इंग्लैंड सीरीज के दौरान रोहित शर्मा के अचानक संन्यास लेने और 2027 वर्ल्ड कप योजनाओं से बाहर होने की अफवाहों पर बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने दो दिनों बाद सफाई दी है। उन्होंने बताया कि लॉर्ड्स वनडे रोहित का आखिरी मैच नहीं है और वे देश के लिए खेलते रहेंगे।

इस खबर के बाहर आते ही सोशल मीडिया से लेकर दिग्गज क्रिकेटरों और फैंस के बीच एक तीखी बहस छिड़ गई। हर कोई हैरान था कि हालिया चैंपियंस ट्रॉफी जिताने वाले और वनडे क्रिकेट के सबसे बड़े महारथियों में से एक रोहित शर्मा को इस तरह अचानक क्यों ड्रॉप किया जा रहा है? हालांकि, इस पूरे बवाल के दो दिनों बाद आखिरकार बीसीसीआई की ओर से एक आधिकारिक सफाई सामने आई, जिसने इस विवाद को शांत करने की कोशिश की। लेकिन सवाल यह उठता है कि इस सफाई को आने में इतनी देरी क्यों हुई और रोहित के संन्यास न लेने से किसे घाटा होने वाला था? आइए समझते हैं इसके पीछे का पूरा इनसाइड गेम।
दो दिन बाद टूटी बीसीसीआई की चुप्पी, देवजीत सैकिया ने दी सफाई
जब रोहित शर्मा के संन्यास की खबरें आग की तरह फैल चुकी थीं, तब जाकर शुक्रवार को बीसीसीआई ने इन तमाम अटकलों को पूरी तरह से खारिज किया। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने PTI से बातचीत करते हुए साफ लफ्जों में कहा, ‘रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर मीडिया में काफी मनगढ़ंत अटकलें लगाई जा रही हैं। मैं पूरी जिम्मेदारी और जोर देकर यह कहना चाहता हूं कि बोर्ड के भीतर ऐसी कोई चर्चा नहीं हो रही है कि रोहित रविवार को लॉर्ड्स पर अपना आखिरी मैच खेलेंगे।’ सैकिया ने आगे स्पष्ट किया कि रोहित शर्मा भारतीय वनडे टीम के एक बेहद सम्मानित और नियमित सदस्य हैं। वे जब तक टीम की योजनाओं में फिट बैठते हैं और खेलना चाहते हैं, देश के लिए अपनी सेवाएं देते रहेंगे। सीधे शब्दों में कहें तो लॉर्ड्स वनडे उनका आखिरी मैच कतई नहीं है।
आखिर बीसीसीआई को सफाई देने में इतनी देर क्यों लगी?
क्रिकेट गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि जब दूसरे वनडे के दौरान ही यह अफवाह उड़ चुकी थी, तो बीसीसीआई ने तुरंत रिएक्ट क्यों नहीं किया? दो दिनों की इस देरी के पीछे कई बड़े रणनीतिक और आर्थिक कारण माने जा रहे हैं। रोहित शर्मा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि ग्लोबल क्रिकेट का एक बहुत बड़ा ब्रांड हैं। अचानक उनके संन्यास की खबर से ब्रॉडकास्टर्स, स्पॉन्सर्स और एडवरटाइजर्स के बीच खलबली मच गई। अगर रोहित अचानक बाहर होते, तो आने वाली सीरीज के मीडिया राइट्स की वैल्यू और व्यूअरशिप को तगड़ा झटका लग सकता था।
टीम का मनोबल और गलत इम्प्रेशन
इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ सीरीज के बीच में इस तरह की लीक खबरों से टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का माहौल बिगड़ रहा था। दुनिया भर में यह मैसेज जा रहा था कि बीसीसीआई अपने दिग्गजों की कद्र नहीं करता और उन्हें जबरन संन्यास की ओर धकेल रहा है। बोर्ड को एहसास हुआ कि इस नेगेटिव पब्लिसिटी से उनके ब्रांड को भारी नुकसान हो रहा है, जिसके बाद डैमेज कंट्रोल के लिए यह बयान जारी किया गया। हो सकता है कि पर्दे की पीछे की कहानी ऐसी ही हो, लेकिन बीसीसीआई को देरी से इस बात का एहसास हुआ कि रोहित शर्मा के संन्यास ने उन्हें काफी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
हिटमैन के संन्यास नहीं लेने से किसका घाटा?
रोहित शर्मा ने भले ही हाल के कुछ मैचों में अपनी सर्वश्रेष्ठ लय न दिखाई हो, लेकिन वनडे क्रिकेट में उनका कद और रिकॉर्ड्स गवाही देते हैं कि वे इस फॉर्मेट के बेताज बादशाह हैं। साल 2019 विश्व कप में उनके 5 ऐतिहासिक शतक और 2023 के वनडे विश्व कप में उनकी कप्तानी व निस्वार्थ बल्लेबाजी इसका सबसे बड़ा सबूत है। वे टी20 और टेस्ट से पहले ही संन्यास ले चुके हैं, ऐसे में वे अपना पूरा ध्यान वनडे पर लगाना चाहते हैं। अगर रोहित शर्मा अभी संन्यास नहीं लेते हैं, तो सबसे बड़ा घाटा उन सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट के कुछ गुटों को होगा जो 2027 विश्व कप के लिए यशस्वी जायसवाल जैसे युवाओं को पूरी तरह सेट कर के एक नई युवा टीम बनाने की जल्दबाजी में हैं। रोहित के टीम में बने रहने से युवा खिलाड़ियों को प्लेइंग 11 में जगह देने की सेलेक्टर्स की जल्दबाजी पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
