गैरसैंण के ऐतिहासिक खेल मैदान में हर तरफ पसरी गंदगी, दुर्गंध से खेलना तो दूर जाना भी हुआ मुश्किल


GAIRSAIN SPORTS GROUND

खेल मैदान का हाल (फोटो- ETV Bharat)

गैरसैंण: एक ओर जहां सरकार उत्तराखंड की नई खेल नीति तैयार कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर खिलाड़ी मैदानों की कमी व मैदानों की बदहाली से जूझ रहे हैं. सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का ऐतिहासिक इंटर कॉलेज मैदान अपनी दुर्दशा के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है,. मैदान में पसरी गंदगी ओर उससे उठने वाली दुर्गंध इसकी गवाही दे रही है. किसी दौर में इस मैदान ने ओलंपियन सुरेंद्र भंडारी जैसे खिलाड़ियों को स्कूली दिनों में चैंपियन बनते हुए देखा तो, वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से लेकर कई बड़े नेताओं के चुनावी सभाओं का गवाह भी रहा है.

ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं, सरकारी आयोजनों, किसान मेलों व राज्य स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट की चहल-पहल का भी मुख्य केंद्र बिंदु रहा यह मैदान अब सरकारी उपेक्षा के चलते अपने सबसे बुरे दिनों से गुजर रहा है. कभी नन्हे-मुन्ने बच्चों और खिलाड़ियों से गुलजार रहने वाले मैदान पर खेलना तो दूर, यहां बैठना तक दूभर हो गया है. मैदान व मंच पर पसरी गंदगी से निकलने वाली दुर्गंध के चलते शाम के वक्त यहां बैठने वाले नगरवासी भी अब इधर का रुख नहीं करते.

Gairsain Sports Ground Bad condition

सूरत-ए-हाल खेल मैदान (फोटो- ETV Bharat)

मैदान की दशा सुधारने के नाम पर हो चुकी बड़ी-बड़ी घोषणाएं: पिछले ढाई दशकों में मैदान की दशा सुधारने के नाम पर जहां बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुई. वहीं, करोड़ों रुपया खर्च करने के बावजूद इस मैदान की दशा बिगडती चली गई. मैदान सुधारीकरण के लिए पिछले 5 सालों में ही अब तक लगभग पौने तीन करोड़ रुपए अलग-अलग मद्दों से खर्च किया गया. साल 2020-21 में गैरसैंण विकास परिषद के अंतर्गत चेंजिंग रूम, मंच निर्माण और सुरक्षा दीवार बनाने के लिए निर्माणदाई संस्था लोक निर्माण विभाग ने 242 लाख से ज्यादा धनराशि खर्च की.

साल 2023-24 में नगर पंचायत गैरसैंण की ओर से दीवार और रेलिंग निर्माण पर ढाई लाख रुपए की धनराशि खर्च की गई. वर्तमान में नगर पंचायत गैरसैंण की ओर से 27 लाख की धनराशि से मैदान विस्तारीकरण, समतलीकरण, निकास नाली व सुरक्षा दीवार का कार्य गतिमान है. जबकि, बास्केटबॉल के लिए बनाए जाने वाले कंक्रीट के कोर्ट का काम फिलहाल युवाओं के आग्रह पर रोक कर मिट्टी का बनाए जाने पर विचार चल रहा है.

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खेल मैदान में आराम करती गाय (फोटो- ETV Bharat)

साल 2021 में बनाए गए चेंजिंग रूम व मंच रखरखाव के अभाव में दयनीय दशा में हैं. जहां बिजली के टूटे हुए तार, शौचालयों में पसरी गंदगी व खिड़कियों के टूटे हुए शीशे सरकारी कुप्रबंधन की भेंट चढ गए हैं, तो वहीं मंच और मैदान पर एक तरफ निराश्रित गोवंश ने अपना अड्डा बनाया हुआ है. वहीं, बे-रोकटोक मैदान पर आने वाले वाहनों फर कोई अंकुश न होने से मैदान की मिट्टी उखड़ जाती है.

कई बार मिनी स्टेडियम बनाने की हो चुकी घोषणा: उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पिछले ढाई दशक में ही करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद स्थानीय खिलाड़ियों को कोई खास लाभ नहीं मिल पाया है. गैर गांव के काश्तकारों की ओर से राजकीय इंटर कॉलेज को दान में दिए गए इस खेल मैदान को कई बार मिनी स्टेडियम बनाए जाने की घोषणा भी हुई, लेकिन कागजी अड़चनों के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई.

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गैरसैंण में क्रीड़ा स्थल पर खर्च हो चुके करोड़ों रुपए (फोटो- ETV Bharat)

दरअसल, मैदान इंटर कॉलेज गैरसैंण के नाम पर दर्ज होने के चलते अन्य संस्थाएं काम तो करती हैं, लेकिन रखरखाव की व्यवस्था न होने से हालात फिर वही रह जाते हैं. जिसको लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि खेल मैदान को खेल विभाग या नगर पंचायत जैसी संस्थाओं को हस्तांतरित किया जाना बेहद जरूरी है. जिससे खेल मैदान का बेहतर सुधारीकरण होने के साथ ही उचित रखरखाव भी हो सके. तभी इसका समुचित लाभ खिलाड़ियों के साथ ही तमाम सरकारी, सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक क्रियाकलापों के लिए हो सकेगा.

वर्तमान में 27 लाख रुपए की धनराशि से नगर पंचायत से मैदान विस्तारीकरण व सुधारीकरण का कार्य किया जा रहा है, लेकिन शासन स्तर से रखरखाव की उचित व्यवस्था न होने से मैदान बार-बार दुर्दशा का शिकार हो रहा है.”- मोहन भंडारी, अध्यक्ष, नगर पंचायत गैरसैंण

क्या बोले युवा? वहीं, खिलाड़ी युवाओं का कहना है कि खेल मैदान का कई बार सुधारीकरण किया गया है, लेकिन रखरखाव के अभाव में सही उपयोग नहीं हो पा रहा है. लिहाजा, खेल मैदान को खेल विभाग या नगर पंचायत जैसी संस्थाओं को हस्तांतरित कर उचित रखरखाव की व्यवस्था की जानी चाहिए. ताकि, खेल मैदान का लाभ खिलाड़ियों को मिल सके. वो अपनी प्रतिभा निखार सकें.

यदि क्षेत्रवासी खेल मैदान को खेल विभाग या नगर पंचायत को स्थानांतरित करने की मांग करते हैं, तो इस बात को शासन स्तर पर ले जाकर सुधार के बेहतर प्रयास किए जाएंगे.“- अनिल नौटियाल, कर्णप्रयाग विधायक

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