ममता बनर्जी को एक और झटका, राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने दिया इस्तीफा, National Hindi News


कोयल मलिक TMC की राज्यसभा सांसद थीं और ममता बनर्जी ने उन्हें इसी साल अप्रैल महीने में ही राज्यसभा भेजा था। महज चंद महीनों के भीतर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) टूट गई है। ज्यादातर सांसद और विधायक पार्टी से दूर हो चुके हैं। किसी ने नया गुट बना लिया है तो किसी ने दूसरे दल के साथ विलय कर लिया। अब गुरुवार को ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद और एक्ट्रेस कोयल मलिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वह एक महीने पहले ही इस्तीफे का ऐलान कर चुकी थीं, लेकिन आज उन्होंने आधिकारिक तौर पर इस्तीफा भेज दिया।

चंद महीनों में ही दे दिया इस्तीफा

कोयल मलिक TMC की राज्यसभा सांसद थीं और ममता बनर्जी ने उन्हें इसी साल अप्रैल महीने में ही राज्यसभा भेजा था। महज चंद महीनों के भीतर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कोयल मलिक के अलावा, सुष्मिता देव, शुखेंदु शेखर आदि ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी की ओर से फिर से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बन गए। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी के करीबी नेता एक के बाद एक साथ छोड़ते जा रहे हैं। लोकसभा में 20 से ज्यादा सांसद काकोली के नेतृत्व वाले गुट के साथ एनसीपीआई में विलय कर चुके हैं। वहीं, 60 से ज्यादा विधायक भी ममता का साथ छोड़ चुके हैं। बीते दिन, मदन मित्रा ने भी टीएमसी से इस्तीफा देते हुए बागी गुट ज्वाइन कर लिया।

बागी गुट में शामिल हुए मदन मित्रा

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक मदन मित्रा बुधवार को नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए। विधायक ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

‘मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं’

इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीने से अभूतपूर्व बगावत का सामना कर रहा है। मित्रा ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, ”मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं। मैं तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं।” उन्होंने कहा, ”शायद उस कमरे में आरामदायक बिस्तर था, जबकि इस कमरे में केवल एक चारपाई है। मैंने चारपाई को चुना है।” उन्होंने घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में अब कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे, हालांकि वह तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे।



Leave a Comment