मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (File/ ANI)
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार को अलग-अलग विभागों में सरकारी नौकरियों को “आउटसोर्स” करने के लिए विपक्षी पार्टियों ने घेरा है. उन्होंने इसे “बैकडोर, गलत और समाज के लिए मुसीबत” बताया है. लेकिन सरकार ने कहा कि विपक्षी पार्टियां पिछली सरकारों के समय से चली आ रही प्रक्रिया पर गलत तरीके से सवाल उठा रही हैं.
ईटीवी भारत को मिली जानकारी से पता चला है कि पिछले दो वर्षों में 29 सरकारी विभागों ने 200 से ज्यादा प्राइवेट कंपनियों को 22,454 नौकरियां आउटसोर्स की हैं. इन नौकरियों में सिक्योरिटी सर्विस, हाउसकीपिंग, सिक्योरिटी के लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, सफाई व्यवस्था, कंप्यूटर ऑपरेशन, वोकेशनल ट्रेनर, वोकेशनल कोऑर्डिनेटर, वॉच एंड वार्ड, ड्राइवर, प्लंबर, IT और फाइनेंशियल एक्सपर्ट, और रामबन जिले के सनासर में ट्यूलिप गार्डन के विकास के लिए फील्ड स्टाफ शामिल हैं.
इन कंपनियों को सरकार के ई-गवर्नेंस मार्केटिंग (GeM) पोर्टल पर बोली आमंत्रित कर हायर किया गया था, जहां अलग-अलग विभाग हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए टेंडर निकालते थे. इन कंपनियों के ऑफिस गुजरात, नोएडा, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दिल्ली में हैं, लेकिन ज्यादातर जम्मू और कश्मीर की हैं.
इनमें से अधिकांश नौकरियां (6518) श्रीनगर और जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सुरक्षा तथा स्वच्छता के लिए स्वास्थ्य सेवा निदेशक (DHS) द्वारा आउटसोर्स की गई हैं. आवास एवं शहरी विकास ने 2,005 नौकरियां आउटसोर्स की हैं; फूलों की खेती, रामबन में ट्यूलिप गार्डन और चश्मा शाही में गुलदाउदी उद्यान (Chrysanthemum garden) के विकास के लिए 3,530; कृषि विभाग ने 1,126 नौकरियों को आउटसोर्स किया है. मिशन वात्स्यला योजना के लिए समाज कल्याण विभाग, जम्मू में जिला समाज कल्याण कार्यालय और मिशन शक्ति ने पिछले दो वर्षों के दौरान 1,198 नौकरियों को आउटसोर्स किया है.
इन कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया के बारे में बताते हुए, एक सरकारी अस्पताल के प्रशासक ने ईटीवी भारत को बताया कि वे सरकार के GeM पोर्टल पर निविदा (Tender) निकालते हैं और सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को टेंडर देते हैं, जो फिर सुरक्षा या स्वच्छता (Sanitation) के लिए स्टाफ की भर्ती करती है.
उन्होंने कहा, “हॉस्पिटल डेवलपमेंट फंड (HDF) से पेमेंट किए जाते हैं, जो मरीजों से लिए जाता है.” उन्होंने आगे कहा कि कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए होते हैं या निविदा अनुबंध के अनुसार तीन या उससे ज्यादा वर्षों के लिए बढ़ाए जा सकते हैं.
ईटीवी भारत ने जम्मू-कश्मीर सरकार की हायर की गई कंपनियों में से एक से संपर्क किया. कंपनी के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर ईटीवी भारत को बताया कि सरकारी विभाग मानव संसाधन और अन्य सेवाओं के लिए पेमेंट करता है. अधिकारी ने कहा, “हम बिल या तो महीने में या सालाना या निविदा के नियम और शर्तों के आधार पर जमा करते हैं. पूरी टेंडरिंग प्रक्रिया GeM पोर्टल से होती है.”
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने, जिन्होंने ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए 888 नौकरियां आउटसोर्स की हैं, कहा कि सड़क परिवहन निगम (RTC) में आउटसोर्सिंग प्रक्रिया 2021 में शुरू हुई थी, जब चार प्राइवेट कंपनियों को ड्राइवर और कंडक्टर के लिए टेंडर के जरिये हायर किया गया था. उन्होंने कहा, “बस और ट्रक के फ्लीट को चलाने के लिए, ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए कंपनियों को हायर करने के लिए GeM पोर्टल के जरिये बोली शुरू की गईं. इन कंपनियों ने कर्मचारियों की भर्ती की और उसे RTC बसों और ट्रकों में लगाया. कंपनियां इन हायर किए गए ड्राइवरों और कंडक्टरों को महीने की सैलरी देती हैं और कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट के हिसाब से हर महीने उनसे सर्विस चार्ज लेती हैं.”
बीजेपी ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी
विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिये 24,000 नौकरियां भरने के बजाय प्राइवेट कंपनियों को आउटसोर्स कर रही है. विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि सरकार ने सरकारी विभागों में पारदर्शी भर्ती के बजाय आउटसोर्सिंग की नई आड़ में पिछले दरवाजे से एंट्री का रास्ता खोल दिया है.
शर्मा ने कहा, “मौजूदा आउटसोर्सिंग मॉडल युवाओं की एक और पीढ़ी के भविष्य को और खतरे में डाल देगा. अगर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार बैकडोर भर्ती सिस्टम को बदलने में नाकाम रहती है, तो BJP जम्मू-कश्मीर के युवाओं के अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए आंदोलन शुरू करेगी.”
अपारदर्शी बैकडोर अपॉइंटमेंट प्रक्रिया
PDP विधायक वहीद पारा ने कहा कि सरकारी नौकरियों को पूरी तरह से आउटसोर्स करके सरकार ने जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड जैसी सरकारी भर्ती संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले पारदर्शी, मेरिट-बेस्ड सिलेक्शन को नजरअंदाज कर दिया है. उन्होंने कहा, “यह आउटसोर्सिंग एक अपारदर्शी बैकडोर अपॉइंटमेंट प्रक्रिया है जो योग्य उम्मीदवारों के बजाय पसंद वाले उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है.”
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन और हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद लोन ने कहा कि सरकारी नौकरियों को प्राइवेट में बदलना एक आर्थिक और सामाजिक आपदा है. लोन ने कहा, “इससे समाज में तबाही मच जाएगी.”
आउटसोर्सिंग का बचाव करते हुए, जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में अपने विधानसभा क्षेत्र गांदरबल में कहा कि आउटसोर्सिंग कोई पिछले दरवाजे से नियुक्ति नहीं है. उन्होंने आउटसोर्सिंग को बैकडोर अपॉइंटमेंट कहने के लिए विपक्षी पार्टियों की आलोचना की. उन्होंने कहा, “बैकडोर और आउटसोर्सिंग में बहुत बड़ा अंतर है. हम भी नौकरियां दे रहे हैं. लेकिन जहां भी हमें योजनाओं के लिए जरूरत होती है, हम नौकरियां आउटसोर्स करते हैं.”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले पिछली सरकारों और यहां तक कि राज्यपाल प्रशासन ने भी आउटसोर्सिंग की थी. डार ने ईटीवी भारत से कहा, “पिछली सरकारों में अस्पतालों में सफाई और सुरक्षा के लिए कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग होती रही है. उपराज्यपाल के शासन में भी रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने ड्राइवर और कंडक्टर आउटसोर्स किए थे. हर सरकार खर्च कम करने के लिए ऐसा करती है. इसलिए, विपक्ष के आरोपों का कोई वास्तविक आधार नहीं है. वे सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए सच को तोड़-मरोड़ रहे हैं.
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