चेतन भगत ने लिखा-भारतीय स्वभाव से भ्रष्ट होते हैं क्या
चेतन भगत ने सोशल मीडिया एक्स पर अपना आर्टिकल शेयर करते हुए पूछा-क्या भारतीय स्वभाव से ही भ्रष्ट होते हैं? हमने तो राम को भी नहीं बख्शा। दशकों तक लोग अयोध्या में उनके मंदिर के लिए लड़ते रहे। इसने राजनीति को आकार दिया, समुदायों को बांटा, देश का ध्यान अपनी ओर खींचा और आधुनिक भारत के सबसे भावनात्मक मुद्दों में से एक बन गया। जब राम जन्मभूमि मंदिर आखिरकार सच में बना, तो लाखों लोगों ने जश्न मनाया। और अब हमारे सामने ऐसे आरोप हैं कि जिन लोगों को इस संस्थान की सेवा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, हो सकता है कि उन्होंने ही इसमें से चोरी की हो। किसी सरकारी विभाग से नहीं। किसी ठेकेदार से नहीं। किसी अनजान कॉर्पोरेशन से नहीं। हमने राम के नाम पर बनी चीज से चोरी की।
भारतीय नैतिकता के पैमाने पर घोटाले आम बात
चेतन भगत ने लिखा-‘यह कोई आम भारतीय घोटाला नहीं है। जैसे फ्लाईओवर बनाने के प्रोजेक्ट में चोरी करना या किसी सरकारी अधिकारी का काम करने के लिए रिश्वत लेना। भारतीय नैतिकता के पैमाने पर वे घोटाले आम बात हैं। राम मंदिर से चोरी करना हमारे लिए भी एक नई गिरावट है।
अभी सबसे आसान काम वही है जो हम हमेशा करते हैं। कुछ बुरे लोगों को ढूंढना, गुस्सा जाहिर करना, कुछ लोगों को जेल भेजना और आगे बढ़ जाना। कुछ बुरे लोग। कुछ लालची लोग।
चेतन भगत
भ्रष्टाचार कभी कुछ बुरे लोगों का काम नहीं रहा: चेतन भगत
चेतन भगत ने कहा-यहां देखने लायक कुछ नहीं है। लेकिन यह सफाई बहुत आसान है। क्योंकि कड़वा सच यह है कि भारत में भ्रष्टाचार कभी भी कुछ बुरे लोगों का काम नहीं रहा है। यह इसलिए बना हुआ है क्योंकि लाखों अच्छे लोगों ने इसके साथ जीना, इसे नजरअंदाज़ करना, इसकी तारीफ करना, इससे फायदा उठाना या मौका मिलने पर इसमें शामिल होना सीख लिया है।
कड़वा सच यह है कि भारत में भ्रष्टाचार कभी भी कुछ बुरे लोगों का काम नहीं रहा है।
चेतन भगत
कौन हैं ये लोग, क्या ये दूसरे ग्रह से आए हैं: चेतन भगत
चेतन भगत ने लिखा-हम अक्सर सोचते हैं कि भ्रष्टाचार सिर्फ दूसरे लोग करते हैं। जैसे नेता, अफसर या ठेकेदार। लेकिन क्या सच में ऐसा है? ये लोग कौन हैं? क्या ये किसी दूसरे ग्रह से आए हैं? नहीं। ये भी हम लोगों की तरह ही उन्हीं घरों, स्कूलों, मोहल्लों और समुदायों से आए हैं। धीरे-धीरे, हमने भ्रष्टाचार को नैतिक कमी मानने के बजाय एक ‘लाइफ स्किल’ या हुनर मानना शुरू कर दिया है।
