जरूरत से ज्यादा प्रेशर, शॉर्ट गेंद पर एक्सपोज, IPL स्टार वैभव सूर्यवंशी इंटरनेशन में फेल कैसे? 5 कारण – 5 reasons why vaibhav sooryavanshi failed in international cricket in ind vs eng series


15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी आईपीएल की सफलता के बाद इंग्लैंड की पिचों पर अतिरिक्त उछाल, स्विंग और शॉर्ट-पिच गेंदों के सामने संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।

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आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए रनों का अंबार लगाने और सबसे कम उम्र में भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल डेब्यू करने का रिकॉर्ड बनाने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए इंग्लैंड का दौरा अब तक बेहद निराशाजनक रहा है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचने वाले वैभव इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के शुरुआती मैचों में क्रमशः 14, 13 और 15 रन बनाकर सस्ते में पवेलियन लौट गए। जिस बल्लेबाज ने आईपीएल में गेंदबाजों के छक्के छुड़ाए थे वह इंग्लैंड की पिचों पर संघर्ष करता नजर आ रहा है। आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण जिनकी वजह से वैभव सूर्यवंशी इंग्लैंड में फेल साबित हो रहे हैं।

शॉर्ट-पिच और तेज गेंदबाजी के खिलाफ कमजोरी

शॉर्ट-पिच और तेज गेंदबाजी के खिलाफ कमजोरी

इंग्लैंड के गेंदबाजों ने वैभव सूर्यवंशी की कमजोरी को बहुत जल्दी भांप लिया है और वे लगातार उनके खिलाफ इसी रणनीति का इस्तेमाल कर रहे हैं। जोफ्रा आर्चर जैसे एक्सप्रेस तेज गेंदबाज उन्हें लगातार 145 से अधिक की रफ्तार वाली शॉर्ट-पिच और बाउंसर गेंदे फेंककर परेशान कर रहे हैं।

जरूरत से ज्यादा आक्रामक रवैया और धैर्य की कमी

जरूरत से ज्यादा आक्रामक रवैया और धैर्य की कमी

वैभव सूर्यवंशी एक नेचुरल स्ट्रोक-प्लेयर हैं जो पहली ही गेंद से बड़ा शॉट खेलने पर भरोसा रखते हैं। आईपीएल में तो सपाट पिचों पर यह रणनीति काम कर गई लेकिन इंग्लैंड में स्विंग और सीम होती गेंदों के सामने उनका यह जरूरत से ज्यादा आक्रामक रवैया आत्मघाती साबित हो रहा है। वे क्रीज पर थोड़ा समय बिताने और पिच के मिजाज को समझने के बजाय हर गेंद पर प्रहार करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे वे गलत शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा रहे हैं।

इंग्लिश पिचों से तालमेल न बैठना

इंग्लिश पिचों से तालमेल न बैठना

भारत की सूखी और टर्निंग पिचों की तुलना में इंग्लैंड की परिस्थितियां बिल्कुल अलग होती हैं। यहां की पिचों पर शुरुआती ओवर्स में काफी ज्यादा सीम मूवमेंट और अतिरिक्त उछाल देखने को मिलता है। वैभव ने अपने करियर में पहली बार इंग्लैंड की परिस्थितियों में इस स्तर पर क्रिकेट खेला है। हवा में गेंद के लगातार लहराने और पिच से मिलने वाले लेटरल मूवमेंट के कारण वे गेंद की लाइन और लेंथ को सही से जज नहीं कर पा रहे हैं जो उनके फ्लॉप होने की एक मुख्य वजह है।

इंटरनेशनल क्रिकेट का भारी दबाव

इंटरनेशनल क्रिकेट का भारी दबाव

महज 15 साल की उम्र में भारतीय टीम की जर्सी पहनना और दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाजों का सामना करना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। जब वैभव मैदान पर उतरते हैं तो उन पर अपनी आईपीएल की सफलता को दोहराने और रिकॉर्ड्स के बोझ का एक दबाव साफ दिखाई देता है। इस दबाव के चलते वे अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी नहीं कर पा रहे हैं और हड़बड़ाहट में स्पिनर्स के खिलाफ भी क्रीज से बाहर निकलकर स्टंप आउट जैसे आसान शिकार बन रहे हैं।

विपक्षी टीमों द्वारा की गई तगड़ी एनालिसिस

विपक्षी टीमों द्वारा की गई तगड़ी एनालिसिस

आज के आधुनिक क्रिकेट में वीडियो एनालिसिस की भूमिका बहुत बड़ी हो गई है। वैभव सूर्यवंशी ने जब आईपीएल में धमाल मचाया था, तब तक वे दुनिया के लिए एक नए खिलाड़ी थे। लेकिन अब इंग्लैंड की टीम ने उनके हर एक शॉट, उनके फुटवर्क और उनकी कमजोरियों का बारीकी से अध्ययन कर लिया है।

दीपेश शर्मा

लेखक के बारे मेंदीपेश शर्मा दीपेश शर्मा वर्तमान में नवभारत टाइम्स (NBT) डिजिटल में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने साल 2021 में ‘ज़ी न्यूज़’ से अपने करियर की शुरुआत की और बहुत कम समय में अपनी सटीक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन से पहचान बनाई। वे जनवरी 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 4.5 साल का अनुभव है। पत्रकारिता में सक्रिय होने से पहले दीपेश कई खेलों में स्टेट लेवल के खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने बैडमिंटन और ताइक्वांडो में स्टेट लेवल तक प्रतियोगिताओं में भाग लिया है।

विशेषज्ञता: दीपेश शर्मा खास तौर पर खेल की खबर, ब्रेकिंग न्यूज, रियल टाइम खबरें, एक्सप्लेनर और रिसर्च आधारित खबरें करते हैं। इसके अलावा वह क्रिकेट, बैडमिंटन, रेसलिंग, एथलेटिक्स, WWE, हॉकी और टेनिस जैसे खेलों की गहरी समझ रखते हैं। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वह वीडियो एंकरिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग और वीडियो एडिटिंग में निपुण।

शिक्षा: मूल रूप से हरियाणा के पलवल के रहने वाले दीपेश ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से बैचेलर में स्नातक किया। उन्होंने साल 2021 में अपनी स्नातक डिग्री पूरी की थी।और पढ़ें