बाजार में गिरावट: SIP रोकें या जारी रखें? जानें निवेश का सही तरीका | Stock Market Crash: Should You Stop SIP Or Continue Investing? Expert Investment Strategy 2026


बाजार में गिरावट: SIP रोकें या जारी रखें? जानें निवेश का सही तरीका

24 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर घबराहट दिखी और बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर के पार पहुंचने से महंगाई की चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। वहीं, केंद्रीय बैंक की कोशिशों के बावजूद रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास बना हुआ है। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा, जबकि निफ्टी 23,700 के नीचे फिसल गया। ऐसे में नए निवेशक इस उलझन में हैं कि अपनी SIP रोक दें या ‘बाय द डिप’ (गिरावट में खरीदारी) का मौका भुनाएं। इसका सही जवाब आपके निवेश के नजरिए, कैश की जरूरत और अनुशासन पर निर्भर करता है।

बाजार में गिरावट देखकर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) रोकना अक्सर नुकसानदेह साबित होता है। दरअसल, जब कीमतें गिरती हैं, तो SIP के जरिए आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जिससे लंबी अवधि में आपकी निवेश लागत का औसत बेहतर हो जाता है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि SIP केवल किसी बड़ी जरूरत के समय ही रोकें, बाजार की खबरों से डरकर नहीं। अगर आपकी कमाई स्थिर है और लक्ष्य अभी दूर है, तो निवेश जारी रखें। अगर कोई स्कीम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रही है, तो अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, निवेश के तरीके की नहीं। बाजार के उतार-चढ़ाव में ही SIP का गणित सबसे शानदार काम करता है।

Stock Market Crash: Should You Stop SIP or Continue Investing? Expert Investment Strategy 2026

सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट: SIP जारी रखें या STP के जरिए करें निवेश?

हाथ में खाली कैश रखना और SIP रोकना, दोनों अलग बातें हैं। अगर आपके पास एकमुश्त (lumpsum) रकम है, तो सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) का रास्ता चुनें। इसे तीन से छह महीनों की अवधि में बांटकर निवेश करें, और अगर बाजार में ज्यादा गिरावट आए तो इसे तेज भी किया जा सकता है। सबसे पहले, अपने पास 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड सुरक्षित रखें। इसके बाद अपने एसेट एलोकेशन की जांच करें। अगर इक्विटी में आपका निवेश तय लक्ष्य से कम है और आपका गोल 5 साल से ज्यादा दूर है, तो STP के जरिए पैसा लगाएं। वरना, फिलहाल इंतजार करना ही बेहतर है।

सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट: टैक्स, खर्च और होने वाली गलतियां

हाल ही में टैक्स के नियमों में बदलाव हुआ है। लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) अब सेक्शन 111A के तहत 20% की दर से लगेगा। वहीं, 23 जुलाई 2024 के बाद होने वाले ट्रांसफर पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) एक तय सीमा के ऊपर 12.5% होगा। एग्जिट लोड और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पहले की तरह ही लागू रहेंगे। बार-बार फंड बदलने से आपका खर्च बढ़ सकता है। इसलिए STP की तारीखें और पैसा निकालने का प्लान टैक्स को ध्यान में रखकर ही बनाएं।

सेंसेक्स-निफ्टी बनाम FD: 5/10/15 साल का रिटर्न

निवेश का विकल्प 5 साल 10 साल 15 साल
FD (बड़ा बैंक, मौजूदा दर) 6.40% ~6–7% (रोलओवर मानकर) ~6–7% (रोलओवर मानकर)
निफ्टी 50 (TRI/प्राइस, नोट देखें) 12.41% ~14.2% औसत रोलिंग ~10.3% CAGR

ये आंकड़े बताते हैं कि मार्केट की टाइमिंग को पकड़ना कितना मुश्किल है। इक्विटी में धैर्य रखने वालों को अच्छा रिवॉर्ड मिलता है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव भी काफी होता है। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में स्थिरता तो है, लेकिन 5 साल से ज्यादा के निवेश में दोबारा निवेश (reinvestment) का जोखिम बना रहता है। 6.40% की दर एक बड़े बैंक की 5 साल की एफडी पर आधारित है। इक्विटी के आंकड़े NSE फैक्टशीट और स्वतंत्र रिसर्च पर आधारित हैं; इनकी गणना के तरीके अलग हो सकते हैं। सुरक्षित निवेश के लिए बफर बनाएं, निवेश को ऑटोमेट करें, एकमुश्त रकम को किस्तों में लगाएं और समय-समय पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करते रहें।



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