तीन दशक पुराना खूनी खेल फिर होगा शुरू? तिहाड़ से नासिर के निकलते ही वायरल हुए धमकी भरे ऑडियो – gangwar alert in north east delhi gangster abdul nasirs interim bail creates stir among rivals rashid cablewalas threat


मकोका (MCOCA) मामले में अंतरिम जमानत पर बाहर आए गैंगस्टर अब्दुल नासिर के कारण नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में तीन दशक पुरानी गैंगवॉर फिर से सुलगने की आशंका बढ़ गई है।

Delhi News
नई दिल्लीः तीन दशक से गैंगवॉर से जूझ रही नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में फिर सुगबुगाहट होने लगी है। गैंगस्टर अब्दुल नासिर अंतरिम बेल लेकर जेल से बाहर है। महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के इस केस के अधिकतर मुलजिमों को जमानत मिल चुकी है। ऐसे में नासिर को भी जल्द रेगुलर बेल मिलने की उम्मीद है। इससे नासिर के विरोधियों में खलबली मची हुई है।

गैंगस्टर राशिद के धमकी वाले दो ऑडियो वायरल

गैंगस्टर राशिद केबलवाला की दो ऑडियो वायरल बताई जा रही हैं, जिनमें वो नासिर को धमकी दे रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अब्दुल नासिर 2004 से गुनाह की दुनिया में सक्रिय है। 2011 में गैंगस्टर हाशिम बाबा के साथ गैंग बनाया। क्राइम ब्रांच ने 9 जुलाई 2019 को मकोका लगाया।

दिल्ली पुलिस का दावा

दिल्ली पुलिस का दावा था कि यह गैंग नॉर्थ ईस्ट दिल्ली समेत यमुनापार एरिया में मर्डर, हत्या के प्रयास, एक्सटॉर्शन, डकैती और दंगों जैसे संगठित अपराध में लंबे समय से सक्रिय है। इसी गैंग ने 2015 में विरोधी गैंग के सरगना छेनू पहलवान की हत्या के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट के भीतर सुनवाई के दौरान फायरिंग की थी, जिसमें एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया था। इस बीच, फरार चल रहे बाबा ने अपना अलग गैंग बना लिया।

नासिर ने 2019 में जॉइन की थी RPI

नासिर ने मकोका लगने पर 18 जुलाई 2019 को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) जॉइन कर ली थी। इसे दिल्ली की युवा इकाई का अध्यक्ष बना दिया गया। विवाद होने पर अठावले ने पार्टी से निकाल दिया। हाशिम बाबा राशिद केबलवाला ने नासिर के करीबी इमरान सैफी की 25 जुलाई 2019 को हत्या कर दी। फरारी काट रहे नासिर को सितंबर 2020 में हत्याकांड के बाद जगतपुरी से अरेस्ट किया था।

मकोका के केस ये आरोपी गिरफ्तार

मकोका के इस केस में क्राइम ब्रांच ने जिनको नासिर-बाबा गिरोह का मेंबर बताते हुए गिरफ्तार किया था, उनमें से नदीम कालिया, सद्दाम मलिक, एजाज उर्फ मोनू दादा, सलमान उर्फ माटू, गुलफाम खान, वासिद उर्फ नेता, उसके भाइयों नादिर हयात और शमीम उर्फ बदर के अलावा दानिश जमाल को जमानत मिल चुकी है।

क्यों लग रही गैंगवार की आशंका

नासिर के 2 मई 2026 को तिहाड़ जेल में गिरने से दोनों हाथों में फ्रैक्चर हुआ था, जो 12 मई से अंतरिम बेल लेकर बाहर है। इसके भाई आदिल भी बेटी के बीमार होने से 18 मई से अंतरिम बेल पर है। इसी मकोका में नामजद गैंगस्टर केबलवाला 2020 में अंतरिम बेल लेकर विदेश भाग गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केबलवाला को शक है कि नासिर गैंग खड़ा कर उसके करीबियों पर पलटवार कर सकता है।

किस आधार पर मिली है जमानत

कड़कड़डूमा कोर्ट ने नासिर गैंग पर लगे मकोका में आरोपियों को हाल ही में जमानत देते हुए कहा कि मकोका लगाने के लिए सिर्फ पुराने केसों में चार्जशीट दाखिल होना पर्याप्त नहीं है। कानून के अनुसार यह भी जरूरी है कि संगठित अपराध सिंडिकेट की गैरकानूनी गतिविधियां लगातार जारी रही हों और अधिनियम के तहत कार्रवाई किसी मूल अपराध से जुड़ी हो। रिकॉर्ड के अनुसार सिंडिकेट से जुड़ा अंतिम मूल अपराध (मर्डर) 2017 का था, जबकि मकोका के तहत FIR 2019 में अलग से दर्ज की गई। इसलिए पहली नजर में मकोका की आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी होती नहीं दिखती है।

शंकर सिंह

लेखक के बारे मेंशंकर सिंहशंकर सिंह, नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट एडिटर हैं। पत्रकारिता में 25 से भी ज्यादा वर्ष हो चुके हैं। छह साल से क्राइम कवर कर रहे हैं। NBT में 17 साल से हैं। इससे पहले पंजाब केसरी, दैनिक जागरण, अमर उजाला और जनसत्ता जैसे अखबारों में काम किया है। वह लंबे समय तक स्पोर्ट्स कवर करते रहे हैं। क्रिकेट और हॉकी वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स के अलावा आईपीएल और कॉमनवेल्थ गेम्स की कवरेज की। खेलों में ग्रासरूट से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चलने वाले करप्शन को उजागर किया। दिल्ली के लोकल इश्यू, स्थानीय राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर मजबूत पकड़ होने से इन पर भी खूब लिखा है। अब क्राइम रिपोर्टिंग करते हुए दिल्ली समेत उत्तर भारत के राज्यों में फैलते संगठित अपराध करने वाले गिरोहों, इनका पुलिस के साथ गठजोड़, देश की जेलों और विदेश से ऑपरेट होने वाले क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस के भ्रष्टाचार और साइबर क्राइम से जुड़े मामलों पर भी प्रहार किया है। खोजी पत्रकारिता के तहत ‘सच’ को सामने लाने के लिए एक्सक्लूसिव खबरें करने में माहिर हैं। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के 2020 के दंगों की तब ग्राउंड रिपोर्टिंग की, जब हिंसा अपने चरम पर थी। पुलिस के सहयोग से कई फंसे हुए परिवारों को दंगा प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित स्थानों में भेजने में मदद भी की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कॉलेज से बीएससी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास मीडिया में पीजी डिप्लोमा और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एलएलबी किया है।और पढ़ें