गांव के मैदान से नेशनल लेवल तक, रग्बी में ऐसे चैंपियन बना जहानाबाद का रोहित


शशांक शेखर/जहानाबाद: बिहार के जहानाबाद का युवा न सिर्फ शिक्षा में परचम लहरा है, बल्कि खेल की दुनिया में भी जिले का नाम रोशन कर रहा है. हर तरह के खेल में जिले के होनहार बच्चे आगे आ रहे हैं और अच्छा प्रदर्शन के बलबूते अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं. रोहित कुमार भी उन्हीं बच्चों में से एक है, जो राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम गर्व से ऊंचा किया है. रोहित का घर जिला मुख्यालय से 13 किमी दूर है. हालांकि, राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट में शामिल होकर राज्य का नाम रोशन किया है.

दरअसल, हैदराबाद में रग्बी फुटबॉल राष्ट्रीय प्रतियोगिता चल रही थी. इस प्रतियोगिता में 27 टीमों ने हिस्सा लिया. हालांकि, बिहार के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बल पर टीम फाइनल तक पहुंची और महाराष्ट्र की टीम को हराकर ट्रॉफी पर कब्जा किया. बिहार से चयनित 12 सदस्यीय टीम में रोहित भी शामिल रहे. साथ ही फाइनल तक टीम का हिस्सा रहे. जिन 7 सदस्यीय खिलाड़ियों ने फाइनल में टीम को ट्रॉफी पर कब्जा दिलाया, उसमें रोहित भी शामिल थे.

रोहित का रग्बी में कैसे हुआ पदार्पण
रोहित कुमार 16 साल का युवा खिलाड़ी है. वो शकूराबाद बाजार के रहने वाला है. उसका अंडर 18 राष्ट्रीय रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बल पर चयन हुआ. उन्होंने 4 साल पहले खेल की दुनिया में कदम रखा था. शुरुआत में रोहित का दिल कबड्डी में लगता था. हालांकि, बहुत ज्यादा पता नहीं था कि हम नेशनल तक कोई खेल, खेल सकते हैं. इसी बीच जिस ग्राउंड पर रोहित कबड्डी खेला करते वहां अन्य बच्चों को एक कोच प्रैक्टिस करवाते. इस दरम्यान रोहित से कोच की मुलाकात हुई. कोच ने रोहित को सलाह दी कि तुम्हारा सब कुछ सही है और ऊर्जा भी है तो क्यों न, रग्बी खेलो.

16 साल के रोहित की ऐसे हुई खेल में एंट्री
इसी शब्द ने रोहित का पूरा का पूरा सफर मोड़ दिया. रग्बी में हाथ आजमाना शुरू कर दिया. सुबह और शाम ग्राउंड में पसीना बहाना शुरू कर दिया. 2 साल बाद रग्बी के लिए टेस्ट दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली. हालांकि, इस साल हैदराबाद वाले टूर्नामेंट के लिए कड़ी मेहनत के बाद टेस्ट दिया वो साफल हुए. इस तरह से अंडर 18 नेशनल रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट खेलने का मौका मिला और यहां से अलग शुरुआत हुई. रोहित न केवल टीम का हिस्सा रहे, बल्कि टूर्नामेंट के सभी मैच भी खेले.

विज्ञापन

पगडंडियों से होकर नेशनल तक का सफर
रोहित कुमार के Local 18 से कहा, “शुरू से खेल के प्रति लगाव रहा है. यही कारण है कि 10 साल की उम्र से ही ग्राउंड पर जाकर पसीना बहा रहा था. खेल में अधिक रूचि होने के कारण पढ़ाई में समय कम दिया करता, जिसके चलते घर पर कभी कभी डांट भी सुनना पड़ता था, लेकिन हम अपनी प्रतिभा को लगातार निखारने में लगे हुए थे. जब बड़े भाई को मालूम चला तो बाद में सहयोग करने लगे. इसी बीच यह उपलब्धि मिली. जीत के बाद घर लौटे तो हर कोई तारीफ कर रहा था. अब परिवार भी सहयोग करने को आगे आ रहे हैं. हमारा अगला लक्ष्य इंटरनेशनल खेलना है.”

‘रोहित होनहार खिलाड़ी’
कोच विकास कुमार ने कहा, “रोहित एक होनहार खिलाड़ी है. यदि इस पर मेहनत किया जाए तो जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सकता है. हमलोग की पूरी कोशिश है कि रोहित को एक बड़ा प्लेटफॉर्म दिया जाए और उसे उसकी प्रतिभा को निखारा जाए.”



Leave a Comment