सागर. कहते हैं देने वाला जब भी देता तो छप्पर फाड़ कर देता है और ऐसा ही कुछ सागर के एक 29 वर्षीय युवक सत्येंद्र दांगी के साथ हो रहा है, क्योंकि उन्होंने दो चार नहीं बल्कि अब तक 7 सरकारी नौकरियों में सिलेक्शन पा लिया है. वह अपनी पसंदीदा जिस नौकरी को हासिल करना चाहते हैं उस एग्जाम को आसानी से क्वालीफाई कर लेते हैं. अब हाल ही में उनका आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर के रूप में सिलेक्शन हो गया है.
हालांकि, इस सफलता के पीछे सतेंद्र का संघर्ष मेहनत अनुशासन त्याग भी छिपा हुआ है. क्योंकि इनके पिता महेंद्र सिंह पेशे से किसान है लेकिन इन्होंने अपने पिता को मजदूरी करते हुए भी देखा है.
8 से 10 घंटे करते थे पढ़ाई
तैयारी के दौरान उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया, घर पर रहकर सेल्फ स्टडी करते थे. इसके लिए उन्होंने बाकायदा नोट्स बनाए हुए थे. प्रीवियस क्वेश्चन पेपर को अधिक से अधिक करते थे और तैयारी के लिए इनका मुख्य फोकस केवल सिलेबस पर रहता था, सिलेबस का गहराई से एनालिसिस करने के बाद जो भी टॉपिक होते थे उनके छोटे-छोटे से नोटिस बनाते थे. बार-बार रिवीजन करना मॉक टेस्ट लगाना और प्रीवियस क्वेश्चन पेपर को हल करते रहते थे. शुरुआती समय में 8 से 10 घंटे प्रतिदिन पढ़ाई करते थे लेकिन मध्य प्रदेश बिजली विभाग में T.O. के पद पर चयन होने के बाद इन्हें नौकरी पर्सनल लाइफ के अलावा पढ़ाई को भी मैनेज करना था नौकरी के साथ-साथ वह रोजाना तीन-चार घंटे अध्ययन में देते थे.
पढ़ने के लिए गांव से दूर जाना पड़ता था
वहीं आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर की परीक्षा Abs एम्पलाई बोर्ड सिस्टम भोपाल के द्वारा ली गई थी जिसमें उनका सिलेक्शन हो गया. सत्येंद्र कहते हैं किया है ए ग्रेड रैंक की पोस्ट है और अब इससे में खुश हो गए, आगे फिलहाल तो कोई और पोस्ट हासिल करने की इच्छा नहीं है. इस परीक्षा में पास होने के बाद उनके घर में खुशी का माहौल है लोगों ने नाच गा कर मिठाई खिलाकर जश्न मनाया.
सत्येंद्र नेशनल हाईवे 44 पर चित्तौरा के पास स्थित सुल्तानपुरा गांव के हैं. इन्होंने पांचवी तक की पढ़ाई अपने गांव से की लेकिन मिडिल क्लास की पढ़ाई करने के लिए घर से करीब 3 किलोमीटर दूर बर खेड़ी तक जाना पड़ता था इसके बाद नवीन से ट्वेल्थ तक की पढ़ाई बमोरी बीका से की, जो घर से 12 किलोमीटर दूर था और यहां पर वह साइकिल से आना जाना करते थे. यह अपने गांव के पहले ऐसे शख्स हैं जो इतने बड़े पद तक पहुंचे हैं इसे पहले केवल एक लड़का ही कांस्टेबल में भर्ती हुआ था.