जो बिज़नेसमैन अपनी कमाई छिपाता है, उसे स्मार्ट कहा जाता है। जो सरकारी अफसर एक्स्ट्रा पैसे कमाता है, उसे वेल सेटल माना जाता है। जो नियमों का तोड़ निकाल लेता है, उसे रिसोर्सफ़ुल या जुगाड़ू कहा जाता है। हम सबके सामने तो भ्रष्टाचार की बुराई करते हैं, लेकिन अकेले में उससे मिलने वाले फायदों की तारीफ करते हैं।
चेतन भगत
सरकारी नौकरी वाले दूल्हे से पूछते हैं एक्स्ट्रा इनकम
चेतन भगत ने लिखा-हमने कितनी बार सुना है कि सरकारी नौकरी वाले होने वाले दूल्हे के बारे में बात करते हुए घरवाले उसकी ‘एक्स्ट्रा इनकम’ के बारे में पूछते हैं? या लोगों को कैश में लेन-देन करने, टैक्स बचाने और शॉर्टकट ढूंढने के बारे में डींगें मारते देखा है? हममें से बहुत से लोगों ने यह मान लिया है कि धार्मिकता और नैतिकता एक ही चीज है। जबकि ऐसा नहीं है।
चेतन भगत ने लिखा-बिज़नेस में धोखाधड़ी करो, टैक्स चोरी करो, मजदूरों को कम पैसे दो, कमजोर लोगों का शोषण करो। और फिर मंदिर में कुछ पैसे दान कर दो और मन को तसल्ली दे लो। जैसे भगवान कोई ‘एडजस्टमेंट-एंट्री’ सर्विस चला रहे हों। जैसे दान देने से ईमानदारी की कमी की भरपाई हो सकती है।
कोई व्यक्ति बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान कर सकता है, मंदिरों में दिल खोलकर दान दे सकता है, हर त्योहार में शामिल हो सकता है, फिर भी रोजमर्रा की जिंदगी में बेईमानी कर सकता है। असल में, आधुनिक भारतीय समाज की एक अजीब बात यह है कि हम नैतिकता की जगह धर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं।
चेतन भगत
भ्रष्टाचार की समस्या हल करना ज्यादा मुश्किल
- चेतन भगत ने लिखा-अयोध्या में चोरी की घटना उस सोच की कमजोरी को दिखाती है। क्योंकि अगर राम से जुड़ी जगह लोगों को लालच में पड़ने से नहीं रोक सकती, तो शायद समस्या धर्म की कमी की नहीं थी। शायद समस्या चरित्र की कमी की है। और शायद इस समस्या को हल करना कहीं ज्यादा मुश्किल है। कुछ लोग कहेंगे कि भ्रष्टाचार तो हर जगह होता है। बेशक होता है। कुछ लोग दूसरे धर्मों, दूसरे संस्थानों या दूसरे देशों से जुड़े घोटालों की बात करेंगे। ठीक है। लेकिन इससे असल में क्या साबित होता है?
