संवाद सहयोगी, तारापुर (मुंगेर)। तारापुर क्षेत्र में एक तरफ जहाँ विकास की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विकास की इस तेज़ रफ्तार में स्थानीय किसान पिसने को मजबूर हैं। उपजाऊ कृषि भूमि के लगातार हो रहे अधिग्रहण से स्थानीय किसानों को अपने और अपने परिवार के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
अकबर खान, उमेश प्रसाद सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, विनोद सिंह, जर्मनी यादव और मीना देवी सहित कई किसानों का कहना है कि सड़क और पर्यटन जैसी परियोजनाएं क्षेत्र के विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। हालांकि, जिस रफ्तार से कृषि योग्य जमीनों का अधिग्रहण हो रहा है, उससे आने वाले सालों में कई किसान पूरी तरह भूमिहीन हो जाएंगे। अधिकांश जमीनें अत्यधिक उपजाऊ हैं, जहाँ साल में दो फसलें आसानी से होती हैं। ऐसे में खेती योग्य जमीन कम होने से रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
एक ही परिवार को बार-बार देनी पड़ रही है जमीन
पीड़ित किसानों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनकी जमीनों का बार-बार अधिग्रहण किया जा रहा है:
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बार-बार अधिग्रहण: किसानों की अधिकांश जमीन पहले रिंग रोड के लिए ली गई थी और अब धार्मिक पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए लगभग 15 एकड़ और भूमि अधिग्रहण करने की प्रक्रिया चल रही है।
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समाप्त हो रहा खेती का आधार: एक ही परिवार को अलग-अलग योजनाओं के लिए कई बार जमीन देनी पड़ रही है, जिससे उनके पास खेती का मूल आधार ही खत्म होता जा रहा है।
पुराना मुआवजा अब तक बकाया, नीति पर पुनर्विचार की मांग
किसानों ने बताया कि पूर्व में कच्ची कांवरिया पथ निर्माण के लिए भी जमीनों का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन उसका मुआवजा आज तक कई प्रभावित किसानों को नहीं मिल सका है। इसके अलावा, वर्तमान में प्रस्तावित मुआवजा राशि मौजूदा बाजार मूल्य की तुलना में बहुत कम है। किसानों ने राज्य सरकार से मांग की है कि भूमि अधिग्रहण की वर्तमान नीति पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए।
मुआवजे के बदले मिले स्थायी नौकरी
क्षेत्रीय किसान संघ के वरिष्ठ सदस्य राम अनुग्रह सिंह ने कहा कि सरकार को केवल एकमुश्त मुआवजा देकर पल्ला झाड़ने के बजाय प्रभावित परिवारों के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान करना चाहिए। नौकरी मिलने से प्रभावित परिवारों को आय का स्थायी स्रोत मिलेगा और उनका भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।
विकास का प्रयास सराहनीय, फिर भी असमंजस बरकरार
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्थानीय विधायक बनने से पहले से शुरू हुए प्रयासों का ही नतीजा है कि आज तारापुर में इतनी बड़ी-बड़ी विकास योजनाएं आ रही हैं, जो निसंदेह सराहनीय हैं। इसके बावजूद, अपनी आजीविका के मुख्य साधन (खेती) को छिनता देख किसानों के मन में भविष्य को लेकर गहरा असमंजस और डर बना हुआ है।