KPSC Chairman: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है. आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहुकार पर अपनी दोनों बेटियों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए पद के दुरुपयोग और OBC आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. मामला इतना गंभीर माना गया कि कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से जांच कराने की सिफारिश भी कर दी. आइए जानते हैं कि शिवशंकरप्पा एस. सहुकार कौन हैं, उनकी नियुक्ति कैसे हुई और पूरा विवाद आखिर है क्या?
who is KPSC Chairman Shivashankarappa S Sahukar कर्नाटक लोक सेवा आयोग KPSC के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहुकार चर्चा में हैं.
कौन हैं शिवशंकरप्पा एस. सहुकार?
शिवशंकरप्पा एस. सहुकार कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष रहे हैं. वह मूल रूप से कर्नाटक के रायचूर जिले के रहने वाले हैं और बाद में कलबुर्गी (गुलबर्गा)में रहने लगे. उन्होंने रायचूर के कृषि महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.दिलचस्प बात यह है कि वे IAS या IPS अधिकारी नहीं हैं. उनका चयन UPSC के जरिए नहीं हुआ था.KPSC के अध्यक्ष या सदस्य बनने के लिए UPSC पास करना जरूरी नहीं होता. संविधान के अनुच्छेद 316 के तहत राज्यपाल राज्य सरकार की सलाह पर लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करते हैं.
कब बने KPSC के सदस्य और अध्यक्ष?
शिवशंकरप्पा एस.सहुकार को 3 सितंबर 2019 को कर्नाटक लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था.इसके बाद पूर्व IAS अधिकारी शदाक्षरी स्वामी के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें 3 अप्रैल 2021 को KPSC का अध्यक्ष बनाया गया.उस समय कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला थे.इसके बाद से वह आयोग की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
आखिर क्या है पूरा विवाद?
पूरा विवाद KPSC द्वारा आयोजित इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर (Industrial Extension Officer)भर्ती से जुड़ा है.राज्यपाल सचिवालय के अनुसार आरोप है कि शिवशंकरप्पा एस. सहुकार की दोनों बेटियां इस भर्ती प्रक्रिया की उम्मीदवार थीं. इसके बावजूद उन्होंने आयोग के अध्यक्ष के रूप में स्वयं को इस भर्ती प्रक्रिया से अलग (Recuse) नहीं किया.आरोप यह भी है कि उन्होंने यह जानकारी आयोग के सामने सार्वजनिक नहीं की कि भर्ती प्रक्रिया में उनकी बेटियां भी उम्मीदवार हैं.ऐसे में हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति पैदा हुई और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए.
बेटियों की भर्ती को लेकर क्या आरोप हैं?
शिकायतों में कहा गया है कि सहुकार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपनी दोनों बेटियों के चयन में मदद की. आरोप है कि आयोग के अध्यक्ष होने के बावजूद उन्होंने भर्ती प्रक्रिया से दूरी नहीं बनाई और इस कारण पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे.इसी शिकायत के आधार पर राज्यपाल सचिवालय ने मामले की जांच शुरू की.
OBC आरक्षण को लेकर भी उठे सवाल
विवाद केवल भर्ती तक सीमित नहीं है.राज्यपाल सचिवालय के अनुसार सहुकार की एक बेटी ने परिवार की वार्षिक आय केवल 40 हजार रुपये दर्शाते हुए आय एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाया.इसी आधार पर उसने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)के तहत आरक्षण और क्रीमी लेयर से छूट का लाभ लिया.आरोप है कि आरक्षण का लाभ लेने के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया जिससे भर्ती प्रक्रिया में अनुचित लाभ मिला.
2002 के सरकारी आदेश का उल्लंघन
राज्यपाल सचिवालय ने अपनी जांच में यह भी कहा कि 30 मार्च 2002 को कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी किया था.इस आदेश के अनुसार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के बच्चों को राज्य के पिछड़ा वर्ग (Backward Classes) आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता.आरोप है कि इस नियम को छिपाया गया और आरक्षण का लाभ लेकर भर्ती प्रक्रिया में अनुचित फायदा हासिल किया गया.
जांच में क्या मिला?
राज्यपाल सचिवालय ने सहुकार की आय, संपत्ति के विवरण और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की.सचिवालय का कहना है कि शुरुआती जांच में ऐसे प्रथम दृष्टया (Prima Facie)सबूत मिले हैं जिनसे उनके खिलाफ दुराचार (Misbehaviour)के आरोप सही प्रतीत होते हैं.इसी आधार पर उनके खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई शुरू की गई.लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी कर्मचारियों जैसी नहीं होती.भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317(1)के अनुसार यदि किसी लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य पर दुराचार के आरोप लगते हैं तो राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट से जांच कराने का आदेश दे सकते हैं.इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट में जांच कराने की सिफारिश की है.
फिलहाल क्या कार्रवाई हुई है?
जांच पूरी होने तक शिवशंकरप्पा एस.सहुकार को KPSC अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया गया है. साथ ही आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि आयोग का कामकाज प्रभावित न हो और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके.राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि यह कदम भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.
क्या सहुकार ने आरोपों पर कोई जवाब दिया?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विभिन्न समाचार संस्थानों ने शिवशंकरप्पा एस.सहुकार से उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन समाचार प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया था.
क्यों चर्चा में है यह मामला?
यह मामला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कर्नाटक लोक सेवा आयोग के किसी मौजूदा अध्यक्ष या सदस्य के खिलाफ इस तरह की संवैधानिक कार्रवाई पहली बार हुई है.अब आगे की प्रक्रिया राष्ट्रपति के निर्णय और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली संभावित जांच पर निर्भर करेगी.यदि सुप्रीम कोर्ट जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके आधार पर आगे की संवैधानिक कार्रवाई की जा सकती है.इस पूरे मामले पर अब देशभर की नजर है क्योंकि यह केवल एक भर्ती विवाद नहीं, बल्कि लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है.