रुपया 95.5 के पार: क्या पेट्रोल-डीजल और विदेश यात्रा पर पड़ेगा असर?
कच्चा तेल मजबूत होने के बीच आज सुबह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.5 के आसपास कारोबार करता दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड वायदा 91 डॉलर के ऊपर बना हुआ है, जिससे इंपोर्टेड महंगाई का खतरा बढ़ गया है। हालांकि ट्रेडर्स डॉलर में थोड़ी नरमी देख रहे हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से बाजार को बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। ऐसे में आम लोगों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज पेट्रोल-डीजल, विदेश यात्रा और गैजेट्स के इंपोर्ट पर कितना असर पड़ेगा और इंट्राडे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का क्या रुख रहेगा?
रुपया आखिर इस स्तर पर क्यों आया? दरअसल, कच्चे तेल की कीमतों में रिकवरी आई है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी ऊपरी स्तरों पर टिकी हुई है, जिससे डॉलर को लगातार सहारा मिल रहा है। दूसरी ओर, उतार-चढ़ाव को थामने के लिए सरकारी बैंकों की ओर से डॉलर की बिक्री से रुपये को सहारा मिला है। हाल के कारोबारी सत्रों में 94.8–95.2 के आसपास सपोर्ट देखने को मिला है, लेकिन कच्चे तेल में तेजी के चलते रुपये की रिकवरी पर ब्रेक लग गया। वहीं इस साल का सबसे निचला स्तर 96.96 अभी भी बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहा है।

रुपया, ईएमआई, ईंधन, विदेश यात्रा और गैजेट्स का इंपोर्ट
सबसे पहले पेट्रोल-डीजल का गणित समझते हैं। एक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है। अगर ब्रेंट क्रूड में 1 डॉलर का बदलाव आता है, तो प्रति लीटर कच्चे तेल की कीमत करीब 0.0063 डॉलर बदल जाती है। 95.5 रुपये प्रति डॉलर की दर पर, टैक्स, माल भाड़ा और मार्जिन जोड़ने से पहले यह अंतर करीब 60 पैसे प्रति लीटर बैठता है। हालांकि तेल कंपनियां डायनेमिक प्राइसिंग के तहत एकदम से पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डालतीं, इसलिए पेट्रोल पंपों पर कीमतें बदलने में समय लग सकता है या अलग-अलग शहरों के टैक्स के हिसाब से इसमें अंतर हो सकता है। ऐसे में अगर रुपया कमजोर होता है, तो कच्चे तेल में गिरावट का फायदा भी आम जनता तक नहीं पहुंच पाता।
| लाइव संकेत | स्तर | सोर्स/समय |
|---|---|---|
| USD/INR | 95.57 | NewsBytes, 20 अगस्त |
| ब्रेंट क्रूड | $92.2 | रॉयटर्स वाया याहू, 19 अगस्त |
| यूएस 10-ईयर यील्ड | ~4.65% | रॉयटर्स वाया याहू, 19 अगस्त |
| भारत की प्रमुख दरें (संभावित) | दायरा | रेफरेंस |
| 1 साल की बैंक एफडी (FD) | ~6.5%–7.3% | पैसाबाजार रेट शीट |
| बड़े बैंकों का होम लोन (फ्लोटिंग) | ~8.2%–9.1% | एक्सिस बैंक कार्ड दरें |
अब गैजेट्स और विदेश यात्रा की बात करते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये में 1 रुपये की गिरावट से 1,000 डॉलर के फोन की प्री-टैक्स लैंडेड कॉस्ट (आयात लागत) सीधे 1,000 रुपये बढ़ जाती है; हालांकि रिटेल मार्केट में कीमतें तुरंत नहीं बढ़तीं। वहीं अगर आप 2,500 डॉलर का विदेशी ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो रुपये में 1 रुपये की कमजोरी से कार्ड चार्ज और फ्यूल सरचार्ज हटाकर ही आपकी यात्रा 2,500 रुपये महंगी हो जाती है। इसके अलावा, रुपया कमजोर होने पर सोने की इंपोर्ट कॉस्ट भी बढ़ जाती है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके दाम स्थिर ही क्यों न हों।
आरबीआई के रुख पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। डीलरों के मुताबिक, डॉलर में उछाल आने पर सरकारी बैंक बिकवाली करते हैं और जब रुपया सुधरता है तो निर्यातक आपूर्ति बढ़ाते हैं। वहीं आयातक अहम स्तरों के पास हेजिंग कर रहे हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए आज रुपये का कारोबार पुराने सपोर्ट जोन और हालिया ऊपरी स्तरों के दायरे में रहने का अनुमान है। ऊपर दिए गए डैशबोर्ड के ताजा आंकड़े बताते हैं: USD/INR 95.57, ब्रेंट क्रूड 92.2 और अमेरिका की 10 साल की यील्ड 4.65 फीसदी के करीब है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव के लिए ऑयल कंपनियों के अपडेट और स्थानीय टैक्स की दरों पर नजर रखें।