- उन्होंने कहा-कहीं और भ्रष्टाचार होने से यहां का भ्रष्टाचार कम शर्मनाक नहीं हो जाता। और न ही इसे हिंदुओं बनाम गैर-हिंदुओं की बहस बनाना चाहिए। इस मामले में आरोपी मंदिर पर हमला करने वाले बाहरी लोग नहीं थे। वे मंदिर की सेवा करने की जिम्मेदारी संभालने वाले अपने ही लोग थे। इससे बड़ी सीख यह है कि किसी भी संस्थान को सिर्फ भरोसे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। भारत में हमारी बार-बार होने वाली गलतियों में से एक यह है कि हम मान लेते हैं कि कुछ लोग लालच से ऊपर होते हैं। जैसे धार्मिक नेता, देशभक्त नेता, बुज़ुर्ग नेता या सम्मानित नेता।
हम अच्छे लोगों की तलाश करते रहते हैं, जबकि हमें मजबूत सिस्टम बनाने चाहिए। क्योंकि इंसान तो इंसान ही होता है। किसी भी समूह को काफी पैसा, रसूख और बिना किसी जांच-पड़ताल के काम करने की आजादी दे दी जाए, तो लालच आ ही जाता है। इसीलिए जवाबदेही जरूरी है। इसलिए नहीं कि लोग बुरे होते हैं, बल्कि इसलिए कि लोग इंसान होते हैं।
चेतन भगत, लेखक
भ्रष्टाचार हमारे लिए बड़ी निराशा में से एक
चेतन भगत ने यह भी लिखा-मैं कुछ लोगों को यह कहते हुए सुन सकता हूं कि सभी भारतीय ऐसे नहीं हैं। बेशक, सभी ऐसे नहीं हैं। लेकिन काफी लोग ऐसे हैं। इतने कि भ्रष्टाचार हमारे राष्ट्रीय जीवन की सबसे बड़ी निराशाओं में से एक बना हुआ है। इतने कि लगभग हर भारतीय के पास रिश्वत, शॉर्टकट, फेवर, किकबैक या नियमों में हेरफेर से जुड़ी कोई न कोई कहानी है। इतने कि ईमानदारी अक्सर आम बात के बजाय कुछ खास या अनोखी लगती है। इतने कि देश की सबसे पवित्र जगहों में से एक पर भ्रष्टाचार के आरोप चौंकाने वाले नहीं, बल्कि मुमकिन लगते हैं। हम हिंदुओं के लिए यह पल खास तौर पर दुखद होना चाहिए।
हममें से बहुत से लोगों ने हिंदू धर्म को सिर्फ रीति-रिवाजों, प्रतीकों, पहचान और दिखावे तक सीमित कर दिया है। लेकिन धर्म कोई दिखावा नहीं है। यह ऐसी चीज नहीं है जिसे आप कितनी जोर से मंत्र जपते हैं, कितनी बार मंदिर जाते हैं, या दान पेटी में कितना पैसा डालते हैं, इससे साबित किया जा सके।
चेतन भगत
चेतन भगत ने यह भी कहा-जो भक्त नियमित रूप से मंदिरों में नकद और कीमती सामान दान करते हैं, उन्हें इस पर विचार करना चाहिए। ऐसे देश में जहां हर गली में गरीबी दिखती है, क्या सच में जरूरतमंद लोगों को ढूंढना मुश्किल है? क्या उस उदारता का कुछ हिस्सा उन तक नहीं पहुंच सकता? आपके सपोर्ट स्टाफ की बेहतर सैलरी, आपकी सेवा करने वाले वेटर्स को टिप्स, या अच्छा काम करने वाले प्लंबर को कुछ देना? क्या राम इसे गलत मानेंगे?
धर्म इस बात से झलकता है कि आप पैसे कैसे कमाते हैं, लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जब कोई देख न रहा हो तब आप कितनी ईमानदारी से काम करते हैं, और जब गलत काम करना आसान हो तब आप क्या चुनते हैं।
चेतन भगत, लेखक
धर्म का क्या मतलब रह जाता है, चेतन भगत ने पूछा
चेतन भगत ने कहा-अगर ईमानदारी, संयम, दया और सच्चाई न हो, तो धर्म का क्या मतलब रह जाता है? अगर हम भ्रष्टाचार और बेईमानी से अपने ही समाज को नुकसान पहुंचाते हैं, तो क्या इससे कोई फर्क पड़ता है कि हम कितने घंटे पूजा करते हैं? हम एक ऐसा समाज बन गए हैं जो दूसरी तरफ मुंह फेर लेने में सहज महसूस करता है। शायद यही असली शर्म की बात है। हो सकता है कि राम हमें यह शर्म महसूस करने, हम जो गलत कर रहे हैं उस पर सोचने, और ऐसे असली और स्थायी बदलाव करने का मौका देना चाहते हों जो न सिर्फ एक मंदिर को ठीक करें, बल्कि हमारे समाज को भी बेहतर बनाएं।
