अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। गोविंद बल्लभ पंत (जीबी पंत) अस्पताल में दवाओं और मेडिकल सामान की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सबसे बड़ा सवाल उन दवाओं पर खड़ा हो गया है, जिनकी खरीद का पूरा रिकार्ड तो मौजूद है, लेकिन अस्पताल के स्टोर में उनका कोई पता नहीं है।
एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये दवाएं कभी स्टोर तक पहुंचीं भी थीं या नहीं। यदि पहुंचीं तो कब स्टोर में जमा हुईं, किस वार्ड को जारी की गईं, किन मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हुईं और उसका वितरण रिकार्ड कहां है। जांच में इन सवालों का संतोषजनक जवाब और दस्तावेज नहीं मिलने पर एसीबी एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, यह मामला 15 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। हालांकि जांच का मुख्य फोकस दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 75 दिनों में हुई खरीद पर है।
इस दौरान 63.30 लाख रुपये की दवाएं और मेडिकल सामान खरीदे जाने का रिकार्ड मिला है। कुछ दिनों में ही 27 लाख रुपये से अधिक के बिल जारी किए गए। आरोप है कि कई खरीद बिना टेंडर या निर्धारित प्रक्रिया अपनाए स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों पर की गईं।
एसीबी ने 2024 से 2026 तक के सभी रिकॉर्ड मांगे
एसीबी ने वर्ष 2024 से 2026 तक के सभी खरीद रिकॉर्ड, बिल, स्टाक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और संबंधित फाइलें तलब की हैं। एसीबी के इंस्पेक्टर पवन कुमार ने अस्पताल के डायरेक्टर को नोटिस जारी कर पूरा रिकार्ड उपलब्ध कराने को कहा है।
टीम अस्पताल के स्टोर, गोदाम और केंद्रीय स्टोर का फिजिकल वेरिफिकेशन कर खरीद और उपलब्ध स्टाक का मिलान कर रही है। जांच के दायरे में अस्पताल के कुछ वरिष्ठ डाक्टर और प्रशासनिक अधिकारी हैं। चेयरमैन डा. मंजू सुबेरवाल की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। इसके अलावा अस्पताल की कैंटीन का ठेका करीब 12 वर्ष से बिना नए टेंडर के चलने का मामला भी जांच के घेरे में है।
एसीबी यह भी जांच कर रही है कि खरीदा गया सामान अस्पताल में इस्तेमाल हुआ या कहीं और डायवर्ट कर दिया गया। यह जांच पहले से चल रहे 650-700 करोड़ रुपये के सीपीए खरीद घोटाले से जुड़ी मानी जा रही है, लेकिन जीबी पंत अस्पताल में इसकी अलग से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।