देश के लिए शहीद होने वाले और भगदड़ में जान गंवाने वाले समान नहीं, सरकारी नौकरी पर HC की बात का मतलब क्या है – those who are martyred for the country and those who lose lives in a stampede are not on the same high court to thalapathy vijay govt


करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार को सरकारी नौकरी देने का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने विजय सरकार के फैसले को संविधान के अनुच्छे 14 और 16 का उल्लंघन बताया है। साथ ही कहा कि इस घटना से आने वाले समय में सड़क हादसे या लापरवाही के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के पीड़ित भी सरकारी नौकरी की मांग करेंगे।

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करूर भगदड़ में पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी का जॉइनिंग लेटर देते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और मद्रास HC। (फोटो सोर्स- X/CMOTamilnadu और hcmadras.tn.gov.in)
क्या भगदड़ में जान गंवाने पर उसके परिवार को अनुकंपा वाली सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए या नहीं? तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) के फैसले के बाद देशभर में चर्चा हो रही है। सीएम भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देना चाहते हैं, लेकिन एक तबका ऐसा भी है जो सीएम के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंच गया।

वहीं कोर्ट ने भी सीएम के इस फैसले को संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 में दिए गए सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है, जबकि राज्य सरकार ने इसे संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत अपनी कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल बताया है।

क्या है मामला?

दरअसल, 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर अभिनेता-नेता थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम (TVK)’ की रैली आयोजित की गई थी। रैली में विजय भी शामिल थे। रैली के दौरान भगदड़ की घटना हुई थी। इस भगदड़ में करीब 41 लोगों की मौत हो गई थी। सरकार बनाने के बाद, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी दी थी। उनके इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और आर. शक्तिवेल की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिकाओं (PIL) के एक समूह को मंजूरी दी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत भगदड़ पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जानी थी।

मद्रास हाई कोर्ट ने रद्द किए सरकारी आदेश

27 जुलाई 2026 को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बैंच ने अनुकंपा वाली सरकारी नौकरी के उन सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी दी जा रही थी। हालांकि, इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को जुलाई में सरकारी नौकरी के जॉइनिंग लेटर बांटने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करनी की परमिशन थी। लेकिन कोर्ट ने तब यह भी कहा था कि यह मामला न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा।

संविधान के उन अनुच्छेद में क्या है जिन पर कोर्ट और सरकार आमने-सामने

कोर्ट ने राज्य सरकार पर संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 के सिद्धांतों के उल्लंघन करने बात करते हुए कहा, ‘जब वेट-लिस्ट मौजूद हो, तो नौकरी का इंतजार कर रहे लोगों की जरूरतों को नरजअंदाज करके करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को नौकरी देना ठीक नहीं माना जा सकता है। ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 में दिए गए सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं।’

संविधान के अनुच्छेद 14 में क्या है?

अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष समता: इसमें राज्य भारत के क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को कानून के सामने बराबर मानेगा और सभी कानूनों का समान संरक्षण प्रदान करेगा। आसान शब्दों में कहें तो कानून की नजर में सभी बराबर हैं और समान परिस्थितियों वाले लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाएगा।

article 14.

संविधान का अनुच्छेद 16 क्या कहता है?

अनुच्छेद 16- लोक नियोजन में अवसर की समता: यह कहता है कि सरकारी नौकरियों/पदों पर नियुक्ति और अवसर में सभी नागरिकों के लिए बराबरी होगी। यानी सिर्फ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंक, जन्मस्थान या निवास के आधार किसी नागरिक के साथ सरकारी नौकरी में भेदभाव नहीं किया जाएगा। हालांकि राज्य को यह अधिकार है कि वह पिछड़े वर्गों, अनुसचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान करें, ताकि उनका जरूरी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

article 16

राज्य सरकार ने दिया संविधान के अनुच्छेद 162 का हवाला

भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने के फैसले का कोर्ट में बचाव करते हुए राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 162 का हवाला दिया है। राज्य सरकार ने कहा कि उसने संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत अपनी कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये नौकरियां दी हैं।

article 162.

संविधान के अनुच्छेद 162 क्या है?

