गोरखपुर के रामगढ़ ताल में हाल ही में हुई थी रोइंग प्रतियोगिता. (Photo Credit; ETV Bharat)
गोरखपुर : खेल संघों के पदों पर कब्जा जमाने के लिए बड़े-बड़े नेता और खिलाड़ी खूब दांव आजमाते हैं. बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन हालात यह है कि गोरखपुर से ऐसे खिलाड़ी नहीं निकल पा रहें हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर धमाल मचा सकें. गोरखपुर के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पा रहे हैं. ऐसे में खेल संघ सवालों के घेरे में हैं.
वरिष्ठ खिलाड़ी और कोच आवाज उठाने लगे हैं. कहा यह जा रहा है कि राजनीति के चक्कर में खिलाड़ियों के साथ राजनीति हो रही है. सुविधाओं के विस्तार पर भी खेल संघ की पहल मजबूत नहीं दिखती, जिससे कई खेलों में अभाव का संकट खिलाड़ी झेल रहे हैं. यहां कुश्ती को मजबूत खेल माना जाता है. कई पहलवानों ने अपनी मजबूत उपस्थिति जताई है. रोइंग प्रतियोगिता में यहां के खिलाड़ियों ने अपनी पहचान स्टेट लेवल पर बनाई है.
सवालों के घेरे में खेल संघ. (Video Credit; ETV Bharat)
अंतरराष्ट्रीय पहलवान और भारतीय कुश्ती टीम के कोच चंद्र विजय सिंह कहते हैं कि खेल संघों को अपनी भूमिका समझनी होगी तभी अच्छे खिलाड़ी स्टेडियम से जुड़ सकेंगे. कुश्ती के खिलाड़ी अपना जौहर दिखा रहे हैं. अभी हाल में दो खिलाड़ी एशियन गेम में थाईलैंड में गोल्ड और सिल्वर जीत कर आए हैं. वर्षों से पदों पर काबिज रहने में कोई गुरेज नहीं है, लेकिन उसका परिणाम अच्छा निकलता है तो खिलाफ में कोई आवाज नहीं उठती है.
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी राजेश सोनकर कहते हैं कि उनकी कोशिश है कि सभी खेल संघ में समन्वय स्थापित हो. इसके लिए वह बैठक कर खेल संघों में कमियों को दूर करते हुए खेल और खिलाड़ियों के विकास के प्लेटफार्म को तैयार करने की कोशिश करेंगे. जिले में वर्तमान में 18 खेल संघ पंजीकृत हैं. लेकिन कुछ ही संघ ऐसे हैं जिनके पास खिलाड़ियों के लिए नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था है. कई खेल संघ में खिलाड़ी खुद अपना उपकरण खरीदते हैं.
कई खेल संघ के पास न तो उपकरण हैं और न ही प्रशिक्षण केंद्र. यही नहीं कई खेल संघ में एंट्री फीस तो लाखों में वसूली जाती है, लेकिन वहां सुविधा नहीं मिलती. एथलेटिक्स, हॉकी, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, हैंडबॉल, ताइक्वांडो, बॉक्सिंग, शूटिंग, जूडो समेत अधिकांश खेलों का अभ्यास सरकारी स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉलेज, स्कूल कॉलेज के मैदान या निजी संस्थाओं के सहयोग से कराया जाता है.
गोरखपुर में क्रिकेट समेत कई खेल संघ प्रतियोगिताओं के आयोजन के दौरान टीमों से एंट्री फीस के नाम पर 15 से 30 हजार रुपये वसूलते हैं, लेकिन खिलाड़ियों का आरोप है कि उसके अनुरूप उन्हें सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती. इसको लेकर कई बार विवाद की स्थिति भी सामने आती है. बैडमिंटन के कोच दिग्विजय सिंह कहते हैं कि खेल संघ द्वारा प्रतियोगिता में पारदर्शिता और घोषित पुरस्कार समय पर दिए जाते तो खेल और खिलाड़ियों का विश्वास बना रहता.
