‘मकसद हमें बदनाम करना…’, डेटा चोरी के ट्रंप के आरोपों पर बिफरा चीन – us president Donald trump allegation china interfered in american elections ntcppl


चीन ने शुक्रवार को कहा कि उसने कभी भी अमेरिकी चुनावों में दखल नहीं दिया है और न ही ऐसा करने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बीजिंग पर 2020 के चुनाव में दखल देने का आरोप लगाए जाने के बाद, चीन ने वॉशिंगटन से ऐसे “बेबुनियाद आरोप” लगाना बंद करने को कहा है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का व्यक्तिगत डेटा (नाम, पता, वोटर रजिस्ट्रेशन) चुराया है. ट्रंप ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा डेटा चोरी बताया है. ट्रंप ने कहा कि चीन ने 2018 के मध्याविधि चुनाव और 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिकी डीप स्टेट ने इस पूरी घटना को छिपाया.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “अमेरिका के ये आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं और इनका मकसद चीन को बदनाम करना है. अमेरिकी चुनावों में दखल देने में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है और हमने ऐसा कभी नहीं किया है.”

बीजिंग में रोज़ाना की ब्रीफ़िंग में लिन ने अमेरिका से कहा कि वाशिंगटन चीन पर बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करे.

जब उनसे पूछा गया कि क्या इससे सितंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा पर असर पड़ सकता है तो प्रवक्ता ने जवाब दिया, “जैसा कि मैंने अभी कहा हम अमेरिका से अपील करते हैं कि वह अपने चुनावों में चीन का मुद्दा बनाना बंद करे और चीन-अमेरिका संबंधों के लिए कुछ अच्छा करे.”

बता दें कि ट्रंप ने मई के बीच में बीजिंग का दौरा किया है और शी से मुलाक़ात की है. दोनों सरकारों ने कहा कि वे द्विपक्षीय संबंधों को संभालने के लिए एक नया फ़्रेमवर्क अपनाएंगी. ट्रंप ने शी को सितंबर में अमेरिका आने का न्योता दिया और बीजिंग ने पुष्टि की कि शी ने यह न्योता स्वीकार कर लिया है. 

डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी चुनाव में दखलंदाजी का आरोप ऐसे समय लगाया है जब अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव करीब हैं. हालांकि, ट्रंप के आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई नया सार्वजनिक और निर्णायक सबूत सामने नहीं आया है, और पहले की अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टें इस दावे से मेल नहीं खातीं. 

फिर सवाल उठ रहा है कि ट्रंप इतने लंबे समय बाद इस मुद्दे को क्यों उठा रहे हैं. 

दरअसल ट्रंप चुनावी सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाकर रिपब्लिकन समर्थकों को एकजुट करना चाहते हैं. उन्होंने इसके साथ सख्त वोटर आईडी और नागरिकता सत्यापन जैसे चुनावी सुधारों की भी मांग दोहराई है. इसके अलावा ट्रंप 2020 के चुनावी मुद्दे को फिर से जीवित करना चाहते हैं. 
ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि 2020 का चुनाव निष्पक्ष नहीं था. अब उन्होंने चीन पर 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा हासिल करने का आरोप लगाकर उसी बहस को फिर हवा दी है. 

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