राजपाल यादव को जेल, दिल्‍ली HC का चेक बाउंस केस में फैसला, जुर्माना भी लगा, कहा- एक्‍टर का व्‍यवहार संदिग्ध – rajpal yadav to go back to jail in cheque bounce case delhi high court calls his actions dubious


दिल्ली हाई कोर्ट से राजपाल यादव को बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को चेक बाउंस मामले में उनकी सजा को बरकरार रखा है। उनके व्यवहरा को संदिग्ध बताते हुए तीन महीने फिर जेल की सजा सुनाई गई है।

Rajpal Yadav To Go Back To Jail major setback for actor
राजपाल यादव चतीन महीने की जेल की सजा
बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस केस में उन्‍हें 3 महीने जेल की सजा सुनाई है। शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए एक्‍टर पर जुर्माना भी लगाया है। साथ ही सजा बरकरार रखते हुए राजपाल यादव के व्यवहार को ‘संदिग्ध’ बताया और अधिकारियों से उन्हें वापस जेल भेजने को कहा।

बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को अदालत ने चेक बाउंस मामले में उनकी सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें फिर से जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में एक्टर का रवैया संदिग्ध रहा है।

मामला साल 2010 का है, जब 5 करोड़ का कर्ज लिया था

यह मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और इसके बाद वह तय समय पर कर्ज नहीं चुका पाए। कंपना को लौटाए गए चेक बाउंस बताए गए और इसी वजह से मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

2018 में छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को सही माना। फिर एक्टर ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां बता दें कि साल 2025 के आखिर तक, सात अलग-अलग मामलों में करीब 9 करोड़ रुपये का कर्ज़ बकाया था, जिसमें यादव को हर मामले में लगभग 1.35 करोड़ रुपये चुकाने थे।

कोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव बार-बार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे

जून 2024 में हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगाई थी और बकाया करीब 9 करोड़ रुपये चुकाने के लिए उन्हें ईमानदारी से प्रयास करने का मौका दिया था। लेकिन अदालत के मुताबिक, राजपाल यादव बार-बार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे। इसी वजह से इस साल 2 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था और अब उनकी सजा को भी बरकरार रखा गया है।

कोर्ट ने राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों में विरोधाभास पाया

हालांकि, पिछली सुनवाई में वर्चुअली पेश हुए राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कोर्ट को बताया कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक मौके पर कहा था, ‘मेरे सवालों के जवाब नहीं दिए जा रहे हैं। अंडरटेकिंग में जो बात कही गई थी, अब उससे अलग बातें सामने रखी जा रही हैं।’ कोर्ट के इस कॉमेंट से साफ था कि उसे राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों में विरोधाभास नजर आया।

‘राजपाल यादव अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते’

शिकायतकर्ता कंपनी की तरफ से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने कोर्ट में कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में अब वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।

हाई कोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की

मामले को खत्म करने के लिए हाई कोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की। कोर्ट के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये लेकर मामले का पूरा और अंतिम निपटारा करने के लिए भी तैयार हो गई थी लेकिन पिछली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके

राजपाल यादव ने कोर्ट में कहा कि उन्हें अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी रकम चुका चुके हैं। इसके बाद अदालत ने 3 करोड़ रुपये तय समय के भीतर चुकाने का एक तरीका भी सुझाया। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि यह सिर्फ एक न्यायिक सुझाव है, कोई अंतिम समझौता नहीं। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

16 फरवरी 2026 को जेल से हुए थे रिहा

यहां याद दिला दें कि अपनी फिल्म ‘अता-पता लापता’ (2012) के निर्माण के लिए लिए गए लगभग ₹5 करोड़ के लोन और चेक बाउंस मामले में 5 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल गए थे। बकाया रकम न चुका पाने के कारण उन्हें सरेंडर करना पड़ा था। बाद में, अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उन्हें 16 फरवरी 2026 को ₹1.5 करोड़ जमा करने की शर्त पर अंतरिम जमानत दी थी। वे 17 फरवरी 2026 को जेल से रिहा हो गए थे।

अर्चना सिंह

लेखक के बारे मेंअर्चना सिंहअर्चना सिंह नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर हैं। पत्रकारिता की दुनिया में उनका सफर मुंबई से शुरू हुआ, जहां उन्होंने नवभारत टाइम्स अखबार के बाद न्यूज18 के साथ काम किया। साल 2008 से वह दिल्ली में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ी हुई हैं। अपने करियर के दौरान उन्हें विविध भारती के साथ भी काम करने का अवसर मिला, जिसने उनके अनुभवों को तराशा। पत्रकारिता के सफर में उन्होंने क्राइम बीट से लेकर बीएमसी और लोकल न्यूज़ रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां संभालीं। इसके साथ ही फिल्मी पार्टियों, इवेंट्स और फिल्मी कलाकारों के इंटरव्यूज़ कवर किए। मुंबई में आयोजित काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल, सेंट जेवियर्स कॉलेज का ‘मल्हार फेस्टिवल’ जैसे इवेंट्स की रिपोर्टिंग भी इनके अनुभव का हिस्सा रही हैं। मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अबू सलेम को जब भारत लाया गया था, उस अहम घटना पर रिपोर्टिंग करने का मौका भी इन्हें मिला।

विशेषज्ञता : नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में रहते हुए अर्चना सिंह ने एंटरटेनमेंट, न्यूज़, बिजनेस और लाइफस्टाइल जैसे कई अहम बीट्स पर काम किया। उन्हें रिसर्च आधारित फिल्मी खबरें, फीचर स्टोरीज और फिल्म या टेलिविजन से जुड़े मुद्दों पर ओपिनियन और एनालिसिस आर्टिकल लिखना खास तौर पर पसंद है। हॉलीवुड और बॉलीवुड की खबरें, एक्सप्लेनर स्टोरीज, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, फिल्मों और वेब सीरीज के रिव्यू, गॉसिप्स, फीचर कंटेंट, इंटरव्यू और टेलिविजन शोज को फैक्ट-चेक के साथ कवर करने में उनकी अच्छी पकड़ है।

पत्रकारिता का अनुभव: करीब 20 साल के पत्रकारिता अनुभव के साथ, इन्होंने अपने करियर के 18 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन को दिए हैं। इस दौरान ये संस्थान के एंटरटेनमेंट डेस्क का अहम हिस्सा रहीं। इनके काम के लिए इन्हें संस्थान की ओर से ‘अचीवर्स ऑफ क्रेडिबल एक्सलेंस ग्रैंड सल्यूट अवॉर्ड’ सहित कई बार बेस्ट परफॉर्मर अवॉर्ड दिया जा चुका है।

अर्चना सिंह ने मुंबई के सोमैया कॉलेज से साइंस विद्याविहार से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद इन्होंने केसी कॉलेज ऑफ आर्ट्स, मुंबई से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया।… और पढ़ें