संविधान अनुच्छेद 162 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार: यह राज्य सरकार को उन सभी मामलों में काम करने और आदेश जारी करने की आजादी जेता है जो राज्य के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। राज्य सरकार की शक्तियां उन विषयों तक फैली हुई हैं, जिन पर उस राज्य के विधानमंडल को कानून बनाने का अधिकार है।
इसके अलावा, उन मामलों में राज्य की कार्यपालिका शक्ति संविधान या संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के अधीन होगी। यानी राज्य सरकार केवल उन्हीं मामलों में प्रशासनिक और कार्यपालिका फैसले ले सकती है, जिन पर उनकी विधानसभा या विधानमंडल को कानून बनाने का अधिकार है। हालांकि तब तक, जब तक कि वह फैसला संविधान या किसी मौजूदा कानून का उल्लंघन न करे।

यूं सरकारी नौकरी देने से मांगें बढ़ेंगी

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की कार्यकारी शक्ति का इस्तेमाल संविधान के दायरे में ही होना चाहिए। अगर राज्य की कार्यकारी शक्ति पर कोई रोक-टोक न हो और उसे खुली छूट दे दी जाए, तो अराजकता फैल जाएगी। इस घटना से प्रभावित लोगों को ऐसी ‘दया के आधार पर नौकरी’ देने से दूसरों के लिए भी ऐसी ही मांगों का रास्ता खुल जाएगा। लोगों की मांगें बढ़ेंगी।
कोर्ट ने सड़क हादसों और लापरवाही के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी को हासिल किया जाता है, इसे यूं नहीं बांटा जा सकता। इसकी कीमत समझनी होगी और इसके महत्व को सम्मान देना होगा।

देश के लिए शहीद होने वाले और भगदड़ में मारे जाने वालों समान नहीं

सरकार ने 1999 में जारी एक सरकारी आदेश का जिक्र किया जिसमें सहानुभूति और दया के आधार पर दी गई नौकरियों को सही ठहराया गया था। तब कोर्ट ने कहा कि वो सेना में शहीद हुए परिवार को नौकरी देने का प्रावधान था।
जजों ने कहा, ‘देश के लिए जंग के मैदान में शहीद हुए सेना के जवान की तुलना करूड़ भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार से नहीं की जा सकती है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति कम सहानुभूति होनी चाहिए। उनके प्रति हमारी पूरी सहानुभूति है। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि शहीद हुए युद्ध के नायक एक अलग श्रेणी में आते हैं और उनके बलिदान का सभी को सम्मान करना चाहिए।’

1999 में जारी सरकारी आदेश में क्या था?

24 मई 199 को केरल सरकार ने कार्मिक और प्रशासनिक विभाग के लिए एक सरकारी आदेश किया था। उसमें सेवा के दौरान सरकारी कर्मचारी के निधन के बाद उनके परिवार के सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की योजना के संधोधित नियम थे। निजी कॉलेजों के कर्मचारियों और रिटायरमेंट या वॉलेंट्री रिटायरमेंट वाले कर्मचारियों को अनुकंपा नौकरी से बाहर रख गया था। उस आदेश का पीडीएफ लिंक यहां दिया गया है।
विजय सरकार ने जिन लोगों को सरकारी नौकरी के जॉइनिंग लेटर दे दिए हैं, उनके लिए जजों ने कहा, ‘हम इस बात से वाकिफ हैं कि हम उन लोगों की बात सुने बिना आदेश दे रहे हैं जिन्हें नौकरी दी गई थी। लेकिन हमने पहले ही साफ कर दिया था कि नौकरी का आदेश न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा और जिन्हें ऐसी नौकरी दी गई है, वे किसी निहित अधिकार का दावा नहीं कर सकते।’

बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि नौकरी देने के बजाय सरकार ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार के योग्य सदस्यों को स्किल और एंटरप्रेन्योरशिप की ट्रेनिंग क्यों नहीं दे सकती थी? जजों ने कहा, ‘सरकार हर परिवार में एक लीडर और बिजनेसमैन आर आत्मनिर्भर लोग तैयार कर सकती थी जो बाद में दूसरों को नौकरी देते। ऐसे तकनीकी या कौशल-आधारित कोर्स का खर्च उठा सकती थी।’

अमन कुमार

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और ‘मानव को शांति कहां’ मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं… और पढ़ें