चैरिटेबल ट्रस्टों के लिए राहत! फॉर्म 10B/10BB की डेडलाइन बढ़ी, जानें नई तारीख और फाइलिंग का सही तरीका
चैरिटेबल ट्रस्टों के लिए राहत की खबर है। सीबीडीटी (CBDT) ने ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की तय तारीख बढ़ा दी है। अब फॉर्म 10B या 10BB दाखिल करने की समय-सीमा 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं, जिन मामलों में ऑडिट होना है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की लास्ट डेट अब 21 नवंबर 2026 हो गई है। ऐसे में अंतिम समय का इंतजार न करें; एन वक्त पर पोर्टल पर ट्रैफिक बढ़ने से फाइलिंग में रुकावट आ सकती है।
सही फॉर्म का चुनाव करना बेहद जरूरी है। अगर छूट (exemption) से पहले आपकी कुल आय 5 करोड़ रुपये से अधिक है, आपको कोई विदेशी योगदान (foreign contribution) मिला है, या वित्त वर्ष के दौरान भारत से बाहर किसी आय का इस्तेमाल किया गया है, तो फॉर्म 10B भरें। अन्य सभी पात्र मामलों में फॉर्म 10BB का उपयोग करें। गलत फॉर्म भरने पर उसे अमान्य (non-furnishing) माना जाएगा, जिससे आपको टैक्स छूट मिलने में जोखिम हो सकता है।

फॉर्म 10B/10BB की डेडलाइन, चेकलिस्ट और ई-फाइलिंग का आसान तरीका
फाइलिंग से पहले यह क्विक चेकलिस्ट जरूर देख लें: आपका 12AB या सेक्शन 10(23C) अप्रूवल एक्टिव हो और 80G सर्टिफिकेट वैलिड हो, पैन और नाम का सही मिलान हो, पोर्टल पर अपने सीए (Chartered Accountant) को असाइन कर लें, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) या ओटीपी तैयार रखें, और ऑडिटर से यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) जेनरेट और वैलिडेट करवा लें। फाइलिंग का तरीका बेहद सरल है: पहले CA असाइन करें, इसके बाद CA पीडीएफ के साथ JSON फाइल अपलोड करेंगे, फिर टैक्सपेयर इसे स्वीकार कर ई-वेरिफाई करेंगे।
जरूरत के मुताबिक ऑडिटेड स्टेटमेंट्स, नोट्स, फंड के इस्तेमाल और कॉर्पस डिटेल्स जरूर अटैच करें। मिले और दिए गए दान, बैंक लेजर, ब्याज और कॉर्पस मूवमेंट का सही मिलान करें; साथ ही एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) से डेटा क्रॉस-चेक कर लें। वेरिफिकेशन एरर से बचने के लिए ITR-7 के फील्ड्स को ऑडिट शेड्यूल के साथ सही से मैप करें। अक्सर देर रात फाइलिंग के दौरान इनवैलिड UDIN, एक्सपायर हो चुके DSC या भारी पीडीएफ फाइलों की वजह से फाइलिंग फेल हो जाती है। ‘View Filed Forms’ सेक्शन में एक्नॉलेजमेंट ट्रैक करें और किसी भी कमी को तुरंत दुरुस्त करें।
ओल्ड वर्सेस न्यू टैक्स रिजीम: दानदाताओं के लिए सैलरी का गणित
टैक्स रिजीम का चुनाव नौकरीपेशा दानदाताओं की टैक्स प्लानिंग, मैचिंग और AIS एंट्री को प्रभावित करता है। नया टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है, जिसमें 75 हजार रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन और 12 लाख रुपये तक की आय पर रिबेट मिलती है। मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी 12 लाख 50 हजार रुपये है और आप पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत 50 हजार रुपये के दान पर क्लेम करते हैं; आइए नीचे दोनों व्यवस्थाओं के असर की तुलना करते हैं।
| विवरण | ओल्ड रिजीम | न्यू रिजीम |
|---|---|---|
| ग्रॉस सैलरी | ₹12,50,000 | ₹12,50,000 |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹50,000 | ₹75,000 |
| 80G डिडक्शन (₹50,000 का 50% माना गया) | ₹25,000 | उपलब्ध नहीं |
| टैक्सेबल इनकम | ₹11,75,000 | ₹11,75,000 |
| रिबेट से पहले टैक्स | ≈₹1,71,600 | ₹57,500 |
| रिबेट | शून्य | ₹57,500 |
| नेट टैक्स | ≈₹1,71,600 | ₹0 |
आखिरी दौर में पहुंचकर टैक्स छूट का मौका न गंवाएं। फाइल करने से पहले सही फॉर्म, UDIN वैलिडेशन और ई-वेरिफिकेशन सुनिश्चित करें और फाइलिंग का प्रूफ संभालकर रखें। अगर CBDT का कोई नया सर्कुलर जारी होता है, तो पोर्टल के लेटेस्ट-न्यूज़ बैनर पर अपडेटेड तारीखें जरूर देखें। किसी भी संशय की स्थिति में डेटा का तुरंत मिलान कर फिर से अपलोड करें; सही समय पर मिला एक्नॉलेजमेंट ही आपके 12AB और 80G के फायदों को सुरक्षित रखता है।