‘..परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता, एक सदस्य को नौकरी’- भरत तिवारी एनकाउंटर केस में सीएम सम्राट की घोषणा


सम्राट चौधरी और दिवंगत भरत तिवारी

सीएम सम्राट चौधरी और दिवंगत भरत तिवारी (ETV Bharat)

पटना: बिहार की सियासत और कानून व्यवस्था को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील कदम उठाया है. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर इस बात की पुष्टि की है कि ”न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार दिवंगत भरत तिवारी के पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी.”

भरत तिवारी एनकाउंटर पर सम्राट की बड़ी घोषणा : सीएम सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ये भी लिखा है कि ”परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी.” सीएम के इस आधिकारिक ऐलान के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की दिशा में एक बड़ी राहत मिलती दिख रही है.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की आधिकारिक घोषणा : मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ट्वीट कर बताया कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है. इसी रिपोर्ट की सिफारिशों और तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है.

परिवार के एक सदस्य को नौकरी : मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है. परिवार की जीविका और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आर्थिक मुआवजे के साथ-साथ एक आश्रित परिजन को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी. सरकार के इस कदम को निष्पक्षता और न्याय स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

क्या था पूरा मामला और सियासी उबाल? : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में बीते जून महीने में पुलिस ने एक एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी को गोली मारी गई थी. पुलिस प्रशासन का दावा था कि भरत तिवारी एक अपराधी की तरह अवैध हथियार लहरा रहे थे और पुलिस पर फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उन्हें गोली लगी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

फेसबुक लाइव वीडियो से खुली एनकाउंटर की हकीकत : हालांकि, घटना के वक्त भरत तिवारी द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए ‘फेसबुक लाइव’ के वीडियो ने पुलिसिया दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. वीडियो में देखा गया कि भरत ने कथित तौर पर सरेंडर करने के इरादे से अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ फेंक दी थी. ग्रामीणों और परिजनों का आरोप था कि यह एक सोची-समझी ‘फर्जी मुठभेड़’ थी, क्योंकि भरत तिवारी सोशल मीडिया के जरिए बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और स्थानीय प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठा रहे थे.

हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज कर रहे जांच : इस घटना के बाद पूरे बिहार में अगड़ी और पिछड़ी जातियों के संगठनों, आम जनता और विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. चौतरफा दबाव के बाद मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था.

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की वर्तमान स्थिति : यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब हाल ही में आरा की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) अदालत ने भी इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने प्रथम दृष्टया पुलिसिया कार्रवाई में गंभीर अनियमितता पाते हुए तत्कालीन एसडीएम, एसडीपीओ और शाहपुर के थाना प्रभारी समेत कुल 11 अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है. कोर्ट के इस सख्त रुख और मुख्यमंत्री की इस बड़ी घोषणा ने अब साफ कर दिया है कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कानून का शिकंजा कस चुका है और दोषियों का बचना अब नामुमकिन है.

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