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गया का दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) कृषि शिक्षा का नया केंद्र बन गया है. यहां सीयूईटी परीक्षा के ज़रिए कृषि में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला मिलता है. पढ़ाई के बाद सरकारी अफसर और प्राइवेट सेक्टर में बेहतरीन अवसर हैं. छात्र खुद का कृषि स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं.
गयाः बिहार के गया जिले में स्थित दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिहार सहित पूरे देश के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान है. यदि युवा आधुनिक कृषि, अनुसंधान, कृषि उद्यमिता और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय उनके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यहां कृषि विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई होती है.
सबौर कृषि विश्वविद्यालय और पूसा कृषि विश्वविद्यालय के बाद बिहार का एक और सरकारी संस्थान हैं जहां कृषि की पढाई हो रही है. वर्ष 2023 से यहां कृषि विषय की पढाई हो रही है. चार वर्षीय कृषि स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र ग्रामीण क्षेत्र में जाकर ग्रामीण परिवेश की जानकारियां और तकनीक का आदान प्रदान करते हैं. यहां इंटरमीडिएट के बाद कृषि स्नातक की पढाई छात्र कर सकते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
कृषि की पढाई करने के बाद छात्रों के पास करियर के कई विकल्प है. स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड डेवलपमेंट के डीन प्रोफ़ेसर डाॅक्टर अवनीश कुमार सिंह बताते हैं कि कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाए हैं. छात्र इस विषय की पढाई के बाद सरकारी के साथ प्राइवेट सेक्टर की नौकरी कर सकते हैं. सरकारी नौकरी में कृषि पदाधिकारी, उद्यान पदाधिकारी बन सकते हैं. इसके अलावे बैंकिंग के क्षेत्र में फील्ड ऑफिसर, यूपीएससी के माध्यम से भी नौकरी कर सकते हैं.
इसके अलावे शिक्षण संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर और लेक्चरर की नौकरी कर सकते हैं. प्राइवेट सेक्टर में बीज कंपनी, केमिकल फैक्ट्री में जा सकते हैं. साथ ही छात्र इस विषय की पढाई करने के बाद कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप और रोजगार शुरु कर सकते हैं. बता दें कि इस विश्वविद्यालय में एनटीए द्वारा आयोजित सीयूईटी परीक्षा के माध्यम से छात्रो का नामांकन होता है. इसी सत्र से यहां कृषि स्नातकोत्तर की पढाई भी शुरु हो गई है.
दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय आधुनिक कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का एक उभरता हुआ केंद्र है. यहां विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों का अनुभव भी प्राप्त होता है. कृषि शिक्षा विद्यार्थियों को फसल उत्पादन, मृदा विज्ञान, बागवानी, कृषि अर्थशास्त्र, जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, कृषि इंजीनियरिंग और कृषि व्यवसाय जैसे विषयों का वैज्ञानिक ज्ञान प्रदान करती है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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