छोटा कद कमजोरी नहीं… 4 फीट 7 इंच के अभ्युदय को उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में मिला सम्मान, करेंगे सरकारी नौकरी


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Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के अभ्युदय शरण ने अपनी छोटी हाइट के कारण बचपन से ताने सुने पर अब उनका सालों-साल का संघर्ष, उपलब्धि में बदलता दिख रहा है. पारा एथलेटिक्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बिहार गवर्नमेंट ने उन्हें सरकारी नौकरी दी है. वे अब वैशाली समाहरणालय में एलडीसी होंगे. उन्होंने वर्ल्ड ड्वार्फ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया.

मुजफ्फरपुर. हौसले की ऊंचाई कद से नहीं, बल्कि इरादों से तय होती है. इस बात को मुजफ्फरपुर के मारीपुर निवासी अभ्युदय शरण ने अपनी मेहनत और लगन से सच साबित कर दिखाया है. महज 4 फीट 7 इंच की लंबाई वाले अभ्युदय को पारा एथलेटिक्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर बिहार सरकार ने सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र सौंपा है. अब वे वैशाली समाहरणालय में निम्नवर्गीय लिपिक (एलडीसी) के पद पर अपनी सेवाएं देंगे.

शुक्रवार को पटना में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया. सामान्य प्रशासन विभाग की अनुशंसा पर पारा एथलेटिक्स खेल विधा के उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में उनका चयन किया गया है. यह सम्मान उनकी वर्षों की मेहनत और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है.

इंटरनेशनल लेवल पर भी पहचान
अभ्युदय ने देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. वे जर्मनी में आयोजित विश्व बौना खेल (World Dwarf Games) में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वहां उन्होंने 60 मीटर, 100 मीटर और 1500 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया. इसके अलावा डिस्कस थ्रो स्पर्धा के लिए भी उनका चयन हुआ था. उनकी इन उपलब्धियों ने उन्हें सरकारी नौकरी तक पहुंचाया.

माता-पिता को होता गर्व
हालांकि यह सफलता उनके लिए जितनी बड़ी है, उतनी ही भावुक करने वाली भी है. अभ्युदय बताते हैं कि उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. वे कहते हैं, ‘मेरे पिता का सपना था कि मैं ऐसा काम करूं, जिस पर समाज को भी गर्व हो. आज वह सपना पूरा हुआ, लेकिन अफसोस है कि इस खुशी को देखने के लिए मेरे माता-पिता हमारे साथ नहीं हैं. अगर वे इस दुनिया में होते, तो सबसे ज्यादा खुशी आज उन्हें ही होती.’

बचपन से सुने ताने, अब बनें प्रेरणा
उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें अपने छोटे कद की वजह से समाज के ताने सुनने पड़े. लोग उन्हें ‘बौना’ कहकर चिढ़ाते थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अकाउंट्स ऑनर्स से स्नातक की डिग्री हासिल की. वर्तमान में उनकी दो बड़ी बहनों की शादी भी नहीं हुई है और उनकी उम्र भी 30 वर्ष हो चुकी है. तमाम पारिवारिक जिम्मेदारियों और संघर्षों के बीच उन्होंने खेल को नहीं छोड़ा.

आज अभ्युदय शरण की सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी शारीरिक कमी या सामाजिक तानों की वजह से अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …

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