पूरब-पश्चिम में अजेय भाजपा:दक्षिण में गड़बड़ाए समीकरण, अन्नामलाई की विदाई और शिवकुमार की ताजपोशी ने दिया झटका – Bjp Unstoppable In East-west: Equations Upset In South, Annamalai’s Departure And Shivakumar Coronation A Blow


पूरब और पश्चिम में एक के बाद एक किले पर कब्जा करने में कामयाब भाजपा के लिए दक्षिण भारत एक बार फिर से यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है। तमिलनाडु, जहां भाजपा दशकों से विस्तार की संभावना देखती रही है वहां फायरब्रांड नेता अन्नामलाई की विदाई और कर्नाटक जहां सत्ता के फेरबदल का इतिहास रहा है, वहां मुख्यमंत्री पद पर डीके शिवकुमार की ताजपोशी ने पार्टी के समीकरण गड़बड़ा दिए हैं। तेलंगाना में पार्टी अरसे से गुटबाजी से पार पाने की नाकाम कोशिश कर रही है तो केरलम में हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों में पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

पार्टी को सबसे बड़ा झटका द्रविड़ राजनीति के लिए मशहूर राज्य तमिलनाडु में लगा है। इस राजनीति में टीवीके के सेंध लगने के बाद भाजपा को अपने लिए उम्मीद दिखी थी, मगर यह उम्मीद जिन अन्नामलाई से थी, उन्होंने सियासत में भाजपा के इतर नई पारी खेलने का मन बना लिया है। अन्नामलाई की जगह अध्यक्ष बनाए गए नैनार रामचंद्रन और उनकी पूरी टीम विधानसभा चुनाव में बुरी तरह विफल रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अन्नामलाई जब नई पार्टी का गठन करेंगे तो भाजपा के कई नेता उनके साथ नया राजनीतिक भविष्य तलाशेंगे।

उत्तर से इस बार बेहतर की उम्मीद

उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और पंजाब को छोड़ कर सभी राज्यों में काबिज भाजपा नए साल में कुछ बेहतर की उम्मीद कर सकती है। चुनावी राज्य हिमाचल प्रदेश में सत्ता की अदला बदली का इतिहास रहा है, जबकि पंजाब में पार्टी नए जोशखरोश के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

कर्नाटक से भी बुरी खबर

कर्नाटक में जिस शांत तरीके से कांग्रेस ने सिद्घारमैया की जगह शिवकुमार को सीएम बनाया है, उससे भाजपा की रणनीति को गहरा झटका लगा है। पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि शिवकुमार न सिर्फबेहतरीन संकटमोचक, रणनीतिकार हैं बल्कि राज्य में उनकी छवि हिंदूवादी नेता की भी है। उससे भी बड़ी बात यह है कि शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से हैं, जो आम तौर पर भाजपा और जेडीएस के साथ जुड़ा रहा है। पार्टी के दूसरे सबसे बड़े आधार लिंगायत समुदाय में सेंध लगाने के लिए शिवकुमार अपने मंत्रिमंडल में इस समुदाय को अहम जिम्मेदारी दे सकते हैं। इस नई सियासी परिस्थिति में भाजपा को इस समुदाय के सबसे बड़े नेता रहे पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के पुत्र बिजेंद्र को एक और कार्यकाल देने के योजना पर विराम लगाने पर मजबूर होना पड़ा है।

केरलम-तेलंगाना से भी शुभ समाचार नहीं

केरलम विधानसभा चुनाव में पार्टी ईसाई मतदाताओं को साधने में नाकाम रही। यही कारण है कि पार्टी को तीन सीटें तो मिली मगर मत प्रतिशत 12 फीसदी से कम पर अटका रहा। दूसरी ओर तेलंगाना में बंदी कुमार से अध्यक्ष पद लेने के बाद बाद और उससे पहले से जारी गुटबाजी पर पार्टी नेतृत्व लगाम नहीं लगा पाया है। इसी गुटबाजी केकारण पार्टी राज्य में बार-बार लोकसभा के प्रदर्शन के आसपास भी पहुंचने में नाकाम रही है।

 


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