राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat File Photo)
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने उप निरीक्षक, प्लाटून कमांडर संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2025 में शारीरिक दक्षता टेस्ट में असफल अभ्यर्थियों के मामले में आरपीएससी एवं भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अफसरों से जवाब मांगा है. कोर्ट ने आरपीएससी को असफल अभ्यर्थियों के टेस्ट के दिन की वीडियोग्राफी पेश करने को कहा है. इस मामले की सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी. उधर, हाईकोर्ट की अन्य पीठ ने प्रदेश की सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन और उनमें मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से जुड़े मामले में राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई. वहीं, हाईकोर्ट ने अन्य मामले में जयपुर के जवाहर नगर के सेक्टर 4 स्थित महावीर उद्यान से 31 दिसंबर तक अतिक्रमण को हटाने को कहा.
एसआई भर्ती परीक्षा 2025 से जुड़े मामले में जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने योगिता कुमारी व अन्य की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए आरपीएससी से फिजिकल टेस्ट के दिन की वीडियोग्राफी मांगी है.याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने बताया कि याचिकाकर्ता का सीआरपीएफ सेंटर, अजमेर में शारीरिक दक्षता टेस्ट हुआ था. इस दौरान लगातार बारिश के कारण मैदान व रनिंग ट्रैक खराब हो गया था. वहां पानी भरने से फिसलन बढ़ गई थी. फिसलन में दौड़ और कूद के दौरान अभ्यर्थी को परेशानी हुई और चोट भी लगी. याचिकाकर्ताओं ने इस संबंध में भर्ती एजेंसी को प्रतिवेदन भी दिया, लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया गया, इसलिए उसे शारीरिक दक्षता टेस्ट देने काए एक और मौका दिया जाए. इस पर अदालत ने राज्य सरकार व आरपीएससी से जवाब एवं उस दिन की वीडियोग्राफी मांगी.
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जर्जर भवनों में स्कूल क्यों: इस बीच, जस्टिस महेन्द्र गोयल व जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने प्रदेश की सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन और उनमें मूलभूत सुविधाएं नहीं होने पर नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि अफसरों को बदलने या निलंबित करने से कुछ नहीं बदलेगा. जो व्यक्ति इनके भले का काम करने को प्रेरित नहीं है, वह काम नहीं करेगा. साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को चेताया कि यदि अदालती आदेश की पालना नहीं हुई तो डीओआईटी सचिव व वित्त सचिव को बुलाकर पूछेंगे. अदालत ने कहा कि इन अफसरों से सीधे फंड आवंटन, मॉनिटरिंग और क्वालिटी कंट्रोल के बारे में बात करनी चाहिए. खंडपीठ ने यह टिप्पणी जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों के स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले सहित अन्य जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए.
10 सितंबर तक मांगा हलफनामा: राज्य सरकार की ओर से कहा महाधिवक्ता ने कहा, यदि आगामी सुनवाई पर राज्य सरकार के जवाब से अदालत संतुष्ठ नहीं हो तो अफसरों को कोर्ट अफसरों को बुला सकती है. इसके लिए सरकार ने अदालती निर्देशों की पालना के लिए समय मांगा. खंडपीठ ने राज्य सरकार को समय देते हुए कहा, 10 सितंबर तक एसीएस एजुकेशन अपना शपथ पत्र और उच्च शिक्षा, तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा विभागों से जरूरी डेटा अदालत में पेश करें.
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900 स्कूलों में क्लासरूम जर्जर: अदालत ने कहा, राज्य सरकार से जिस मुद्दे पर शपथ पत्र मांगा जाता है, सरकार उसके जवाब के बजाय कुछ और ही पेश कर देती है. अदालत ने एजी से कहा कि स्कूल भवनों को लेकर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें जर्जर स्कूलों की संख्या बताई है. इनमें 1150 में से करीब 900 स्कूलों में क्लासरूम जर्जर हैं. क्या यह स्थिति सही है. इस पर महाधिवक्ता बोले, अदालत के निर्देश पर कमेटियां बनाई हैं. कुछ अन्य कमेटी बननी है.
इस पर अदालत ने कहा, आपको एक कमेटी बनानी चाहिए और किसी ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना चाहिए, जो यह काम कर सके. इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा. फंड की योजना बनाएं और यह भी बताएं कि उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा. अगले 5 साल में उनका उपयोग कैसे होगा. हमें भविष्य की तैयारी भी करनी होगी, लेकिन अभी तो मौजूदा समस्याओं का ही समाधान नहीं कर पा रहे हैं. स्कूलों के लिए फंड इकट्ठा करने के संबंध में अदालत ने कहा, छोटे गांवों में भी दानदाता होते हैं, लेकिन यदि वे पैसा लगाते हैं तो वे पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं. वे चाहते हैं कि फंड का इस्तेमाल उसी मकसद के लिए हो, जिसके लिए मंजूरी दी गई है.
आनंदी पोद्दार स्कूल पर पूछा सवाल: अदालत ने महाधिवक्ता से पूछा, जयपुर के आनंदी पोद्दार स्कूल मामले में आपका क्या कहना है. इस पर एजी बोले, वहां मुख्य समस्या हॉस्टल मेस के खाने और टॉयलेट को लेकर थी. इस पर कार्रवाई की जा चुकी है. प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया है. इस पर अदालत ने कहा, प्रिंसिपल बदलने या सस्पेंड करने से कुछ नहीं बदलेगा. लड़कियों के लिए भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं.
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महावीर उद्यान से 31 दिसंबर तक हटाए अतिक्रमण: जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने राजेश मधोक की जनहित याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने जवाहर नगर के सेक्टर 4 स्थित महावीर उद्यान से 31 दिसंबर तक अतिक्रमण को हटाने को कहा. अदालत ने आवासन मंडल और नगर निगम के आदर्श नगर जोन उपायुक्त से तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी है. इस मामले में पक्षकार बनाए गए श्री जैन श्वेतांबर संघ सेक्टर-4 ने कहा, पार्क में दीवार वाले ढांचे को 31 दिसंबर तक हटा देंगे. इस पर खंडपीठ ने संघ को अवैध निर्माण हटाने का समय देते हुए हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर व नगर निगम जोन उपायुक्त को कहा कि यदि तय तारीख तक संघ अवैध निर्माण नहीं हटाए तो वे हटाकर पार्क को मूल स्वरूप में वापस लाए.
यह था मामला: जनहित याचिका में कहा गया कि जवाहर नगर में सार्वजनिक पार्क की जमीन पर अवैध कब्जा व निर्माण कर लिया है, जिसे हटाया जाए. नगर निगम ने रिपोर्ट पेश कर बताया कि पार्क का क्षेत्रफल 4,575 वर्ग मीटर है, लेकिन मौके पर केवल 3,288.65 वर्ग मीटर है. वहां 222.11 वर्ग मीटर क्षेत्र में पक्का आरसीसी निर्माण और नेट और टिन-शेड वाला अस्थायी ढांचा है. बिना छत वाला दीवारों से घिरा ढांचा है, जो 624.07 वर्ग मीटर का है. दूसरी ओर संघ ने कहा कि यह निर्माण आवासन मंडल के साथ पार्क के रख-रखाव के संबंध में किए समझौते से किया था.
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