जागरण संवाददाता, भिवानी। पदक जीतने की होड़ में प्रतिबंधित दवाओं और स्टेरायड का बढ़ता इस्तेमाल भारतीय खेल जगत के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने जुलाई 2026 में जारी अस्थायी निलंबित खिलाड़ियों की सूची में 77 खिलाड़ी और दो कोच डोप टेस्ट में पाजिटिव पाए गए हैं।
सबसे अधिक मामले एथलेटिक्स से सामने आए हैं, जहां 24 खिलाड़ी और दो कोच, यानी कुल 26 सदस्य डोपिंग के दायरे में आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल खिलाड़ियों के करियर ही नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की साख के लिए भी बड़ा खतरा है।
नाडा की सूची के अनुसार वेटलिफ्टिंग के नौ, कुश्ती के छह, बाडी बिल्डिंग के चार, वुशु के तीन, जबकि वालीबाल, मुक्केबाजी, जूडो, रोइंग और पावरलिफ्टिंग के दो-दो खिलाड़ी डोप टेस्ट में पाजिटिव पाए गए हैं। इसके अलावा फुटबाल, मोटरसाइकिल रेसिंग, किक बॉक्सिंग, जू-जित्सु, हैंडबाल, हाकी, कुराश, कराटे, रोलर स्पोर्ट्स, क्रिकेट और ताइक्वांडो सहित कई खेलों में भी एक-एक खिलाड़ी प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन के मामले में पकड़ा गया है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि कम समय में बेहतर प्रदर्शन और पदक हासिल करने की लालसा में कुछ खिलाड़ी प्रतिबंधित स्टेरायड का सहारा ले रहे हैं। कई मामलों में बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट और इंजेक्शन का इस्तेमाल भी खिलाड़ियों को डोपिंग के जाल में फंसा देता है। नाडा की जांच में स्टैनोजोलोल, मेथैंडिएनोन, मेफेंटरमिन, क्लेनब्यूटेरोल, सार्म्स (एसएआरएमएस) और 19-नारएंड्रोस्टेरोन जैसे प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन के मामले सामने आए हैं।
खेल में ईमानदारी ही सबसे बड़ी ताकत है। कोई भी दवा या सप्लीमेंट लेने से पहले नाडा की प्रतिबंधित सूची और ग्लोबल डीआरओ की जांच जरूर करनी चाहिए। खिलाड़ी बेहतर करियर के लिए प्रतिबंधित स्टेरायड का प्रयोग न करें। -राजकुमार मिटान, सदस्य एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया
आज कई खिलाड़ी और अभिभावक जल्द सफलता पाने की चाह में गलत रास्ता चुन रहे हैं। इसका परिणाम यह होता है कि खिलाड़ी का पूरा करियर समाप्त हो जाता है और दोबारा खेलों में वापसी लगभग असंभव हो जाती है। खिलाड़ी नशे और डोपिंग से दूर रहकर मेहनत के दम पर करियर बनाएं -सत्यवीर धनखड़, खेल मीडिया प्रभारी