छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी के सवाल पर सरकार का जवाब (ETV BHARAT)
रायपुर: छत्तीसगढ़ में रोजगार और सरकारी नौकरी को लेकर सियासत लगातार गरमाई हुई है. लाखों युवाओं के रोजगार पंजीयन के बावजूद सीमित संख्या में सरकारी नियुक्तियां होने के सवाल पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी और रोजगार को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं है. सरकार अपनी जरूरत और बजट के मुताबिक सरकारी भर्तियां करती है, लेकिन रोजगार के दूसरे माध्यम भी लगातार बढ़ रहे हैं.
हर साल बढ़ता है रोजगार पंजीयन
अनुराग सिंह देव ने कहा कि हर पांच और दस साल में नई पीढ़ी पढ़ाई पूरी कर रोजगार की तलाश में सामने आती है. ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ती है और इसी आधार पर रोजगार कार्यालयों में पंजीयन भी होता है. यानी रोजगार पंजीयन का आंकड़ा लगातार बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि हर साल बड़ी संख्या में नए युवा रोजगार की तलाश में जुड़ते हैं.
छत्तीसगढ़ में रोजगार को लेकर सियासत (ETV BHARAT)
जरूरत के हिसाब से सरकारी भर्तियां
सरकारी नौकरी को लेकर उठ रहे सवालों पर अनुराग सिंह देव ने कहा कि सरकार अपनी आवश्यकता के मुताबिक अलग-अलग विभागों में भर्ती करती है. शिक्षा, पुलिस, वन समेत अन्य विभागों में लगातार नियुक्तियां होती हैं. उन्होंने दावा किया कि विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में आने वाले समय में शिक्षकों समेत कई पदों पर भर्ती की प्रक्रिया सामने आएगी, जिससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे.
सरकारी नौकरी और रोजगार में फर्क
विपक्ष के रोजगार नहीं देने के आरोप पर अनुराग सिंह देव ने सरकारी नौकरी और रोजगार के बीच अंतर समझाने की कोशिश की. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर बड़े पैमाने पर मकानों का निर्माण होता है, तो सिर्फ निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों को ही रोजगार नहीं मिलता, बल्कि सीमेंट, परिवहन, श्रमिक और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं. यानी उनके मुताबिक रोजगार का दायरा सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है.
महतारी वंदन का भी दिया उदाहरण
अनुराग सिंह देव ने इस दौरान महतारी वंदन योजना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता का पैसा भी बाजार में आता है और इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है. उनका तर्क है कि अलग-अलग माध्यमों से पैदा होने वाले रोजगार और आय को भी रोजगार के आंकड़े में देखा जाना चाहिए.
सरकारी नौकरी की भी अपनी सीमा
प्रदेश में लगातार सरकारी नौकरी की मांग को लेकर हो रहे आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के सवाल पर अनुराग सिंह देव ने कहा कि सरकारी नौकरियों की एक स्वाभाविक सीमा होती है. उन्होंने कहा कि किसी विभाग में कितने पद हैं, उसकी क्षमता कितनी है और राज्य का बजट कितना है,इन्हीं चीजों के आधार पर सरकारी भर्तियां होती हैं. उन्होंने साफ कहा कि ऐसा नहीं समझना चाहिए कि प्रदेश में हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी ही मिलेगी.
सरकार का दावा, दोनों मोर्चों पर प्रयास
अनुराग सिंह देव का कहना है कि सरकार का प्रयास सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है. सरकार सरकारी नियुक्तियों के साथ-साथ रोजगार के दूसरे अवसर पैदा करने पर भी काम कर रही है. युवाओं के रोजगार पंजीयन और सरकारी नियुक्तियों के बीच के बड़े अंतर पर सरकार का यही तर्क है कि पंजीयन की संख्या को सीधे सरकारी नौकरी से जोड़कर देखना सही नहीं होगा.
कुल मिलाकर रोजगार पंजीयन के बड़े आंकड़े और सरकारी नियुक्तियों की सीमित संख्या के बीच का अंतर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है. विपक्ष इसे सरकार की रोजगार नीति की नाकामी बता रहा है, तो सरकार का तर्क है कि रोजगार का मतलब सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं है. अब सवाल यही है कि सरकार के इन दावों से प्रदेश के लाखों रोजगार तलाश रहे युवाओं को कितने वास्तविक अवसर मिलते हैं.