मकोका (MCOCA) मामले में अंतरिम जमानत पर बाहर आए गैंगस्टर अब्दुल नासिर के कारण नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में तीन दशक पुरानी गैंगवॉर फिर से सुलगने की आशंका बढ़ गई है।

गैंगस्टर राशिद के धमकी वाले दो ऑडियो वायरल
गैंगस्टर राशिद केबलवाला की दो ऑडियो वायरल बताई जा रही हैं, जिनमें वो नासिर को धमकी दे रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अब्दुल नासिर 2004 से गुनाह की दुनिया में सक्रिय है। 2011 में गैंगस्टर हाशिम बाबा के साथ गैंग बनाया। क्राइम ब्रांच ने 9 जुलाई 2019 को मकोका लगाया।
दिल्ली पुलिस का दावा
दिल्ली पुलिस का दावा था कि यह गैंग नॉर्थ ईस्ट दिल्ली समेत यमुनापार एरिया में मर्डर, हत्या के प्रयास, एक्सटॉर्शन, डकैती और दंगों जैसे संगठित अपराध में लंबे समय से सक्रिय है। इसी गैंग ने 2015 में विरोधी गैंग के सरगना छेनू पहलवान की हत्या के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट के भीतर सुनवाई के दौरान फायरिंग की थी, जिसमें एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया था। इस बीच, फरार चल रहे बाबा ने अपना अलग गैंग बना लिया।
नासिर ने 2019 में जॉइन की थी RPI
नासिर ने मकोका लगने पर 18 जुलाई 2019 को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) जॉइन कर ली थी। इसे दिल्ली की युवा इकाई का अध्यक्ष बना दिया गया। विवाद होने पर अठावले ने पार्टी से निकाल दिया। हाशिम बाबा राशिद केबलवाला ने नासिर के करीबी इमरान सैफी की 25 जुलाई 2019 को हत्या कर दी। फरारी काट रहे नासिर को सितंबर 2020 में हत्याकांड के बाद जगतपुरी से अरेस्ट किया था।
मकोका के केस ये आरोपी गिरफ्तार
मकोका के इस केस में क्राइम ब्रांच ने जिनको नासिर-बाबा गिरोह का मेंबर बताते हुए गिरफ्तार किया था, उनमें से नदीम कालिया, सद्दाम मलिक, एजाज उर्फ मोनू दादा, सलमान उर्फ माटू, गुलफाम खान, वासिद उर्फ नेता, उसके भाइयों नादिर हयात और शमीम उर्फ बदर के अलावा दानिश जमाल को जमानत मिल चुकी है।
क्यों लग रही गैंगवार की आशंका
नासिर के 2 मई 2026 को तिहाड़ जेल में गिरने से दोनों हाथों में फ्रैक्चर हुआ था, जो 12 मई से अंतरिम बेल लेकर बाहर है। इसके भाई आदिल भी बेटी के बीमार होने से 18 मई से अंतरिम बेल पर है। इसी मकोका में नामजद गैंगस्टर केबलवाला 2020 में अंतरिम बेल लेकर विदेश भाग गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केबलवाला को शक है कि नासिर गैंग खड़ा कर उसके करीबियों पर पलटवार कर सकता है।
किस आधार पर मिली है जमानत
कड़कड़डूमा कोर्ट ने नासिर गैंग पर लगे मकोका में आरोपियों को हाल ही में जमानत देते हुए कहा कि मकोका लगाने के लिए सिर्फ पुराने केसों में चार्जशीट दाखिल होना पर्याप्त नहीं है। कानून के अनुसार यह भी जरूरी है कि संगठित अपराध सिंडिकेट की गैरकानूनी गतिविधियां लगातार जारी रही हों और अधिनियम के तहत कार्रवाई किसी मूल अपराध से जुड़ी हो। रिकॉर्ड के अनुसार सिंडिकेट से जुड़ा अंतिम मूल अपराध (मर्डर) 2017 का था, जबकि मकोका के तहत FIR 2019 में अलग से दर्ज की गई। इसलिए पहली नजर में मकोका की आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी होती नहीं दिखती है।
