बॉलीवुड की सबसे महंगी एक्ट्रेस थीं हेमा मालिनी? बोलीं- भिक्षा की तरह लिफाफे में पैसे मिलते थे – hema malini reacts highest paid actress hindi cinema rumours reveals per movie fees dharmendra tmovj


बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी ने हाल ही में खुद से जुड़ी एक बड़ी अफवाह पर सफाई दी है. जब एक्ट्रेस 70s के दौर में अपने करियर के पीक पर थीं, तब कहा जाता था कि वो एक फिल्म के लिए काफी पैसे लिया करती थीं. उनकी गिनती बॉलीवुड की हाईएस्ट-पेड एक्ट्रेसेस में होती थी. मगर हेमा मालिनी का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं है, उल्टा उन्हें लिफाफे में भिक्षा के रूप में पैसे दिए गए थे. 

हेमा मालिनी को मिलते थे कितने पैसे?

हिंदी रश संग बातचीत में एक्ट्रेस ने कहा- ना ना, ऐसा कुछ नहीं है. आपको ये बात किसने कही? मुझे तब काफी कम पैसे मिला करते थे. मुझे कभी भी ज्यादा फीस नहीं दी गई. हालांकि मुझे उस दौर में कई फिल्ममेकर्स पसंद किया करते थे. लेकिन मैंने कभी पैसों के लिए काम नहीं किया.

‘आप जितना फेमस होते रहते हैं, आपकी प्राइज उस हिसाब से बहुत ज्यादा बढ़ती जाती है. मुझे कभी भी उतनी मोटी फीस नहीं मिली, जितनी आज की एक्ट्रेसेस को मिलती है. मुझे तो उसका एक छोटा-सा हिस्सा भी नहीं मिला. लेकिन उस कम पैसों में भी जो काम हमने किया, वही हमारी असली कमाई थी. पैसों से ज्यादा हमारे काम की अहमियत थी.’

धर्मेंद्र के उसूलों पर चलती हैं हेमा मालिनी

हेमा मालिनी ने आगे बताया कि उन्होंने हमेशा अपने दिवंगत पति और लेजेंडरी एक्टर धर्मेंद्र के उसूल को फॉलो किया है. वो कभी अपनी फीस खुद की इच्छा अनुसार नहीं बढ़ातीं. वो प्रोड्यूसर से उतने ही पैसे लेती हैं, जितना वो दे सकते हैं. एक्ट्रेस ने कहा- अगर प्रोड्यूसर सामने से ज्यादा पैसे देना चाहते थे, तो उनका स्वागत था. वरना हमने कभी ये डिमांड नहीं की कि अगर हमें इतना पैसा नहीं मिलेगा तो हम फिल्म में काम नहीं करेंगे. मैंने ऐसा कभी नहीं किया. 

हेमा ने इसी दौरान अपनी मां जया चक्रवर्ती के बारे में बताया जो उनके करियर की शुरुआत में उनकी मैनेजर भी हुआ करती थीं. एक्ट्रेस ने कहा- मेरी मां सभी फिल्म प्रोड्यूसर्स के साथ बहुत उदार थीं. अगर कोई प्रोड्यूसर कहता कि उसके पास शूटिंग के पैसे नहीं हैं, तो वो कहती थीं कि कोई बात नहीं. यहां तक कि जब मैंने 1979 में फिल्म मीरा की थी, तब उसके प्रोड्यूसर के पास भी बिल्कुल पैसे नहीं थे. उस समय हम कभी पैसों की मांग नहीं करते थे. प्रोड्यूसर जितने पैसे एक लिफाफे में रखकर दे देता था, हम उसे वैसे ही स्वीकार कर लेते थे, मानो भिक्षा मिली हो. 

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