मौसम का ये कैसा खेल! कहीं बारिश को तरस जाएंगे लोग, कहीं बाढ़ का खतरा; इन राज्यों के लिए अलर्ट


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पूरे देश को कवर कर चुका मानसून अगले कुछ दिनों के लिए अपना रुख बदलने जा रहा है। शुरुआती सूखे के बाद जुलाई के पहले हफ्ते में उत्तर और मध्य भारत में लगातार सक्रिय रहने के बाद ट्रफ लाइन उत्तर की ओर खिसक रही है, जिसके चलते पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में वर्षा की स्थितियां कमजोर पड़ जाएंगी।

हालांकि हिमाचल, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, बंगाल एवं पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश बढ़ने की संभावना है।

बारिश की संभावना कम रहेगी

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मानसून ट्रफ दोबारा दक्षिण की ओर नहीं लौटती, तब तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की संभावना कम रहेगी। ट्रफ के फिर से नीचे आने में चार से पांच दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।

आईएमडी का मानना है कि कुछ दिनों की भारी वर्षा से पूरे मानसून की तस्वीर नहीं बदल जाती। जुलाई के बाकी दिनों में वर्षा का वितरण एवं अलनीनो की तीव्रता ही आगे की स्थिति तय करेगी, लेकिन इतना तय है कि मानसून ब्रेक से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होगी।

हिमालय की तलहटी तक पहुंची ट्रफ लाइन

स्काईमेट के अनुसार दिल्ली और आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ गया है। ट्रफ लाइन उत्तर की ओर हिमालय की तलहटी तक पहुंच गई है। दूसरी तरफ ओडिशा और बंगाल के तटीय क्षेत्र के पास एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं का रुख पूर्वी भारत तक सिमट गया है।

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इसका फायदा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बंगाल को मिलेगा, जहां अगले चार से पांच दिनों तक अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है

मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार के बाद मानसून की गतिविधियां पहाड़ी और तराई क्षेत्रों तक सीमित होने लगेंगी। हिमाचल एवं उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, जबकि उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बारिश का दौर कमजोर पड़ने लगेगा।

पंजाब और हरियाणा में एक सप्ताह तक बारिश की संभावना नहीं है। दिल्ली में भी मौसम साफ हो जाने से तापमान बढ़ेगा। मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, नीमच एवं खंडवा जैसे पश्चिमी जिलों में मौसम साफ हो सकता है, जबकि छत्तीसगढ़ में तीन-चार दिनों तक बारिश जारी रह सकती है।

मानसून पर चिंता बरकरार

जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश के बावजूद मानसून को लेकर चिंता खत्म नहीं हुई है। जून में देश में केवल 99.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 43 प्रतिशत कम थी। वर्ष 1901 के बाद यह जून के सबसे शुष्क पांच महीनों में शामिल है।

सबसे अधिक कमी मध्य भारत में हुई, जहां सामान्य से 50 प्रतिशत से अधिक कम वर्षा हुई। असर फसलों की बुवाई पर पड़ा और जून के अंत तक बुवाई का रकबा सामान्य से 23 प्रतिशत पीछे रहा। जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून ने जरूर जोरदार वापसी की। इस दौरान देश में जुलाई में सामान्य से 45 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।

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