बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर क्या चल रहा है? आ गया भारत सरकार का जवाब – india responds to bangladesh request for sheikh hasina extradition


विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए ढाका के अनुरोध पर कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अभी विचार-विमर्श किया जा रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब हसीना के अवामी लीग को फिर से सक्रिय करने के लिए बांग्लादेश लौटने की चर्चाएं तेज हैं।

sheikh hasina extradition
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना
नई दिल्ली: भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर बांग्लादेश के अनुरोध को लेकर बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस पर अभी विचार-विमर्श जारी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का यह बयान हसीना की उस कथित योजना के बीच आया है, जिसके तहत वह अपनी अवामी लीग पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें प्रत्यर्पण का अनुरोध मिला है। जैसा कि हमने पहले भी कहा है, इस अनुरोध पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।’

हसीना ने 5 अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री पद को छोड़ा था

जायसवाल ने कहा, ‘इस अनुरोध पर इससे जुड़े कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है।’ पिछले सप्ताह शेख हसीना के करीबी सूत्रों ने बताया था कि पूर्व प्रधानमंत्री ढाका लौटकर अवामी लीग में नई जान फूंकने के उद्देश्य से स्वेच्छा से वापसी की तैयारी कर रही हैं। बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हसीना (78) ने छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद 5 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और देश छोड़कर भारत चली गयी थीं। वह तभी से भारत में रह रही हैं।

हसीना पर बढ़ा कानूनी शिकंजा

पिछले साल नवंबर में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के खिलाफ तत्कालीन हसीना सरकार की दमनकारी कार्रवाई को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ मानते हुए हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी। हसीना उन्हें सुनाई गई मौत की सजा, आपराधिक दोषसिद्धि और सभी आरोपों को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताते हुए खारिज कर चुकी हैं। फैसले के बाद से बांग्लादेश लगातार भारत से हसीना को ढाका प्रत्यर्पित करने की मांग कर रहा है, ताकि वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर सकें।

अशोक उपाध्याय

लेखक के बारे मेंअशोक उपाध्यायअशोक उपाध्याय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर ड‍िज‍िटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का 12 साल का अनुभव। साल 2014 में नवभारत टाइम्स हिंदी अखबार से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। पॉलिटिक्स और क्राइम बीट पर रिपोर्टिंग का काफी अनुभव है। अमर उजाला देहरादून में भी सेंट्रल डेस्क पर काम किया है। साथ ही कई चुनावों में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले 6 साल से NBT डिजिटल में न्यूज डेस्क पर काम कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स को पकड़ने की अच्छी समझ है।

विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ के साथ करंट अफेयर्स और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अच्छा खासा अनुभव है। करंट टॉपिक पर विश्लेषण और ओपिनियन लिखने में खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव: प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 12 साल से कार्यरत हैं।

JIMMC नोएडा से साल 2013 में पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले साल 2010 में एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद (सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ) से राजनीतिक शास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। लोक प्रशासन विषय पर खास पकड़ है। पत्रकारिता से पहले यूपीएससी और उत्तराखंड और यूपी पीसीएस एग्जाम की तैयारी के दौरान समाजशास्त्र, संविधान समेत कई विषयों का अध्ययन किया। संवेदनशील मुद्दों पर लिखने की खास कला है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कई मार्मिक लेख लिखे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया है, कई बार सफलता भी मिली है। पत्रकारिता में आगे और बेहतर सीखने और समझने का क्रम जारी है।… और पढ़ें