पूर्व क्रिकेटर दीप दासगुप्ता ने इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से टी20 सीरीज हारने के बाद भारतीय टीम की जमकर आलोचना की है। उन्होंने श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर की रणनीतियों पर सवाल उठाते हुए भारत की फील्डिंग और कैचिंग को बेहद खराब बताया।

अय्यर और गंभीर पर साधा निशाना
दीप दासगुप्ता ने कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व वाले थिंकटैंक को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, ‘इस सीरीज में इंग्लैंड रणनीतिक तौर पर हमसे बहुत आगे रहा। भारतीय टीम की कुछ योजनाएं और फैसले मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आए। मैदान पर भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद घटिया और स्तरहीन रहा— चाहे वह कैचिंग की बात हो या फिर आउटफील्ड में फील्डिंग की। निश्चित रूप से यह भारत के लिए भूलने जैसी सीरीज है, लेकिन खिलाड़ियों को इससे सबक लेना होगा। इस टीम में अनुभवहीनता साफ नजर आई।’
तीन खिलाड़ियों का डेब्यू, पर सीरीज से नहीं मिला कोई बड़ा पॉजिटिव
इस पांच मैचों की सीरीज के दौरान भारतीय टीम ने वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव और सूर्यंश शेडगे के रूप में तीन युवा खिलाड़ियों को इंटरनेशनल डेब्यू का मौका दिया। हालांकि, दीप दासगुप्ता का मानना है कि इसके बावजूद भारत के लिए इस सीरीज से हासिल करने को कुछ खास नहीं रहा। उन्होंने कहा, ‘यहां-वहां खेली गई एक-दो पारियों को छोड़ दें, तो भविष्य के लिहाज से इस सीरीज से भारत के लिए बहुत ज्यादा सकारात्मक चीजें निकलकर सामने नहीं आई हैं। यह बेहद निराशाजनक प्रदर्शन था और अब चयनकर्ताओं को दोबारा नए सिरे से योजनाएं बनानी होंगी।’
दासगुप्ता ने टीम में जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में गेंदबाजी की कमजोरियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि सीनियर तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह की अगुवाई वाले इस आक्रमण में बीच के ओवरों में विकेट चटकाने वाले एक असरदार गेंदबाज की भारी कमी खली। भारत के पास शुरुआती ओवरों में विकेट लेने के लिए बुमराह जैसा शानदार गेंदबाज मौजूद है, लेकिन टीम को मिडिल ओवर्स में विपक्षी बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने और साझेदारी तोड़ने वाले क्वालिटी गेंदबाजों को तलाशना ही होगा।
अगले साल होने वाले 50-ओवर वर्ल्ड कप पर फोकस
सीरीज के नतीजों से इतर दीप दासगुप्ता ने इसके पीछे की एक संभावित वजह टीम मैनेजमेंट के दीर्घकालिक विजन को भी बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि अगले साल यानी 2027 में 50-ओवर का वनडे वर्ल्ड कप खेला जाना है, इसलिए संभव है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट ने फिलहाल उस प्रारूप को थोड़ा अधिक प्राथमिकता दी हो और टी20 में नए प्रयोग किए हों। भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन इन युवा खिलाड़ियों को अलग-अलग विदेशी परिस्थितियों और अनुभवों से रूबरू कराना बेहद जरूरी है ताकि वे अपनी गलतियों से सीख सकें और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए खुद को तैयार कर सकें।’
