झारखंड स्टूडेंट प्रोटेस्ट: अब कहां फंसा है मामला, जानिए अहम सवालों के जवाब


झारखंड स्टूडेंट प्रोटेस्ट में हिस्सा लेते कुछ प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं

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सारांश

  • जुलाई के आख़िरी सप्ताह से रांची में विद्यार्थियों का आंदोलन जारी
  • विद्यार्थियों ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का लगाया आरोप
  • विद्यार्थी जेपीएससी (झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन) और जेएसएससी (झारखंड स्टाफ़ सिलेक्शन कमीशन)-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं
  • पूरे मामले की सीबीआई जांच की भी मांग
  • सरकार का दावा- आंदोलनकारियों की 98 फ़ीसदी मांगों पर बनी सहमति
  • विद्यार्थियों ने कहा- जब तक पूरी मांगें नहीं मानी जातीं आंदोलन जारी रहेगा

प्रकाशित

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झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विद्यार्थियों का आंदोलन जारी है. 10 अगस्त को प्रदर्शनकारी विधानसभा घेराव के लिए मार्च कर रहे हैं.

सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की करीब 98 फ़ीसदी मांगें मान ली हैं, लेकिन स्टूडेंट इस दावे को स्वीकार नहीं कर रहे हैं. सबसे बड़ा विवाद जेएसएससी (झारखंड स्टाफ़ सिलेक्शन कमीशन)-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच को लेकर है.

हालांकि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच रविवार को रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में बातचीत हुई जिसमें 14वीं जेपीएससी (झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन) की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और एक उच्च स्तरीय जांच कमिटी बैठाने की मांग पर सहमति बनी है.

बीबीसी संवाददाता सीटू तिवारी के मुताबिक़, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्रनाथ महतो गुट के प्रवक्ता रविंद्र रवि ने बताया, “सरकार के साथ 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने पर सहमति बनी है. जेपीएससी की दोनों बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025 रद्द किए जाने और परीक्षाओं की सीआईडी, ईडी, रिटायर जज से जांच कराए जाने पर सहमति बनी है.”

रविंद्र रवि ने कहा कि स्टूडेंट्स परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने की माँग पर अड़े हुए हैं और सोमवार को विधानसभा का शांतिपूर्ण घेराव करने का एलान किया है.



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