तमाम खेलों में ऐसा नहीं हो रहा. कई खेल संघ में तो प्रशिक्षित कोच की जगह पूर्व खिलाड़ी या स्वयं पदाधिकारी ही प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभाते हैं. शूटिंग, ताइक्वांडो, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, क्रिकेट और अन्य खेलों में खिलाड़ी अपने उपकरण खुद खरीदते हैं.
कुश्ती संघ के जिला सचिव अंतरराष्ट्रीय पहलवान माया शंकर शुक्ल कहते हैं कि शहर से लेकर गांव तक के अखाड़े मैट के हो जाएं तो यहां लड़ने वाले पहलवान काफी आगे निकल जाएंगे. सरकार इस मामले में मदद करती है, कुछ जगह सुविधा हो रही है. कई संघ सदस्यता शुल्क, स्थानीय सहयोग और प्रायोजक और प्रतियोगिताओं के आयोजन से मिलने वाली आय से संघ को संचालित करते हैं.
गोरखपुर खेल संघ पदाधिकारियों में जिला क्रिकेट संघ के सचिव गजेन्द्र तिवारी, जिला हॉकी संघ के सचिव माइकल एलेक्जेण्डर, जिला बैंडमिन्टन संघ के संयुक्त सचिव संजय श्रीवास्तव, जिला फुटबाल संघ के सचिव मोहम्मद हमजा, जिला बास्केटबॉल संघ के सचिव मिथलेश शर्मा, जिला तैराकी संघ के सचिव अंजनी मिश्रा, जिला कबड्डी संघ के सचिव प्रभात पाण्डेय, जिला वॉलीबॉल संघ के सचिव बीएन मिश्रा, जिला एथलेटिक्स संघ के एनडी सोलंकी, जिला हैंडबॉल संघ के सचिव अरविन्द यादव, जिला जूडो संघ के सचिव कमलेश कुमार, जिला बॉक्सिंग संघ के सचिव हनुमान प्रसाद गुप्ता, जिला रोइंग संघ के सचिव राहुल राणा सिंह, जिला टेनिस क्रिकेट बाल संघ के सचिव इमरान अहमद लारी, जिला जिम्नास्टिक संघ के सचिव अकरम परवेज, जिला शतरंज संघ के सचिव जितेन्द्र सिंह, जिला खो-खो संघ के सचिव अमर सिंह शामिल हैं. इन संघों के सचिव ही एक्टिव हैं, जबकि अध्यक्ष किसी भी बात का जवाब नहीं देते.
गोरखपुर फुटबॉल संघ के सचिव हमजा खान कहते हैं, पिछले 5 वर्षों में बीसी राय जूनियर नेशनल फुटबॉल चैंपियनशिप के अलावा स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय फुटबाल चैंपियनशिप, संतोष ट्रॉफी जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं के लिए बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश की टीम में यहां के खिलाड़ियों का चयन हुआ है. वॉलीबॉल के खेल की बात करें तो जिले के खिलाड़ी आकांक्षा पांडेय ने चीन के शागलु में आयोजित अंडर-15 स्कूल विश्व वालीबॉल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और टीम को सातवां स्थान दिलाने में योगदान दिया. इसके अलावा कई और खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं.
अंजनी कुमार मिश्रा कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में करीब 100 खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय और 15 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है. जिले में क्रिकेट एसोसिएशन का हाल बुरा है. संगठन ने जिला क्रिकेट लीग और गोरखपुर प्रीमियर लीग का आयोजन कराया, लेकिन खिलाड़ियों के दीर्घकालिक विकास प्रशिक्षण और उच्च स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कोई विशेष पहल दिखाई नहीं दी.
खेल संघों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समान रूप से सक्रिय होकर यह लोग नियमित प्रतियोगिताएं, प्रशिक्षण, प्रतिभा संवर्धन की कोशिश करें तो गोरखपुर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल खिलाड़ियों की संख्या अच्छी खासी बढ़ सकती है. जैसे बैडमिंटन में आदित्या यादव मूकबधिर होने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोरखपुर का नाम रोशन की और राष्ट्रपति से पुरस्कार हासिल कर चुकी हैं.
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