मालवीय नगर अग्निकांड:विदेशी मेहमानों से भरे होटल में भाषा बनी बड़ी चुनौती, फिर भी नहीं रुका राहत कार्य – Malviya Nagar Fire: Language Poses A Major Challenge In A Hotel Full Of Foreign Guests


होटल में ठहरे कई विदेशी नागरिक स्थानीय भाषा नहीं समझते थे। ऐसे में उन्हें बाहर निकालना और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना और भी चुनौतीपूर्ण था। स्थानीय युवा मोहम्मद शोएब ने बताया कि कई विदेशी नागरिक बहुत घबरा गए थे। कुछ लोग अंग्रेजी में मदद मांग रहे थे। हम उन्हें इशारों और टूटी-फूटी अंग्रेजी में बाहर आने के लिए कहते रहे। उन्होंने बताया कि कुछ विदेशी नागरिकों को धुएं की वजह से सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी। 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां देर से पहुंचीं। इस बीच स्थानीय युवाओं ने अपने स्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया था। स्थानीय निवासी फातिमा ने बताया कि जब तक दमकल की गाड़ियां पहुंचतीं, तब तक हम कई लोगों को बाहर निकाल चुके थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, शुरुआती मिनटों में किया गया प्रयास ही कई जिंदगियां बचाने में निर्णायक साबित हुआ।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही इन युवाओं ने लोगों को बचाने का अभियान शुरू कर दिया था। कुछ युवक होटल के भीतर घुस गए, जबकि कुछ ने बाहर बचाव की तैयारी शुरू कर दी। आसपास की दुकानों और घरों से गद्दे, कंबल और चादर लाकर होटल के नीचे बिछाई गई ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों की जान बचाई जा सके। आग लगने की खबर फैलते ही आसपास के लोग होटल के बाहर जमा होने लगे। हर कोई डरा था। होटल के अंदर से मदद के लिए आवाजें आ रही थीं। इसी बीच असरार खान, वकार, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद शोएब खान, वसीम राजा और उनके साथियों ने हालात देखते हुए खुद राहत कार्य शुरू कर दिया।हादसे की प्रत्यक्षदर्शी शबीना खान ने बताया कि उस समय किसी को अपनी जान की परवाह नहीं थी।

सभी की कोशिश केवल इतनी थी कि किसी तरह होटल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। स्थानीय युवा वकार ने बताया कि आग लगने के कारण ऊपर खड़े लोग डर चुके थे। धुआं इतना था कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हम लोगों ने नीचे गद्दे बिछाए और ऊपर वालों को आवाज लगाई कि अगर निकलने का कोई रास्ता नहीं है तो नीचे कूद जाएं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोगों ने तीसरी और चौथी मंजिल से छलांग लगाई। नीचे मौजूद युवाओं ने गद्दों को लगातार इधर-उधर खिसकाकर गिरने वाले लोगों को संभाला। अगर गद्दे नहीं बिछाए जाते तो ऊपर से कूदने वाले अधिकांश लोग गंभीर रूप से घायल हो सकते थे।


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