ढाका में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी पूजा झा ने तुरंत विरोध दर्ज कराते हुए भारत का पक्ष मजबूती से रखा। दिल्ली के साधारण परिवार से निकलकर पहले ही प्रयास में UPSC पास करने वाली पूजा झा आज लाखों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

ढाका में गलत नक्शा देखते ही जताई आपत्ति
बांग्लादेश में विदेश नीति से जुड़े एक सेमिनार के दौरान दिखाए गए नक्शे में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया था। कार्यक्रम में मौजूद ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की द्वितीय सचिव (सेकंड सेक्रेटरी) पूजा झा ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आयोजकों से कहा कि यह नक्शा तथ्यात्मक रूप से गलत है और भारत की संप्रभुता के खिलाफ है।
2022 बैच की IFS अधिकारी हैं पूजा झा
पूजा कुमारी झा वर्ष 2022 बैच की इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) अधिकारी हैं। वर्तमान में वह बांग्लादेश के ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग में सेकंड सेक्रेटरी (पॉलिटिकल एवं इन्फॉर्मेशन) के रूप में तैनात हैं। उन्होंने वर्ष 2021 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास की और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 82 हासिल कर देशभर में पहचान बनाई।
साधारण परिवार से निकलकर बनाया बड़ा मुकाम
वह मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुरनहिया गांव की रहने वाली हैं। पूजा झा का परिवार दिल्ली में रहता है। उनके पिता पिछले करीब 40 वर्षों से गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में ऑफिस हेल्पर के रूप में काम करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी और पूजा ने अपनी मेहनत के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की।
पांचवीं बेटी होने की वजह से झेलीं सामाजिक चुनौतियां
पूजा अपने परिवार की पांचवीं बेटी हैं और उनका एक छोटा भाई भी है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि जिस समाज से वह आती हैं, वहां बेटों को बेटियों से ज्यादा महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लड़कियों के प्रति इस सोच को बदलना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई और अपनी सफलता से समाज को जवाब दिया।
सरकारी स्कूल से UPSC तक का सफर
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पूजा और उनके भाई-बहनों को निजी स्कूल छोड़कर सरकारी और एमसीडी स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि हर अच्छी सफलता उन्हें आगे बढ़ने और कुछ बड़ा करने की प्रेरणा देती थी।
बहनों ने दिया हौसला, मेहनत ने दिलाई पहचान
पूजा ने बताया कि घर और समाज में मौजूद असमानता को उन्होंने बहुत करीब से देखा। इसी वजह से उनकी बहनों के बीच मजबूत रिश्ता बना और वे अक्सर इस विषय पर चर्चा करती थीं। यही अनुभव उनके भीतर बदलाव लाने की इच्छा और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने का संकल्प पैदा करता गया।
दुनिया के सामने बुलंद कर रही हैं भारत की आवाज
दिल्ली की गलियों से निकलकर भारतीय विदेश सेवा तक का सफर तय करने वाली पूजा झा आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रख रही हैं। ढाका में गलत नक्शे का तुरंत विरोध कर उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत की संप्रभुता और अखंडता से जुड़े किसी भी मुद्दे पर देश के अधिकारी पूरी दृढ़ता के साथ अपनी बात रखते हैं। उनका सफर आज लाखों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
