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भोपाल में सरकारी नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी. CMHO का रिश्तेदार बताकर बेरोजगारों से पैसे वसूलता रहा युवक. पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी ने नौकरी दिलाने के एवज में अलग-अलग लोगों से 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये से अधिक तक की रकम ली. कई युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलने का भरोसा देकर महीनों तक टालता रहा. जब काफी समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं मिली तो पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ.
बड़े पापा CMHO हैं, नौकरी 100% पक्की
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है. आरोप है कि एक युवक ने खुद को मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) का रिश्तेदार बताते हुए कई बेरोजगार युवाओं से सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये वसूल लिए. मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है.
जानकारी के अनुसार आरोपी युवकों और उनके परिजनों से कहता था कि उसके ‘बड़े पापा’ CMHO हैं और स्वास्थ्य विभाग में उसकी अच्छी पकड़ है. वह अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाली भर्तियों में आसानी से नौकरी लगवा सकता है. भरोसा जीतने के लिए वह विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम भी लेता था और 100% नौकरी लगने का भरोसा देता था. आरोपी युवक जिला अस्पताल के पीछे एक चाय की दुकान पर लोगों को अपने झांसे में लेता था. वह सस्पेंड सीएमएचओ डॉ जीएस चौहान के नाम से उनके कथित भतीजे ने लाखों रुपए की डील की.
स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा
भास्कर के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग से जुड़े ट्रांसफर, अटैचमेंट और नियुक्तियों में धांधली, फर्जी अटेंडेंस जैसा गैरकानूनी काम हुए हैं. आरोपी CMHO को बड़े पारा कहता था. विभाग के कामों में उसका दखल था. यहां तक कर्मचारियों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की जगह दलालों के घरों में होती थी. यह खुलासा कलेक्टर अदिति गर्ग द्वारा गठित जांच समिति के समक्ष हुए बयानों से सामने आया है.
सामने आई शिकायतों में एक ने बताया कि उससे बेटे की नौकरी के नाम पर 70 हजार रुपये लिए गए, लेकिन नियुक्ति नहीं मिली. एक अन्य मामले में 11 लोगों से करीब 7 लाख 70 हजार रुपये वसूले जाने का आरोप लगाया गया है. वहीं तीसरे मामले में एक व्यक्ति ने दावा किया कि आरोपी ने स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न पदों पर भर्ती कराने के नाम पर उससे भी बड़ी रकम ली, लेकिन न नौकरी मिली और न ही पैसे वापस किए गए.
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