प्रेरणास्रोत सम्मान
2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की ओर से ‘स्टोरी ऑफ द मंथ’ का पुरस्कार

साक्षात्कार-
आशुतोष ने अपने पत्रकारिता करियर में अब तक प्रमोद महाजन, अमर सिंह, जया प्रदा, राजनाथ सिंह, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, मालिनी अवस्थी, कुनिका सदानंद, रवि किशन, मनोज तिवारी मृदुल और भरत शर्मा के अलावा गीतकार गुलजार, अभिनेता पीयूष मिश्रा, सौरभ शुक्ला, सतीश कौशिक सहित वरिष्ठ पत्रकार और पेड न्यूज के खिलाफ अभियान चलाने वाले पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर प्रभाष जोशी का इंटरव्यू कर चुके हैं।

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