गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। रेलवे के तत्काल टिकट में फर्जीवाड़ा का गैंग काफी शातिर है। दूसरे राज्यों के रेलवे स्टेशन से तत्काल का टिकट बिहार के विभिन्न जिले के यात्रियों के नाम से कटाया जा रहा है।
इस काउंटर टिकट का प्रिंट संबंधित जगह पर निकालकर दो से तीन गुना अधिक राशि लेकर यात्रियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। शुक्रवार को पवन एक्सप्रेस के एसी कोच में दो तत्काल टिकट पर यात्रा करने वाले आठ यात्रियों के पकड़े जाने के बाद मामला पकड़ में आया है।
जांच में सामने आया कि टिकट की प्रिंटिंग रेलवे के अधिकृत काउंटर की जगह कहीं और की गई है। इस तरह तत्काल टिकट छपने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
अब यह भी जांच की जा रही कि टिकट के लिए कागज कहां से उपलब्ध कराए गए हैं। बिहार के प्रमुख स्टेशनों से मुंबई, दिल्ली, कोलकाता आदि ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने से जालसाज इसका फायदा उठा रहे हैं। इसमें रेल कर्मियों की भूमिका भी शक के दायरे में है।
समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा को मिले खुफिया इनपुट के बाद शुरू हुई जांच में तीन दिनों के भीतर दो बड़े मामले सामने आए। पहले समस्तीपुर स्टेशन पर पवन एक्सप्रेस से दो महिला और दो पुरुष संदिग्ध टिकट के साथ पकड़े गए।
इसके बाद शुक्रवार को पवन एक्सप्रेस में ही आठ और यात्री टेंपरिंग किए गए तत्काल टिकट पर सफर करते मिले। इससे स्पष्ट हो गया कि यह किसी एक दलाल का नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले जालसाजों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर में मामला निकल जाने पर हाजीपुर में पकड़ में आया
समस्तीपुर रेलमंडल में पकड़ में नहीं आने पर सोनपुर रेलमंडल को इसकी सूचना दी गई। इस दौरान टीटीई राकेश सिंह को कुछ टिकट संदिग्ध लगे। सहायक वाणिज्य प्रबंधक नीरज कुमार भी पहुंचे।
जांच में बी-2 व बी-4 एसी कोच में यात्रा कर रहे आठ यात्रियों के टिकटों में गंभीर गड़बड़ी मिली। टिकट महाराष्ट्र के पूर्णा और तेलंगाना के सिद्धपेट स्टेशन से जारी दिखाए गए थे, लेकिन उस टिकट को वाट्सएप पर मंगवाकर दरभंगा में बैठा जालसाज छापकर यात्रियों के हाथों अधिक पैसे में बेच दिया।
टिकटों और मोबाइल जब्त कर आरपीएफ हाजीपुर दिया गया। उसके बाद बीएनएस कानून के तहत जीआरपी को सौंप दिया गया। जीआरपी हाजीपुर में जांच कर रहे थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार ने पूछताछ शुरू की तो पता चला कि कुछ टिकटों पर झारखंड के टोरी स्टेशन का नाम अंकित किया गया, जबकि कई टिकटों से जारीकर्ता स्टेशन का नाम पूरी तरह गायब कर दिया गया था ताकि असली स्रोत तक कोई नहीं पहुंच सके। पहली नजर में टिकट पूरी तरह असली दिखाई देता था और सामान्य जांच में इनकी पहचान कर पाना लगभग असंभव था।
टेंपरिंग टिकट का मामला पवन एक्सप्रेस में पकड़े जाने के बाद चार लोगों पर हाजीपुर में केस किया गया है। दो टिकट पर चार महिला और चार पुरुष सफर कर रहे थे। महिला को निर्दोष पाते हुए थाने से बेल दे दी गई है। वहीं पकड़े गए पुरुष को कोर्ट भेजा गया है।
बीणा कुमारी, रेल एसपी, मुजफ्फरपुर