बाजार में गिरावट? FD, T-Bills या लिक्विड फंड्स: 3-12 महीने के लिए बेस्ट निवेश
सोमवार, 24 अगस्त 2026 को शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और दिन के अंत में शुरुआती बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई। सेंसेक्स 172 अंक टूटकर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी भी 33 अंक फिसलकर 24,219 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस अनिश्चितता के बीच अगले 3 से 12 महीनों के लिए अपनी नकदी (Cash) को सही जगह पार्क करने का फैसला बेहद अहम हो जाता है। ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), ट्रेजरी बिल (T-bills), लिक्विड या ओवरनाइट फंड्स और आर्बिट्राज फंड्स के विकल्पों की तुलना करना जरूरी है।
हाल ही में 19 अगस्त को नीलामी में T-bill का कट-ऑफ 91-दिन के लिए 5.26%, 182-दिन के लिए 5.57% और 364-दिन के लिए 5.74% रहा। इन्हें आप ब्रोकर या ‘RBI रिटेल डायरेक्ट’ के जरिए खरीद सकते हैं; इनमें सेटलमेंट T+1 यानी अगले कामकाजी दिन होता है। ब्याज दरों में बदलाव के इस दौर में, इससे आपको हर हफ्ते होने वाले ऑक्शन पर नजर रखने में मदद मिलती है।

FD, T-Bills, लिक्विड/ओवरनाइट और आर्बिट्राज फंड्स: रिटर्न और निकासी के नियम
अलग-अलग कैटेगिरी के रिटर्न से आपकी उम्मीदें तय होती हैं। 1 साल की अवधि में लिक्विड फंड्स का औसत रिटर्न करीब 5.74% है, जबकि ओवरनाइट फंड्स 5.18% के आसपास बने हुए हैं। शांत बाजार में आर्बिट्राज फंड्स का रिटर्न 6% के करीब रहता है और इनमें गिरावट का जोखिम कम होता है। बड़े बैंक 1 साल की डिपॉजिट पर 6.25–6.50% तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं, जहां डिपोज़िट इंश्योरेंस के तहत ₹5 लाख तक की सुरक्षा मिलती है। वहीं कई लिक्विड या ओवरनाइट स्कीम्स ₹50,000 तक तुरंत निकालने (Instant Access) की सुविधा देती हैं, हालांकि इनमें सात दिनों का एग्जिट लोड लागू होता है।
| विकल्प (Instrument) | अनुमानित सालाना रिटर्न | पैसे मिलने का समय |
|---|---|---|
| 91-दिन का T-bill | 5.26% | T+1 |
| 182-दिन का T-bill | 5.57% | T+1 |
| 364-दिन का T-bill | 5.74% | T+1 |
| लिक्विड फंड्स | ~5.74% (1-साल) | T+0 IAF; अन्यथा T+1 |
| ओवरनाइट फंड्स | ~5.18% (1-साल) | T+1; ₹50 हजार तक IAF |
| आर्बिट्राज फंड्स | ~6.05% (1-साल) | T+3 तक |
| बड़े बैंकों की 1-साल की FD | 6.25–6.50% | समय से पहले निकासी संभव; 0.5–1% पेनल्टी |
टैक्स के नियम और रिडेम्पशन की समयसीमा
FD से मिलने वाले ब्याज पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है और तय सीमा से अधिक ब्याज होने पर बैंक TDS भी काटते हैं। लिक्विड और ओवरनाइट समेत सभी डेट फंड्स पर अब होल्डिंग अवधि की परवाह किए बिना स्लैब रेट से ही टैक्स लगता है। इसके उलट आर्बिट्राज फंड्स इक्विटी-ओरिएंटेड होते हैं; इनमें शॉर्ट-टर्म गेन्स पर 15% और लॉन्ग-टर्म गेन्स पर 10% टैक्स लगता है। रिडेम्पशन की बात करें तो लिक्विड या ओवरनाइट फंड्स में T+1 दिन में पैसा आ जाता है, जबकि आर्बिट्राज फंड्स में T+3 दिन तक का समय लग सकता है।
| विकल्प (Instrument) | 12 महीने से कम | 12 महीने या उससे अधिक |
|---|---|---|
| फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | टैक्स स्लैब के अनुसार (TDS लागू) | टैक्स स्लैब के अनुसार |
| लिक्विड/ओवरनाइट (डेट) | टैक्स स्लैब के अनुसार | टैक्स स्लैब के अनुसार |
| आर्बिट्राज फंड्स | STCG 15% | LTCG 10% (थ्रेसहोल्ड लागू) |
1, 3, 6 और 12 महीनों के लिए ऐसे बनाएं अपना पोर्टफोलियो (Laddering)
सुरक्षित निवेश (Conservative) के लिए: 1 महीने का पैसा ओवरनाइट फंड में रखें। 3 महीने के लिए 60% हिस्सा 91-दिन के T-bills और 40% लिक्विड फंड्स में बांटें। 6 महीने के लिए 70% पैसा 182-दिन के T-bills और 30% आर्बिट्राज फंड्स में लगाएं। 1 साल के लिए 364-दिन के T-bill के साथ किसी बड़े बैंक की FD का कॉम्बिनेशन बनाएं। मध्यम जोखिम (Moderate) वाले निवेशक लिक्विड फंड्स का हिस्सा थोड़ा घटाकर आर्बिट्राज फंड्स में आवंटन बढ़ा सकते हैं। वहीं आक्रामक (Aggressive) निवेशक आर्बिट्राज फंड्स को प्राथमिकता दे सकते हैं, बशर्ते एग्जिट-लोड की समयसीमा का ध्यान रखा जाए। यह जरूर याद रखें कि रिडेम्पशन कामकाजी दिनों के कट-ऑफ समय पर निर्भर करता है; वीकेंड या छुट्टी होने पर सेटलमेंट अगले बिजनेस डे पर ही होगा।