विवि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों की बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है। अदालत ने साफ किया है कि एक ही साल या बैच में डिग्री पूरी करने वाले उम्मीदवारों के मामले में नियुक्ति का आधार केवल प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख नहीं हो सकता। यदि किसी उम्मीदवार के कुल अंक अधिक हैं तो उसे ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए अन्यथा मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया का मूल उद्देश्य समाप्त हो जाएगा। बैचवाइज भर्ती में योग्यता को नजरअंदाज करना गैरकानूनी है।
न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता हरदयाल सिंह द्वारा राज्य सरकार व अन्य के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता हरदयाल सिंह और निजी प्रतिवादी दोनों अनुसूचित जनजाति श्रेणी से संबंध रखते हैं।
2016 में हुई थी काउंसलिंग
शिक्षा विभाग की ओर से सोलन जिला में अनुबंध के आधार पर फिजिकल एजुकेशन टीचर के पदों को भरने के लिए सितंबर 2016 में काउंसिलिंग और साक्षात्कार हुए थे। दोनों उम्मीदवारों ने वर्ष 2000 के बैच में बैचलर आफ फिजिकल एजुकेशन की डिग्री पूरी की थी। विभाग की ओर से तैयार की गई अंतिम बैचवाइज मेरिट सूची के अनुसार हरदयाल सिंह ने 43.17 अंक जबकि प्रतिवादी ने 36.36 अंक प्राप्त किए थे।
कम अंक होने के बावजूद दे दी नियुक्ति
अंक कम होने के बावजूद विभाग ने 19 जनवरी 2017 को प्रतिवादी को पीटीए शिक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया। विभाग ने तर्क दिया कि प्रतिवादी का परिणाम पुनर्मूल्यांकन के बाद पास घोषित हुआ था और उसके प्रमाणपत्र पर नौ सितंबर 2000 की तारीख अंकित थी जबकि याचिकाकर्ता के प्रमाणपत्र पर 14 सितंबर 2000 की तारीख दर्ज थी। विभाग ने माना कि प्रतिवादी पहले योग्य हुआ था। इसी भेदभाव के खिलाफ अधिक अंक वाले उम्मीदवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
विभाग की कार्रवाई को मनमाना पाया
कोर्ट ने विभाग की इस कार्रवाई को अवैध व मनमाना पाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उम्मीदवार पुनर्मूल्यांकन के बाद पास घोषित होता है तो उसकी डिग्री का प्रभाव परिणाम घोषित होने की मूल शुरुआती तारीख से ही माना जाता है, न कि पुनर्मूल्यांकन के आदेश की तारीख से। चूंकि दोनों एक ही साल के बैच के थे। इसलिए उनके बीच चयन का एकमात्र आधार मेरिट (अंक) होना चाहिए था।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की और शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता हरदयाल सिंह को भी फिजिकल एजुकेशन टीचर के पद पर नियुक्ति पत्र जारी करे। चूंकि याचिकाकर्ता ने इस अवधि के दौरान वास्तविक कार्य नहीं किया है, इसलिए उन्हें जनवरी 2017 से कोई पिछला वेतन नहीं दिया जाएगा। हालांकि, न्याय के सिद्धांतों के तहत उन्हें 19 जनवरी 2017 से ही काल्पनिक वरिष्ठता और सेवा निरंतरता का लाभ दिया जाएगा लेकिन वरिष्ठता सूची में उसका नाम प्रतिवादी के ठीक नीचे दर्ज होगा।