असम में बच्चों और बीफ से जुड़ा एक विवाद आने वाले दिनों में बड़ा रूप ले सकता है. दरअसल, पांच जून को असम के एक सरकारी स्कूल में 9वीं कक्षा के पांच छात्र अपने टिफिन में कथित तौर पर बीफ लेकर आए. ये पांचों छात्र मुस्लिम समुदाय से थे, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी क्लास में पढ़ने वाले दो हिन्दू बच्चों को भी जबरन बीफ खिलाने की कोशिश की.
जब ये मामला स्कूल के प्रिसिंपल और इन हिन्दू छात्रों के माता-पिता तक पहुंचा तो उन्होंने इस घटना का विरोध किया. उन्होंने ये पूछा कि अगर स्कूल में सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं तो मुस्लिम छात्रों को अपने टिफिन में बीफ लाने की छूट कैसे मिल सकती है. और दूसरा वो किसी भी हिन्दू छात्र को जबरन बीफ खिलाने की कोशिश कैसे कर सकते हैं.
ये मामला असम के गोलपारा जिले के एक सरकारी स्कूल में सामने आया, जहां हिन्दू अल्पसंख्यक हैं और मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जिनकी आबादी 57 प्रतिशत है. मुस्लिम बहुल जिला होने के कारण इस मामले ने साम्प्रदायिक रूप ले लिया.
बात इतनी बढ़ गई कि हिन्दू छात्रों के परिवारों ने पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी और ये आरोप लगाया कि मुस्लिम छात्रों के माता-पिता ने उन्हें टिफिन में बीफ रखकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने और आहत करने का काम किया है. इस एफआईआर के बाद पुलिस ने टिफिन में बीफ लाने वाले सभी पांचों मुस्लिम छात्रों और उनके माता-पिता को थाने बुलाया और पूछताछ के बाद Assam Cattle Preservation Act के तहत एक मुस्लिम छात्र की मां को गिरफ्तार कर लिया.
इस महिला का नाम नूर साहिदा बेगम है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने बेटे के टिफिन में बीफ रखा और ये भी तब हुआ, जब असम में गोवंश और दूसरे पशुओं की हत्या और गोमांस खाना गैर-कानूनी है और इसे गंभीर अपराध माना गया है.
इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था कि किसी मां ने अपने बेटे के लिए स्कूल का टिफिन पैक किया हो और इसके लिए उसकी गिरफ्तार हो गई हो. इस मामले में जो पांच मुस्लिम छात्र अपने टिफिन में बीफ लेकर आए थे, उन्हें गोलपारा के सरकारी स्कूल से बाहर निकालने पर चर्चा चल रही है. इसके लिए 10 सदस्यों की एक जांच समिति का गठन हुआ है, जो ये बताएगी कि क्या स्कूल में बीफ लाने के लिए इन बच्चों को स्कूल से नाम काटा जा सकता है.
हमारे देश में ’14 लाख 71 हज़ार’ स्कूल हैं, जिनमें कुल 24 करोड़ 69 लाख बच्चे पढ़ते हैं. और जब इन बच्चों की माएं उनका स्कूल का ‘टिफिन’ पैक करती होंगी तो उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि ये मामला भी आपराधिक धाराओं में आ सकता है. लेकिन असम में ऐसा हुआ और इसने एक नई बहस ये छेड़ दी है कि क्या स्कूल का टिफिन भी किसी माता-पिता को गिरफ्तार करा सकता है.
हमारे देश में बच्चों के टिफिन को लेकर कोई विशेष कानून, नियम या दिशा-निर्देश नहीं हैं. उदाहरण के लिए असम के ही सरकारी स्कूलों में जो मिड-डे-मिल बच्चों को दिया जाता है, उसमें एक अंडा भी मिलता है, जो नॉन वेज की श्रेणी में आता है.
असम में इस घटना से पहले ऐसे दिशा-निर्देश नहीं थे कि बच्चे अपने टिफिन में नॉन-वेज नहीं ला सकते लेकिन जब ये विवाद हुआ तो गोलपारा में ऐसे नियम जारी हो गए और ये निर्देश दिए गए कि अब से कोई बच्चा अपने टिफिन में नॉन-वेज लेकर नहीं आएगा.
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रिपोर्ट- जाहिदुल इस्लाम